वैज्ञानिकों ने कहा- प्लूटो को दोबारा मिले ग्रह का दर्जा, गलत तरीके से किया गया था अलग

इकारस नाम के जर्नल में प्रकाशित अध्ययन में अनुसंधानकर्ताओं ने कहा कि ग्रहों के वर्गीकरण के लिये यह मानक अनुसंधान साहित्य से मेल नहीं खाता.

वैज्ञानिकों ने कहा- प्लूटो को दोबारा मिले ग्रह का दर्जा, गलत तरीके से किया गया था अलग
खगोलविदों के वैश्विक समूह अंतराष्ट्रीय खगोलीय संघ (आईएयू) ने 2006 में ग्रह की एक परिभाषा स्थापित की.(फाइल फोटो)

वॉशिंगटन: वैज्ञानिकों का कहना है कि प्लूटो से गलत तरीके से ग्रह का दर्जा छीना गया है और कहा कि इसे फिर से ग्रह के तौर पर वर्गीकृत किया जाना चाहिए. खगोलविदों के वैश्विक समूह अंतराष्ट्रीय खगोलीय संघ (आईएयू) ने 2006 में ग्रह की एक परिभाषा स्थापित की जिसके तहत ग्रह को अपनी कक्षा को ‘‘स्पष्ट’’ करना जरूरी है. पड़ोसी ग्रह वरूण का गुरुत्व बल प्लूटो पर प्रभाव डालता है और प्लूटो कुइपर बेल्ट में अपनी कक्षा बर्फीली गैसों और पिंडों से साझा करता है. इसका मतलब यह निकाला गया कि प्लूटो ग्रह के दर्जे से बाहर है.

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इकारस नाम के जर्नल में प्रकाशित अध्ययन में अनुसंधानकर्ताओं ने कहा कि ग्रहों के वर्गीकरण के लिये यह मानक अनुसंधान साहित्य से मेल नहीं खाता. उन्होंने पिछले 200 साल के वैज्ञानिक साहित्य की समीक्षा की और पाया कि सिर्फ 1802 के एक प्रकाशन में ग्रह के वर्गीकरण के लिये स्पष्ट कक्षा की जरूरत का इस्तेमाल किया गया, और यह तब की अपुष्ट तार्किकता पर आधारित थी.

उपग्रह जैसे शनि के टाइटन और बृहस्पति के यूरोपा को गैलीलियो के वक्त से ही ग्रह विज्ञानियों द्वारा ग्रह कहा जाता था. अमेरिका में यूनिवर्सिटी ऑफ सेंट्रल फ्लोरिडा के ग्रह विज्ञानी फिलिप मेट्जगर ने कहा, ‘‘आईएयू परिभाषा कहती है कि ग्रह विज्ञान का मूल उद्देश्य, ग्रह, को उस परिकल्पना पर परिभाषित किया जाना था जिसे किसी ने अपने अनुसंधान में इस्तेमाल नहीं किया हो.’’ 

इनपुट भाषा से भी 

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