तस्वीरों में देखे कैसे अद्भुत रहस्यों को समेटे है उत्तराखंड का ये पर्वत, जो बन सकता है केव सर्किट

कुमाऊं क्षेत्र के पिथौरागढ़ जिले में स्थित इस पर्वत श्रेणी में हाल ही में उत्तराखंड अंतरिक्ष उपयोग केंद्र ने 9 गुफाओं की खोज की है. 

ज़ी न्यूज़ डेस्क | Jan 08, 2019, 11:53 AM IST

देहरादून, संदीप गुसाईं: ऋषि-मुनियों और अवतारों की भूमि में ऐसे कई स्थान हैं, जिनका आज भी रहस्य बरकरार है. वैसे तो दुनियाभर में ऐसी कई गुफाएं हैं, जोकि अपने आपमें अद्भुत रहस्य और अनोखी खासियत के लिए मशहूर हैं. लेकिन, देवों की नगरी उत्तराखंड में कई ऐसी गफाएं हैं, जहां उत्तराखंड अंतरिक्ष उपयोग केंद्र पहुंच चुका है. उत्तराखंड में एक पर्वत ऐसा भी है, जिसका जिक्र स्कंदपुराण के मानसखंड में गुफाओं के पर्वत के रूप में किया गया है. कुमाऊं क्षेत्र के पिथौरागढ़ जिले में स्थित इस पर्वत श्रेणी में हाल ही में उत्तराखंड अंतरिक्ष उपयोग केंद्र ने 9 गुफाओं की खोज की है, यहां पहले ही विश्व प्रसिद् पाताल भुवनेश्वर गुफा स्थित है, जहां मान्यता है कि 33 करोड़ देवी-देवता वास करते है. पिथौरागढ़ जिले से करीब 78 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है गंगोलीहाट कस्बा, जो रामगंगा और सरयू नदी से घिरा हुआ है. 

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मां हाटकालिका सिद्धपीठ

Hatkalika temple

देवदार के झुरमुट के बीच बसा ये छोटा कस्बा पंचाचूली और नंदा देवी पर्वत श्रृंखला के नैसर्गिक दीदार भी कराता है. गंगोलीहाट में प्रसिद्व मां हाटकालिका सिद्धपीठ मंदिर स्थित है. गंगोलीहाट शैल पर्वत पर स्थित है और इसी पर्वत श्रृंखला में 9 गुफाएं खोजी गई है, जिसके बाद इस पूरे क्षेत्र को केव सर्किट यानी गुफ सर्किट में विकसित करने की मांग शुरू हो गई है. चूना पत्थर की आकृति से बनी इन गुफाओं में कई कलाकृतियां हैरान करने वाली है. 

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मुक्तेश्वर गुफा

Mukteshwar cave

मुक्तेश्वर गुफा गंगोलीहाट में स्थित हाटकालिका मंदिर से 1 किमी नीचे स्थित है. इस गुफा का वर्णन स्कंदपुराण के मानसखंड में भी आता है. रावलगांव के पास स्थित यह गुफा के चारों ओर देवदार के घने पेडों से घिरा है. गंगोलीहाट और बेरीनाग क्षेत्र के सैकडों श्रद्धालु हर साल शिवरात्रि, सावन और नौ रात्रि में पूजा अर्चना के लिए आते हैं. यह गुफा करीब 25 मीटर लम्बी है और 20 मीटर चौड़ी है. गुफा के भीतर दीवारों में चूना पत्थर से कई कलाकृतियां निर्मित है और इनसे लगातार पानी टपकटता रहता है. 

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शितलादेवी गुफा

Shitla devi cave

शीतलादेवी गुफा मुक्तेश्वर गुफा से 2 किमी नीचे स्थित है. इस गुफा के चारों तरफ देवदार, बांज, बुरांश का जंगल है और गुफा के भीतर शितला देवी की पूजा अर्चना की जाती है. ये गुफा करीब 1 मीटर लंबी है और वर्तमान में केवल स्थानीय लोग ही इस गुफा में पूजा अर्चना के लिए पहुंचते हैं. 

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शैलेश्वर गुफा

Shaileshwar Cave

शैलेश्वर गुफा गंगोलीहाट मंदिर से 7 किमी दक्षिण दिशा में स्थित है. 4 किमी सड़क मार्ग से सफर तय करने के बाद चौदार और गन्तोला गांव पड़ता है, यहां से करीब 1.5 किमी पैदल के द्वारा यहां पहुंचा जा सकता है. उत्तराखंड अंतरिक्ष उपयोग केंद्र की टीम केवल 20 मीटर अंदर ही इस गुफा के जा सके. गुफा अंदर काफी संकरी है. स्थानीय लोगों की माने तो गुफा करीब 100 मीटर लंबी है और यहां लगातार पानी बहता रहता है. 

