डियर जिंदगी : अनूठी 'उधारी' और मदद का बूमरैंग...

हमारी मदद अक्‍सर लौटाने वाले की हैसियत देखती है. जिनकी 'रिटर्न' वैल्‍यू कम है, उन्‍हें पैसे देना हमारे यहां सामान्‍य नहीं है. हम वंचितों के लिए कभी उदार रहे भी नहीं हैं. 

डियर जिंदगी : अनूठी 'उधारी' और मदद का बूमरैंग...

जिन लोगों ने दूरदर्शन पर 'मोगली' का 'जंगल बुक' देखा होगा, वह आसानी से समझ सकते हैं कि बूमरैंग कैसे काम करता है. मोगली के पास एक ऐसा खिलौना था, जिसे हवा में फेंकने पर वह घूमकर वापस उसके ही पास आ जाता था. ऐसा कहा जाता है कि बूमरैंग की खोज ऑस्ट्रेलिया के आदिवासियों ने की थी. माना जाता है कि आदिवासी इसका उपयोग मनोरंजन, शिकार और युद्ध में करते थे.

आज बूमरैंग की अचानक याद इसलिए आई, क्‍योंकि एक-दूसरे की मदद, मनुष्‍यता की एक ऐसी कहानी सामने आई, जिसके लिए बूमरैंग मुझे एकदम सही उदाहरण लगा. संयोग से हम यहां जिस मनुष्‍य, मनुष्‍यता की बात कर रहे हैं, उसका इतिहास भी हजारों बरस पुराना है. ऐसा कहा जाता है कि सबसे पुराना बूमरैंग पोलैंड के कारपेथियन पहाड़ से मिला है, जो लगभग 20,000 हजार साल पुराना माना गया है. 

अब मूल कहानी की ओर लौटते हैं...
दिल्‍ली-एनसीआर के इंदिरापुरम में युवा दंपति रोहित और रिंकी रहते हैं. दोनों कुशल डांसर हैं. बाकायदा प्रशिक्षित. यह दंपति एक कॉलोनी में लगभग 10 बरस से रह रहे हैं. जाहिर है, सब उनसे परिचित होंगे. हालांकि कॉलोनी थोड़ी बड़ी है, लेकिन डांस सीखने की इकलौती प्रसिद्ध एकेडमी इनकी होने से इनका चेहरा जाना-पहचाना है. 

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कोई बरस भर पहले की बात है. एक दिन, किसी अन्य दिन की तरह ही रोहित का दरवाजा सफाई कर्मचारी ने खटखटाया. उस दिन भी टोकरी बाहर रख दी गई, लेकिन बात कुछ और थी. कचरा उठाने आए सज्‍जन ने रोहित से बेहद संकोच से कहा कि उसे कुछ आर्थिक मदद चाहिए. जिस जगह आप रहते हो, वहां इस तरह की मदद की कामना कोई नई बात नहीं होती, लेकिन सवाल अक्‍सर यह होता है कि मदद किसे और क्‍यों! कितने लोग हैं, जो किसी सफाई कर्मचारी को 7 हजार की उधारी देने से न हिचकें. ऐसे लोग हैं, लेकिन उनकी संख्‍या कम है. बहुत कम. 

हमारी मदद अक्‍सर लौटाने वाले की हैसियत देखती है. जिनकी 'रिटर्न' वैल्‍यू कम है, उन्‍हें पैसे देना हमारे यहां सामान्‍य नहीं है. हम वंचितों के लिए कभी उदार रहे भी नहीं हैं. हमारी सोसायटी का एक किस्‍सा सुनते चलिए. कुछ समय पहले जब सफाई कर्मचारियों ने कचरा उठाने के लिए हर घर से 50 की जगह 60 रुपए लेना शुरू कर दिया, तो कॉलोनी में कई परिवारों को यह गैर वाजिब लगा, जहां दस रुपये बढ़ाने पर लोग नाराजगी का इज़हार करने लगे.

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ऐसे में एक आदमी कचरा उठाने वाले को 7 हजार देने का हौसला रखता है, तो यह तारीफ से कहीं आगे की बात है.. क्‍योंकि कचरा उठाने वालों के लिए हम घर का दरवाजा तो खोलते हैं, लेकिन उसे भीतर नहीं बुलाते. अपनी मदद करने वाले किसी दूसरे मददगार से हम इस तरह पेश नहीं आते. बाकी सबके लिए तो हमारे घर के भीतर थोड़ी बहुत जगह है, लेकिन कचरा उठाने वाले, स्‍वीपर, सफाई कर्मचारी के लिए हमारे मन के द्वार खुले नहीं है. जो घर की शुद्धि करने वाला है, उससे ही घर के अपवित्र होने का खतरा है.

रोहित और रिंकी कचरे वाले को उधार दे देते हैं. वह उन्‍हें किश्‍तों में पैसे लौटाने लगता है. इस बीच इस दंपति के मन में विचार आता है कि उन्‍हें अब घर के बारे में सोचना चाहिए. वह बैंक जाते हैं. जहां, लोन तो संभव है, लेकिन बैंक मार्जिन मनी चाहता है. सरल भाषा में मार्जिन मनी वह न्‍यूनतम रकम है, जो आपके पास होनी ही चाहिए. इसे इस तरह समझिए कि अगर सौ रुपये का लोन चाहिए तो आपके पास कम से कम 15 रुपये तो होने ही चाहिए. अब यह रकम कैसे मिले. इस बीच दंपति को उनकी ही कॉलोनी में रहने वाले मित्र सलाह देते हैं कि क्‍यों न वह उनके यहां सीखने आने वाले बच्‍चों के माता-पिता से बात करें. बात जरा मुश्किल थी, क्‍योंकि रकम 10 लाख से अधिक थी. थोड़ी हिचक के बाद उन्होंने बात शुरू कर दी. समय लगा लेकिन रकम का इंतजाम हो गया.

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इसी बुधवार को रोहित-रिंकी को अपना घर मिल गया. संयोग देखिए कि जब वह रजिस्‍ट्री कराने गए थे, उसी दौरान वह सफाई कर्मचारी अपनी उधारी की अंतिम किस्त अदा कर गया. इस पूरे किस्‍से को आप अलग-अलग दृष्टिकोण से समझें, लेकिन मेरे लिए यह जीवन में एक-दूसरे के प्रति सहयोग, सद्भावना की सबसे प्रेरणादायक कहानियों में से एक है. जो बताती है कि प्रेम, आत्‍मीयता और एक दूजे को आगे बढ़ाने की भावना असल में अपने लिए वैसी दुनिया की तैयारी है, जो हम अपने लिए चाहते हैं. इसलिए अगली बार जब किसी की सहायता से इंकार कर रहे हों, तो उसकी हैसियत से अधिक यह देखें कि आपकी मदद उसकी जिंदगी में कितना असर डाल सकती है.

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(लेखक ज़ी न्यूज़ में डिजिटल एडिटर हैं)

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