डियर जिंदगी: सब 'मन' का होता है कभी!

विरोध से अक्‍सर सबको डर लगता है, लेकिन फिल्‍मों से लेकर असल जिंदगी तक नायक बिना विरोध के हमेशा महत्‍वहीन होता है. 

डियर जिंदगी: सब 'मन' का होता है कभी!

वह बेहद प्रतिभाशाली हैं. हमेशा से टॉपर भी. उनकी बाकी बातों का और खुद उनका विरोध, आलोचना तो हो सकती है, लेकिन उनकी प्रतिभा को लेकर शायद ही किसी को संदेह हो. उनके पास विचारों का अनूठा भंडार है. एकदम स्‍पष्‍ट. बिना किसी राग-लपेट के वह अपनी बात कह सकते हैं, लेकिन पेशे से इंजीनियर करुण दुबे कहीं टिक कर काम नहीं करते. वह इन्फोसिस से लेकर टीसीएस और आईबीएम में रह चुके हैं. उनकी प्रतिभा के मुरीद हर जगह मिल जाएंगे, लेकिन वह कभी कहीं टिक नहीं पाते. इसलिए उनकी मंजिलें हमेशा रास्‍ता बनकर रह जाती हैं. करुण के एक दोस्‍त ने उनके बारे में मुझे बताया, मिलवाया और इस किस्‍से का उपयोग दूसरों के लिए करने की इजाजत दी, उसके बाद ही हम इस पर बात कर रहे हैं. करुण ने आईआईटी रुड़की से डिग्री ली है. वह अच्‍छे लेखक, गीतकार भी हैं.

लेकिन वह कहीं एक जगह मन लगाकर काम नहीं कर पाते. उनका कहना है कि उनके भीतर विरोध सहने की क्षमता की कमी के कारण ऐसा हो रहा है. आइए, हम इस बात की जांच पर संवाद करें कि विरोध सहने की क्षमता कितनी जरूरी चीज़ है.

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विरोध से अक्‍सर सबको डर लगता है, लेकिन फिल्‍मों से लेकर असल जिंदगी तक नायक बिना विरोध के हमेशा महत्‍वहीन होता है. क्‍या आप किसी ऐसी फिल्‍म को याद करते हैं, जिसमें नायक का विरोध न हो. जहां सबकुछ सीधी रेखा में चलता रहे, ऐसा जीवन जो एक पंक्ति में बयां किया जा सके, उसमें सबकुछ होता है, सिवाए साहस वाले सौंदर्य के! यह साहस आता कहां से है. इसके पीछे की सबसे बड़ी शक्‍ति‍ क्‍या है!

इसके पीछे केवल और केवल विरोध होता है. जो विरोध के प्रति जितनी अधिक सहनशीलता दिखाता है, वह उतना ही बड़ा नायक है. इसे आसानी से ऐसे भी समझा जा सकता है कि जो जितना बड़ा होता है, उसका विरोध भी उतना ही बड़ा होता है. किसी के कद को ऐसे भी समझा जा सकता है कि उसके विरोधी कितने हैं. ऐसे व्‍यक्‍ति की प्रतिभा पर हमेशा संदेह करना चाहिए, जिसका कोई विरोधी न हो, क्‍योंकि इसका अर्थ है कि उसने कभी अपनी राह पर चलने का हौंसला ही नहीं दिखाया. उसने कभी अपनी लकीर खींचने की कोशिश ही नहीं की.

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अब आप ही सोचिए कि ऐसे लोग जो एक छोटे से ऑफिस में विरोध का सामना नहीं कर सकते, उससे घबराकर हर बार अपनी राह बदल लेते हैं, वह जीवन में बड़ा साहस कैसे जुटा पाएंगे. भले ही वह कितने ही प्रतिभाशाली क्‍यों न हों.

करुण के बारे में भी यही बातें लागू हो होती हैं. वह विरोध से डरकर पलायन का मार्ग चुन लेते हैं, क्‍योंकि उन्‍हें लगता है कि यहां नहीं तो कहीं न कहीं ऐसी जगह तो होगी कि जहां सबकुछ उनके मन मुताबिक होगा. जबकि ऐसी कोई जगह अब तक बनी ही नहीं, जहां सबकुछ मन के अनुसार हो.

असल में असुविधा जीवन का मूल चरित्र है. सुविधा नहीं. मनुष्‍य की अब तक की यात्रा से हम समझ सकते हैं कि हम जटिल से सरल की यात्रा पर हैं. ठहरे हुए लोग नहीं, हम यात्री हैं. हर दिन नई असुविधा की ओर. ऐसे में विरोधरहित जीवन की आशा, हमेशा सुविधा की चाह खुद मनुष्‍यता के विरोध की बात करने जैसा है.

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इसलिए विरोध सहने की क्षमता और उसका यथासंभव विकास सबसे अधिक उनके काम का है, जो सपनों के पीछे दौड़ने और उन तक पहुंचने की हसरत रखते हैं. विरोध और विरोधियों का बढ़ना असल में कुछ और नहीं बस यह बताता है कि आप अपने लक्ष्‍य से बहुत दूर नहीं हैं.

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(लेखक ज़ी न्यूज़ में डिजिटल एडिटर हैं)

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