महबूबा के बाद फारूक अब्दुल्ला की चेतावनी, 35(A) पर सरकार स्पष्ट करे स्थिति, नहीं तो...

नेशनल कॉन्फ्रेंस अध्यक्ष एवं सांसद फारूक अब्दुल्ला ने कहा है कि उनकी पार्टी पंचायत चुनाव में भाग नहीं लेगी जब तक अनुच्‍छेद 35ए पर केंद्र सरकार और राज्‍य सरकारों अपनी स्थिति साफ नहीं करतीं.

महबूबा के बाद फारूक अब्दुल्ला की चेतावनी, 35(A) पर सरकार स्पष्ट करे स्थिति, नहीं तो...
अलगाववादियों ने भी चुनाव बहिष्‍कार की मांग की है. (फोटो : एएनआई)

नई दिल्‍ली: नेशनल कॉन्फ्रेंस (एनसी) के अध्यक्ष एवं सांसद फारूक अब्दुल्ला ने कहा है कि उनकी पार्टी पंचायत चुनाव में भाग नहीं लेगी जब तक अनुच्‍छेद 35ए पर केंद्र सरकार और राज्‍य सरकारों अपनी स्थिति साफ नहीं करतीं. साथ ही उन्‍हें इस अनुच्‍छेद के संरक्षण के लिए कोर्ट और बाहर दोनों जगह प्रभावी कदम उठाने होंगे. इससे पहले अलगाववादियों ने जम्मू-कश्मीर में पंचायत और स्थानीय निकाय के चुनावों का बहिष्कार करने का आह्वान किया था. आज ही जम्मू-कश्मीर की पूर्व मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती ने भी धारा 370 और अनुच्छेद 35ए पर सरकार को चेतावनी दी थी.

तथाकथित ज्वाइंट रेजिस्टेंस लीडरशिप (जेआरएल) की बैठक के बाद इस आशय का एक बयान जारी किया गया था. जेआरएल में सैयद अली गिलानी, मीरवाइज उमर फारूक और मोहम्मद यासीन मलिक शामिल हैं. यह बैठक गिलानी के हैदरपुरा स्थित आवास पर हुई थी.

अनुच्छेद 35-ए को हटाने की क्या जरूरत है?
उधर अब्‍दुल्‍ला ने कश्मीर पर केंद्र सरकार द्वारा कई गलतियां करने का आरोप लगाते हुए कहा कि लोगों का दिल जीतने के लिए कदम उठाए जाने चाहिए. अब्दुल्ला ने कहा कि जब भी अनुच्छेद 35ए को हटाने जैसे मुद्दे उठते हैं, तब-तब राज्य के लोगों को ठेस पहुंचती है. अब्दुल्ला ने कहा था कि ऐसा नहीं है कि दिल्ली ने कोई गलती नहीं की. उसने कई गलतियां की हैं. अनुच्छेद 35-ए को हटाने की क्या जरूरत है? इस तरह की चीजों से लोग दुखी होते हैं. अगर आप दिलों से जुड़ना चाहते हैं, तो आपको लोगों का दिल जीतने के लिए कदम उठाने होंगे. इसके बिना आप नहीं जीत सकते.

पिछले चुनाव पर नहीं पड़ा था अलगाववादियों की मांग का असर
अलगाववादियों द्वारा जारी बयान में कहा गया है कि केंद्र कश्मीर में पंचायत चुनाव कराने और इस व्यवस्था को लागू करने पर जोर दे रही है लेकिन नयी दिल्ली का ध्यान जम्मू कश्मीर के लोगों को और यहां के संस्थाओं को सशक्त बनाने पर कभी नहीं रहा है. बयान में कहा गया है कि इन चुनावों का एकमात्र मतलब जम्मू कश्मीर पर नयी दिल्ली की पकड़ को और मजबूत बनाना है. इसी तरह के चुनाव बहिष्कार के आह्वान के बावजूद 2014 में विधानसभा चुनाव में 65 फीसदी लोगों ने अपने मताधिकार का इस्तेमाल किया था जो पिछले 25 साल में सर्वोच्च था.

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