दिल्ली में शराब के नशे में महिलाएं नहीं करती हैं ड्राइविंग, 2017 में नहीं कटा एक भी चालान

यहां हम आपको एक-एक कर देश के सभी प्रमुख समाचार पत्रों की बड़ी खबर से रू-ब-रू करवाएंगे.

Mar 13, 2018, 09:44 AM IST

नई दिल्ली: यहां हम आपको एक-एक कर देश के सभी प्रमुख समाचार पत्रों की बड़ी खबर से रू-ब-रू करवाएंगे. मंगलवार के अखबारों की बात करें तो सभी अखबारों ने नेपाल में हुए विमान हादसे और पीएम मोदी के साथ फ्रांस के राष्ट्रपति की वाराणसी यात्रा की खबर को प्रमुखता से प्रकाशित किया है.

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टाइम्स ऑफ इंडिया: टाइम्स ऑफ इंडिया ने दिल्ली पुलिस के आंकड़ों के हवाले से अपने मंगलवार के अंक में पहले पन्ने पर एक खुलासा किया है. खबर में बताया गया है कि दिल्ली पुलिस के आंकड़े बताते हैं कि दिल्ली में महिलाएं शराब पीकर गाड़ियां नहीं चलाती हैं. इस खबर का आधार दिल्ली पुलिस द्वारा किए गए चालानों का रिकॉर्ड है. खबर के मुताबिक 2017 में दिल्ली पुलिस ने एक भी महिला को शराब के नशे में ड्राइविंग करते हुए नहीं पाया. जी हां, 2017 में एक भी महिला का चालान शराब पीकर गाड़ी चलाने के जुर्म में नहीं किया गया. जबकि इस साल अब तक केवल एक महिला का चालान काटा गया है. खबर में यह भी बताया गया है कि दिल्ली पुलिस इसके पीछे तर्क देती है कि शहर में 71 पुरुष लाइसेंस धारकों की तुलना में सिर्फ 1 महिला लाइसेंस धारक है.

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दैनिक भास्कर: रीयल एस्टेट कंपनी यूनिटेक को सुप्रीम कोर्ट से बड़ा झटका लगा है. सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को केस की सुनवाई के दौरान कहा कि यूनिटेक की गैर-विवादित सम्पत्ति की नीलामी का आदेश देंगे ताकि फ्लैट खरीदारों को पैसा वापस किया जा सके. दैनिक भास्कर ने इस खबर को अपने मंगलवार के अंक में पहले पन्ने पर प्रकाशित किया है. खबर के मुताबिक चीफ जस्टिस दीपक के नेतृत्व वाली बेंच ने कहा कि यूनिटेक ने खरीदारों को धोखा दिया है. कोर्ट ने यूनिटेक को अपनी गैर-विवादित संपत्ति के साथ डायरेक्टर की निजी संपत्तियों की लिस्ट देने का आदेश दिया है. खबर में बताया गया है कि कोर्ट ने जेएम फाइनेंस लिमिटेड पर 25 लाख का जुर्माना भी लगाया है. जेएम फाइलेंस लिमिटेड ने सुप्रीम कोर्ट में कहा था कि वो यूनिटेक का लोन चुकाएगा और लंबित प्रोजेक्ट को पूरा करेगा. सुप्रीम कोर्ट जल्द ही प्रॉपर्टी को बेचने को लेकर एक्सपर्ट नियुक्त कर सकता है.

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दैनिक जागरण: दैनिक जागरण के मंगलवार के अंक में पहले पन्ने पर छपी एक खबर के मुताबिक बिहार में सूचना का अधिकार कानून (आरटीआई) की खूब धज्जियां उड़ रही हैं. सूचना मांगने वालों पर अफसरों के स्तर से फर्जी मुकदमे दर्ज कराए जा रहे हैं. खबर में दावा किया गया है कि ऐसे मुकदमों से जुड़े 600 आवेदन राज्य सूचना आयोग, राज्य मानवाधिकार आयोग एवं डीजीपी के दफ्तर में सुनवाई के लिए लंबित हैं. इसमें रंगदारी मांगने, एससी-एसटी उत्पीड़न करने एवं अपहरण का प्रयास जैसे केस शामिल हैं. अफसरों के कारनामे से पूरा सिस्टम कठघरे में है. खबर में बताया गया है कि राज्य सूचना आयोग ने आरटीआई कार्यकर्ताओं पर दर्ज हो रहे फर्जी मुकदमों को गंभीरता से लिया है. आयोग ने इस मामले में गृह सचिव एवं डीजीपी को पत्र लिखा है और फर्जी मुकदमों की जांच करने, झूठे मुकदमे वापस लेने एवं दोषी अधिकारियों पर आवश्यक कार्रवाई करने को कहा है.

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हिन्दुस्तान: हिन्दुस्तान अखबार ने अपने मंगलवार के अंक में पहले पन्ने पर काम की खबरों सेक्शन के अंतर्गत दो बेहद जरूरी खबरें प्रकाशित की हैं. पहली खबर के मुताबिक रेलवे में 90 हजार रिक्त पदों पर आवेदन की अंतिम तारीख 12 मार्च से बढ़ाकर इसे 31 मार्च तक कर दिया गया है. खबर में यह भी बताया गया है कि जिन दिव्यांगों ने पहले आवेदन कर दिया है वह रेलवे की वेबसाइट पर दिव्यांग प्रणाम पत्र अपलोड कर सकेंगे. इसके अलावा देश में एमबीबीएस की पढ़ाई कर लेने के बाद परास्नातक की तैयारी कर रहे छात्र-छात्रओं के लिए भी एक अच्छी खबर है. दूसरी खबर के मुताबिक केंद्र सरकार ने 116 मेडिकल कॉलेजों में 601 पीजी की सीट बढ़ा दी है.

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नवभारत टाइम्स: केंद्रीय आवास व शहरी कार्य मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने सोमवार को साफ कहा कि सरकारी जमीन पर अतिक्रमण करने वालों की सरकार मदद नहीं कर सकती. सीलिंग सिर्फ उन जगहों पर हो रही है, जहां मास्टर प्लान का उल्लंघन कर अनधिकृत निर्माण हुआ है या पर्यावरण संबंधी नियमों का पालन नहीं किया किया है. नवभारत टाइम्स ने इस खबर को अपने पहले पन्ने पर प्रमुखता के साथ प्रकाशित किया है. खबर के मुताबिक उपराज्यपाल, डीडीए उपाध्यक्ष और तीनों निगमों के कमिश्नरों की मौजूदगी में पुरी ने कहा कि मास्टर प्लान में बदलाव करके ही सीलिंग की समस्या का हल निकल सकता है. सरकार ने इसी दिशा में बाकायदा पूरी प्रक्रिया का पालन करते हुए उपाय किए हैं. पुरी ने बताया कि सीलिंग से राहत के लिए अतिरिक्त FAR देने और मास्टर प्लान में संशोधन से जुड़े प्रावधानों पर सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में हलफनामा दायर कर दिया है. इसमें सिर्फ सीलिंग की समस्या का हल ही नहीं बताया गया है बल्कि एमिकस क्यूरी के सवालों के भी पॉइंट वाइज जवाब दिए गए हैं.

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