डियर जिंदगी: मेरी अनुमति के बिना आप मुझे दुखी नहीं कर सकते!

आत्‍महत्‍या पर काम करने वाले विशेषज्ञ मानते हैं कि यह असल में एक ऐसी कुंठा का पाला पोसा विचार है, जो सबसे पहले मन की गहराई में जन्‍म लेता है. उसके बाद जैसे ही उसे बाहर से 'आहार' मिलता है, वह विचार बड़ा और घातक हो जाता है.

डियर जिंदगी: मेरी अनुमति के बिना आप मुझे दुखी नहीं कर सकते!

आप दुनिया के सर्वोत्‍त्‍म फल हो सकते हैं, लेकिन उसके बाद भी कुछ लोग तो ऐसे होंगे ही जिन्‍हें ऐसे फलों से प्रेम न हो. वह फल का स्‍वाद लिए बिना ही उसकी आलोचना, नफरत में जिंदगी गुजार सकते हैं. दूसरी ओर जो भले ही सबसे बेहतर हैं, ऐसे कुछ लोगों के कारण उनका भी मिजाज खट्टा हो सकता है. उनका 'मूड' भी खराब हो सकता है. इसलिए हमें अपने भीतर इस भाव को बहुत गहरा करने की जरूरत है, 'मेरी अनुमति के बिना आप मुझे दुखी नहीं कर सकते.'

हमारा मीडिया असल में ऐसी खबरों से भरा है, जिसमें किसी के दुख का कारण किसी और से अधिक वह खुद है. ऐसी घटनाओं में आप दूसरों की तरक्‍की, मित्रों के आगे बढ़ने से उपजी ईर्ष्‍या, बच्‍चों की दूसरे बच्‍चों से तुलना और दूसरे की 'चीजों की चाह' में तनाव और आत्‍महत्‍या तक को रख सकते हैं. आत्‍महत्‍या पर काम करने वाले विशेषज्ञ मानते हैं कि यह असल में एक ऐसी कुंठा का पाला पोसा विचार है, जो सबसे पहले मन की गहराई में जन्‍म लेता है. उसके बाद जैसे ही उसे बाहर से 'आहार' मिलता है, वह विचार बड़ा और घातक हो जाता है. कुछ ही मामलों में आत्‍महत्‍या का कारण क्षणिक पाया जा रहा है. उसकी जड़ में भी उस व्‍यक्‍ति की खुद की अति भावुकता, अति संवेदनशीलता और चीजों को बर्दाश्‍त करने की क्षमता का कमजोर होना होता है.

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यही कारण है कि ओलिंपिक में हमारे जैसे बड़े, विशाल देश की तुलना में छोटे-छोटे देश अच्‍छा प्रदर्शन करते हैं. क्‍योंकि जितने जरूरी संसाधन होते हैं, उतना ही जरूरी तो मन का संकल्‍प भी होता है. उतना ही जरूरी तब खुद को संभाले रखना होता है, जब दुनिया आपसे न केवल नजरें चुराए, बल्कि आपके हर कदम पर आपको ताना भी मारती रहे. हम एक नागरिक के रूप में मोटे तौर पर अतिभावुक और बात-बात पर तुनक जाने वाले लोग हैं. हर छोटी-छोटी बात पर हमारी भावनाएं आहत हो जाती हैं. इससे नुकसान किसका होता है! खुद हमारा और हमसे प्रेम करने वालों का. उनसे जिनसे हम टूटकर स्‍नेह करते हैं. जिनके लिए सपने बुनते हैं. सबसे अधिक नुकसान उनका होता है. इसलिए जिंदगी को 'प्रिय' बनाने की दिशा में इस कदम को जरूर आजमाइए. किसी बात पर नाराज, दुखी होने से पहले यह जरूर सोचिए कि कहीं ऐसा तो नहीं कि आप दूसरों के गुस्‍से, कमजोर मनोबल, कुंठा की सजा खुद को दे रहे हैं. दूसरे से नाराज होने का जितना नुकसान खुद आपको होता है, उतना तो उसे भी नहीं होता, जिससे आप नाराज होते हैं.

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गीतकार बॉब मार्ले ने कितनी खूबसूरत बात कही है, 'सच तो यही है कि हर कोई आपको आहत करेगा. आप तो बस जाइए और पता लगाइए कि ऐसा कौन है, जिसके कारण कष्‍ट भुगतना सार्थक रहेगा.' मार्ले की बात को गहराई से जीवन में उतारें तो चीजें साफ हो जाएंगी. आप जहां तक देख पा रहे हैं, उससे कहीं आगे तक देख पाएंगे. हर बात से दुखी होना, ऐसी चीजों से नाराज हो जाना जो आपके नियंत्रण से परे हैं. दूसरों की मूर्खता के लिए खुद को क्रूर सजा देने जैसा है.

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आपने यह भी गौर किया होगा कि लोग अक्‍सर शिकायत करते हैं कि उसकी बात ने पूरा दिन खराब कर दिया. यह क्‍या है! कैसे किसी को हम इतनी अनुमति दे सकते हैं कि वह हमारे शांत, सौम्‍य दिन में एक छलांग कर उसमें उफान पैदा कर दे. यह उफान हमारी पूरी चेतना को प्रभावित करता है. जीवन के धैर्य और सुख को खोखला कर देता है. इसलिए हमें आंतरिक शांति और संतुलन की दिशा में सबसे अधिक काम करने की जरूरत है. यह कला आपको सिखाएगी कि जिंदगी में दूसरों के साथ रहते हुए भी कैसे उनसे अप्रभावित हुए बिना रहा जा सकता है.

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(लेखक ज़ी न्यूज़ में डिजिटल एडिटर हैं)

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