लखनऊ में खूनी कारोबार, बिकता है बच्चों का खून

By Pritesh Gupta | Last Updated: Sunday, August 9, 2015 - 19:19
लखनऊ में खूनी कारोबार, बिकता है बच्चों का खून

लखनऊः राजधानी लखनऊ में नाबालिग बच्चों के खून के कारोबार का सनसनीखेज मामला सामने आया है। डॉक्टरों की मदद से चल रहे इस गोरखधंधे में महज 500 रुपये देकर बच्चों को फुसलाया जाता है और उनका खून निकाल कर पांच हजार रुपये तक में बेचा जाता है। ज़ी संगम पर हुए सनसनीखेज खुलासे में दलालों और डॉक्टरों की सारी करतूत उजागर हो गई। खून लेने वाले ये हैवान बच्चों का फर्जी नाम-पता दर्ज कराते थे, ताकि किसी की पहचान ना हो सके। इसके अलावा खून निकालने के लिये जो स्टाफ है, वो भी अनट्रेंड है। ये दलाल रक्तदान के सभी चिकित्सकीय नियमों का जमकर मखौल बना रहे हैं। 

उल्लेखनीय है कि उतर प्रदेश में कुल 216 ब्लड बैंक हैं, जिनमें से 67 सरकारी और बाकी प्राइवेट हैं। सिर्फ लखनऊ में 27 ब्लड बैंक हैं जिनमें से पांच सरकारी हैं, जबकि 21 प्राइवेट और एक सेना का है। यूपी में ब्लड बैंक के जरिये कुल नौ लाख यूनिट ब्लड इकट्ठा होता है जो जरूरत का सिर्फ 70 फसदी है। बाकी 30 फीसदी खून की सप्लाई ऐसे ही गोरखधंधे से होती है। दरअसल, लखनऊ ही नहीं देश के कई हिस्सों में इससे पहले भी खून बेचने के मामले सामने आते रहे हैं।

दरअसल, कानून के मुताबिक रक्तदाता की उम्र 18 से 65 साल के बीच, उसका वजन 45 किलो से अधिक, खून में हीमोग्लोबिन का स्तर कम से कम 13 होना चाहिये। भारत में खून बेचना और रक्तदाता को पैसे देना गैरकानूनी है। आंकड़ों के मुताबिक भारत को हर साल 1 करोड़ 20 लाख यूनिट खून की जरूरत होती है, लेकिन महज 90 लाख यूनिट ही इकट्ठा हो पाता है। सन 1996 में सुप्रीम कोर्ट पैसे देकर खून देने वालों और बिना लाइसेंस के चलने वाले ब्लड बैंकों पर रोक लगा दी थी। 1996 में सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद 'रिप्लेसमेंट डोनर' की व्यवस्था बनी, जिसमें अस्पताल से खून लेने वाले शख्स को अपने परिवार या दोस्तों में किसी से खून दान करवाना होता है। यह प्रावधान लोगों को परोपकार की भावना से रक्तदान के प्रति प्रोत्साहित करने के लिये बनाया गया था। इसके अलावा कई तकनीकी पैमानों पर रक्त की शुद्धता और अनुकूलता की जांच की जाना जरूरी होता है। लेकिन खून का कारोबार करने वाले ये लोग कानून को अपनी जेब में रखते है।

ब्लड डोनेशन से हार्ट अटैक की आशंका कम हो जाती है, बोनमैरो नए रेड सेल्स बनाता है, शरीर को नए ब्लड सेल्स मिलने के अलावा तंदुरुस्ती भी मिलती है। ब्लड डोनेशन सुरक्षित और स्वस्थ परंपरा है। एक स्वस्थ शरीर दान किया गया खून 21 दिन में फिर से बना लेता है। ब्लड का वॉल्यूम तो शरीर में 24 से 72 घंटे में ही पूरा बन जाता है।  

इस सनसनीखेज कारनामे को लखनऊ के कोहली ब्लड बैंक में अंजाम दिया जा रहा था। शिकायत मिलने पर पुलिस और जिला प्रशासन की टीम ने पैथोलॉजी में छापेमारी की और तीन लोगों को हिरासत में लिया था। मामले की गंभीरता को देखते हुए सीएमओ लखनऊ ने दो टीमें बनाकर जांच के आदेश दे भी दिए थे। ये ब्लड बैंक पहले भी इस तरह के काले कारनामों के लिए बदनाम रहा है, लेकिन कोई सख्त कार्रवाई नहीं की गई। हालांकि अब FSDA कोहली ब्लड बैंक का लाइसेंस रद्द करने की तैयारी में है। 

ये खुलासा होने के बाद प्रशासन ने अन्य जगहों पर भी छापेमारी की। स्वास्थ्य विभाग ने शेखर हॉस्पिटल और इंद्रा डायग्नोसिस पर छापेमारी की। ड्रग इंस्पेक्टर ने दोनों हॉस्पिटल के ब्लड बैंक खंगालकर नमूने जांच के लिए भेजे हैं। राजधानी में सामने आए मामले के बाद अब उत्तर प्रदेश के अन्य शहरों में भी स्वास्थ्य विभाग की रेड होगी। इसी तरह चारों ओर फैले खूनी गिरोहों पर कार्रवाई संभव है।

खून के कारोबार के खुलासे के बाद इंडियन मेडिकल काउंसिल ने कड़ी प्रतिक्रिया दी है। IMA के सेक्रेटरी जनरल केके अग्रवाल ने कहा कि यूपी मेडिकल काउंसिल को इस मामले में कार्रवाई करनी चाहिए क्योंकि बच्चों का खून लेना गैरकानूनी है।

रिपोर्टः विवेक तिवारी, लखनऊ

ज़ी मीडिया ब्‍यूरो

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