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मैलचौरा गुफा

Mailachaura Cave

मैलचौरा गुफा गंगोलीहाट शहर से 6.5 किमी की दूरी पर पश्चिम दिशा में स्थित है. यह गुफा गोपिल गांव के पास स्थित है. गोपिल गांव से 1.5 किमी की दूरी पर सड़क मार्ग से 100 मीटर पैदल सफर कर इस गुफा तक पहुंचा जा सकता है. यह गुफा करीब 60 मीटर चौड़ी होगी और शुरुआत में यह गुफा करीब 1 मीटर चौड़ी है, लेकिन जैसै-जैसे आप अंदर प्रवेश करेंगे, तो गुफा की चौड़ाई बढ़ती जाती है. इस गुफा पर अभी और भी शोध बाकी है, यहां पर बिजली और पानी की मूलभूत सुविधाएं नहीं है. 

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दानेश्वर गुफा

Daneshwar cave

दानेश्वर गुफा गंगोलीहाट मंदिर से 6 किमी की दूरी पर उत्तर पश्चिम दिशा में स्थित है. यह गुफा सुतारगांव के पास स्थित है और रोड से करीब 1.5 किमी की दूरी से कच्चा रास्ता तय कर नीचे पहुंचना पड़ता है. दानेश्वर गुफा में भगवान शिव की पूजा अर्चना की जाती है. दानेश्वर गुफा कई रहस्यों से भरी है, जिसमें करीब 9 मंजिल है. गुफा के 3 मंजिल तो दिखाई देते है और यहां तक आसानी से पहुंचा भी जा सकता है. लेकिन, तीसरी मंजिल से आगे स्थानीय लोगों ने लकड़ी की सीढ़ी लगाई है. अंधेरा काफी होने की वजह से ये जगह आगे-आगे काफी डरावनी होने लगती है, क्योंकि दीवारों से लगातार पानी टपकता रहता है और चमगादड़ भी बहुत हैं. गुफा में लाईमस्टोन के कारण कई तरह की कलाकृतियां मौजूद है, जिसमें शिवलिंग जैसी बहुत की आकृतियां मिलती है. 

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सिंकोटेश्वर गुफा

Sinkoteshwar Cave

यह गुफा गंगोलीहाट कस्बे से 7 किमी की दूरी पर स्थित है. गंगोलीहाट से गोपिल गांव होते हुए यहां पहुंचा जा सकता है. गोपिल गांव से 2 किमी पैदल दूरी तय कर इस गुफा तक पहुंचना पड़ता है. कोई पक्का रास्ता न होने के कारण, यहां पहुंचने में काफी दिक्कतें आती है. इस गुफा का प्रवेश द्वार 1 मीटर से भी छोटा है, इसलिए इसमें प्रवेश करने में काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है. सिंकोटेश्वर गुफा के भीतर चिकनाई लिए लाईमस्टोन के पत्थर मौजूद है और उनमें से अभी कई निर्माण की प्रक्रिया में है. 

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भोलेश्वर गुफा

Bholeshwar Cave

ये गुफा गंगोलीहाट कस्बे से 14 किमी की दूरी पर भुली गांव के पास स्थित है. भुली गांव से 500 मीटर चढ़ाई तय कर खेतों के बीच में गुफा स्थित है. इस गुफा में भी भगवान शिव की पूजा अर्चना की जाती है. गुफा करीब 70-80 मीटर लंबी है और इसमें दो मंजिल है. गुफा के भीतर कई रहस्यमई कलाकृतियां आपको सम्मोहित कर देंगे. लाईमस्टोन के मजबूत चट्टान से निर्मित इन कलाकृतियां को देखकर ऐसा मालूम होता है, जैसे पातालभुवनेश्वर में प्रवेश कर लिया हो, भोलेश्वर गुफा में शिवरात्रि के दौरान मेले का आयोजन किया जाता है. 

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विगुतुंग गुफा

Bhrigtung Cave

ये गुफा गंगोलीहाट शहर से 5 किमी की दूरी पर उत्तर पूर्व में मल्लागरखा क्षेत्र के पास पाताल भुवनेश्वर गुफा के करीब स्थित है. मल्लागरखा से करीब 1.5 किमी की चढ़ाई तय कर इस गुफा में पहुंचा जा सकता है. यह गुफा पर्वत की चोटी पर स्थित है, जहां से पूरी घाटी का विहंगम दृश्य आपको मनमोहित कर देगा. बांज, कैल, फर और देवदार के घने जंगल के बीच चोटी पर स्थित इस गुफा का नैसर्गिक सौन्दर्य अपने आप में अदभुत है. गुफा करीब 20 मीटर गहरी है और इसमें एक समय में एक ही व्यक्ति प्रवेश कर सकता है. गुफा की दीवारों और छत पर स्टेलेक्टाइट की कलाकृतियां बनी हुई है.