डियर जिंदगी: 200 अंक; यहां युवा कौन है!

जिंदगी को दुख, दुविधा की राई का पहाड़ मत बनाइए. न ही जीवन को मुश्किलों का पहाड़ सम‍झने की गलती कीजिए. 

Dayashankar Mishra दयाशंकर मिश्र | Updated: Mar 13, 2018, 07:32 PM IST
डियर जिंदगी: 200 अंक; यहां युवा कौन है!

'डियर जिंदगी' के सफर का यह 200 वां अंक है. आपसे मिले स्‍नेह के लिए मेरे पास कोई शब्‍द नहीं है. यह सफर हर दिन इतने सघन संवाद का पुल बनेगा, मैंने सोचा ही नहीं था. आलोचकों का विश्‍वास था कि इंटरनेट पर 'आत्‍महत्‍या और डिप्रेशन' पर वेब सीरीज के लिए यह सही समय नहीं है, क्‍योंकि पाठकों का ध्‍यान दूसरे विषयों पर कहीं अधिक है. हालांकि 'डियर जिंदगी' को इंटरनेट, सोशल मीडिया के साथ विभिन्‍न अखबारों में मिली जगह, स्‍नेह ने मुझे हर दिन कुछ ऐसा साझा करने का हौसला दिया, जिससे हमारी जिंदगी की नाव हर तरह की नकारात्‍मकता से पार होकर सुखद, प्रसन्‍न जीवन की नदी में सफर करती रहे. इस सीरीज के प्रति अभिरुचि यह बताती है कि हम जिसे दूर का खतरा समझते थे, असल में वह हमारे अपने एकदम नजदीक मौजूद है. 

रविवार की शाम गुड़गांव से 'डियर जिंदगी' की नियमित पाठक नयना दुबे का फोन आया. वह युवा हैं. सपने देखने वाली युवा. सपनों के लिए उड़ने के हौसले से भरी युवा. वह खुद को अपने निर्णय लेने, उस पर कायम रहने वाली शख्सियत के रूप में देखना पंसद करती हैं. लेकिन नयना ने जो कुछ कहा, वह युवा होने की निशानी तो है ही नहीं. वह अपने निर्णय नहीं ले पा रही हैं, क्‍योंकि उस निर्णय में जो उनके साथी हैं, वह अनिर्णय के शिकार हैं. वह रास्‍ता भटके हुए उस व्‍यक्‍ति की तरह हैं, जो हर बार रास्‍ता भटककर उसी मोड़ से मुड़ जाता है, जहां से वह कुछ देर पहले भटककर पहुंचा था. रास्‍तों में भटकना कोई बड़ी बात नहीं, उससे बड़ी हानि नहीं होती. सबसे खतरनाक है चुप्पी साधे बैठे रहना. निर्णय ना करना. 

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नयना से मैंने कहा, ' जिंदगी को दुख, दुविधा की राई का पहाड़ मत बनाइए. न ही जीवन को मुश्किलों का पहाड़ सम‍झने की गलती कीजिए. जिंदगी पहाड़ जैसी उबड़-खाबड़, खतरनाक नहीं है, हां घुमावदार है. 'घने-अनमने' जंगल हैं, लेकिन खूबसूरत पेड़ों से लदे. हां, खूंखार 'जानवर'  हैं, नकाबों में. लेकिन यह भी जीवन का हिस्‍सा है. जिंदगी कभी खतनाक चीजों से अलग नहीं हो सकती. जोखिम यात्रा का अनिवार्य पहलू है, इसलिए जोखिम से डरिए नहीं. अगर किसी से डरना है तो वह है, चुपचाप बैठे रहना और जोखिम से 'टाटा-टाटा' करते रहना. जो हो रहा है, उसे स्‍वीकार करना.   

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याद रखिए, जो जिंदगी के घुमावदार मोड़ पर अनिर्णय के साथ रहते हैं, उनको जिंदगी से कुछ नहीं मिलता. बल्कि यूं समझिए कि वह जिंदगी से कुछ मांग ही नहीं पाते. किसी से भी आप तब तक कुछ हासिल नहीं कर सकते, जब तक चाहत साफ न हो. जीवन की यात्रा में अनिर्णय और अस्‍पष्‍टता सबसे बड़े 'स्‍पीड ब्रेकर' हैं. इसलिए, युवा वह नहीं जो डरकर बैठ जाए. सफर पर निकले ही नहीं. उससे कहीं बेहतर वह है, जो निकले लेकिन भटके! क्‍योंकि जो निकलेगा, वह पहुंचेगा जरूर. भले ही समय लगे. संकट के बादल घिरें. इसलिए, जरूरी है कि हम सफर पर निकलें.

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उम्र से कोई युवा नहीं होता. युवा होने के लिए उम्र पर्याप्‍त, सही पैमाना है ही नहीं. एकदम नहीं. युवा की परिभाषा कुछ और है. मेरी नजर में युवा वह है, जिसमें नए के लिए चाहत है, आग है. तपन सहने की शक्‍ति, जोखिम उठाने का हौसला और निर्णय लेने की क्षमता है. युवा होने को उम्र से जोड़ना बस एक खूबसूरत झूठ है. इससे सतर्क रहिए.

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(लेखक ज़ी न्यूज़ में डिजिटल एडिटर हैं)

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