डियर जिंदगी : थोड़ा रुकते हैं, फि‍र मिलेंगे 'चलते-चलते'

अब समय है, थोड़े विराम का. 28 अप्रैल से शुरू हुए 'डियर जिंदगी' के सफर का यह 108वां और पहले चरण का अंतिम अंक है. अब समय है अध्‍ययन, चिंतन और यात्रा का. उसके बाद जल्‍द दूसरी पारी की तैयारी होगी.

दयाशंकर मिश्र | Updated: Sep 28, 2017, 05:00 PM IST
डियर जिंदगी : थोड़ा रुकते हैं, फि‍र मिलेंगे 'चलते-चलते'

'डियर जिंदगी' मेरे लिए जीवनयात्रा के सबसे खास पड़ाव में से एक है. मध्‍यप्रदेश के छोटे से गांव से लेकर 'स्‍वप्‍न शहर' दिल्‍ली तक की यात्रा सुखद, सरल, सहज अनुभव से सराबोर रही है. 'डियर जिंदगी' मेरे लिए एक माध्‍यम रहा, जहां जिंदगी और उसके 'मन' पर पड़ रही तनाव की छाया से निकलने के जतन की विनम्र कोशिश की गई.

अब समय है, थोड़े विराम का. 28 अप्रैल से शुरू हुए 'डियर जिंदगी' के सफर का यह 108वां और पहले चरण का अंतिम अंक है. अब समय है अध्‍ययन, चिंतन और यात्रा का. उसके बाद जल्‍द दूसरी पारी की तैयारी होगी. 'डियर जिंदगी' के सफर की सबसे खास बात, इसका हर दिन लिखा जाना रहा. हर दिन. जीवन के अलग-अलग विषय पर आपसे संवाद का जो अनुभव मिला, वह मेरी इस जीवनयात्रा के पुनर्जीवन जैसा है. इतने सारे लोगों से संवाद हुआ, मिलना हुआ, अध्‍ययन हुआ, जो मैंने भी सोचा नहीं था. अब मुझे लगता है कि आत्‍महत्‍या, तनाव के विरुद्ध 'जीवन -संवाद' एक विचार के रूप में लोगों के भीतर थोड़ी बहुत जगह तो बना चुका है. अब यह विमर्श लोगों के बीच अधिक से अधिक जाए इसकी कोशिश जारी है.

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दिल्‍ली-एनसीआर में सुधी, सजग नागरिकों ने 'जीवन -संवाद' नाम से एक साप्‍ताहिक संवाद का आरंभ किया है. इसमें अभिभावक, शिक्षक, बच्‍चे शामिल हैं. यह जीवन बचाने की छोटी लेकिन सरोकारी पहल है. इसमें सभी अपने अनुभव, अध्‍ययन के आधार पर तनाव से बचने के सूत्र साझा करते हैं. आपमें से कोई भी इसका हिस्‍सा बन सकता है. मैं सभी पाठकों का आभार भी प्रकट करना चाहता हूं, जिन्‍होंने इस संवाद के लिए अपने अनुभव सरलता से साझा किए. हमने देर तक बात की. मैंने अक्‍सर इस संवाद को लेखन का आधार बनाया. मैं दिल्‍ली, ग्‍वालियर, भोपाल, इंदौर, रांची, रायपुर, जयपुर, जोधपुर, उदयपुर से लेकर जम्‍मू, दिल्‍ली, लखनऊ तक फैले अपने सभी पाठकों का आभार व्‍यक्‍त करना चाहता हूं, जिन्‍होंने 'डियर- जिंदगी' के सफर को अपना हमसफर बनाया.

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आत्‍महत्‍या और तनाव के विरुद्ध जीवन संवाद के लिए हैशटैग #Dearजिंदगी पर आएं. जीवन में स्‍नेह, प्रेम और संवाद का निवेश करें. मेरी कोशिश होगी कि हर दिन कम से कम एक बार हम जीवन पर यहां संवाद जरूर करें.

चलते-चलते इस बार बस इतना कि जिंदगी सबसे कीमती है. कोई ऐसी हार, गलती नहीं, जो जिंदगी के हौसले को तोड़ सके. आप केवल खुद से हार सकते हैं, किसी दूसरे में आपको हराने का हुनर नहीं. 'आत्‍महत्‍या और तनाव' के संकेत पकड़ना मुश्किल है, असंभव नहीं. सजग, सुचिंतित समाज ऐसा कर सकता है.

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(लेखक ज़ी न्यूज़ में डिजिटल एडिटर हैं)

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