ब्लॉगः सुप्रीम कोर्ट में कठुआ रेप मामला, न्याय बना सियासी फुटबॉल

कठुआ गैंगरेप मामले की जांच में विवाद के दौर में यह सुनिश्चित करना जरूरी है कि पुलिस और केन्द्रीय सुरक्षाबलों के बीच बढ़ रही अविश्वास की खाई का लाभ आने वाले समय में कहीं आतंकी संगठनों को न मिले?

ब्लॉगः सुप्रीम कोर्ट में कठुआ रेप मामला, न्याय बना सियासी फुटबॉल

कठुआ में दुष्कर्म की शिकार बच्ची के पिता द्वारा मामले की सुनवाई जम्मू-कश्मीर के बाहर चंडीगढ़ में कराने और वकीलों को सुरक्षा देने के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने नोटिस जारी कर दिया है. सामूहिक दुष्कर्म के बाद हत्या के इस मामले में लोगों में क्षोभ है और सख्त कानून बनाने की मांग हो रही है. परन्तु कानून क्या करेगा जब पूरी कानूनी प्रक्रिया ही संदेह के दायरे में आ रही है. जांच करने वाली पुलिस-सीबीआई, कानून को लागू करने वाले वकील-अदालत और कानून बनाने वाली सरकार का संदेह के दायरे में आना क्या प्रशासनिक और न्यायिक सिस्टम के फेल होने का सिग्नल है?

राज्य सरकार में 'सांप्रदायिक' राजनीति
दुष्कर्म के आरोपियों के समर्थन में हुई रैली में शामिल भाजपा के दोनों मंत्रियों के त्यागपत्र को मुख्यमंत्री की मंजूरी के बाद इस मामले में सांप्रदायिक ध्रुवीकरण के साथ राजनीतिक संकट भी बढ़ गया है. भाजपा के साथ गठबंधन सरकार की मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती ने बच्ची के साथ बलात्कार एवं हत्या मामले में सांप्रदायिक ताकतों को खारिज करने के लिए जम्मू के लोगों की सराहना की है. रेप मामले की जांच में विवाद के दौर में यह सुनिश्चित करना जरूरी है कि पुलिस और केन्द्रीय सुरक्षाबलों के बीच बढ़ रही अविश्वास की खाई का लाभ आने वाले समय में कहीं आतंकी संगठनों को न मिले?

आरोपियों का पुलिस पर भरोसा नहीं
बच्ची के साथ रेप मामले में अनेक निर्दोष लोगों को फंसाने के आरोप हैं और आरोपी पक्ष द्वारा मामले की सीबीआई जांच की मांग हो रही है. कठुआ कांड के मुख्य आरोपी सांझीराम की बेटी भी सीबीआई से मामले की जांच कराने के लिए भूख हड़ताल पर बैठी हुई है. उनके अनुसार सीबीआई जांच में दोषी पाए जाने पर सभी आरोपियों को फांसी दे दी जानी चाहिए. आरोपियों के परिवारजनों के अनुसार मीडिया ट्रायल की वजह से पूरे मामले के सभी पक्षों की सही जांच नहीं हो रही. आरोपियों ने सभी लोगों के नार्को टेस्ट की मांग की है, जिससे सही सच सामने आ सके. दूसरी ओर जम्मू-कश्मीर के डीजीपी शेष पॉल ने कहा कि पुलिस की जांच पूर्णतः निष्पक्ष है और इस मामले में सीबीआई जांच की कोई जरूरत नहीं है. सवाल यह है कि क्या उन्नाव की तर्ज़ पर इस मामले की भी सीबीआई जांच होगी?

सीबीआई जांच से क्या हासिल होगा?
उन्नाव रेप मामले में राज्य की पुलिस प्रभावी रूप से कारवाई करने में विफल रही, जिसके बाद मीडिया में मामले के उछलने से सरकार सीबीआई जांच के लिए मजबूर हुई. कठुआ गैंगरेप केस में आठ आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट जम्मू-कश्मीर पुलिस की क्राइम ब्रान्च द्वारा फाइल करने के बाद जिला अदालत में सुनवाई शुरू होने के बाद मामले में अगली तारीख 28 अप्रैल को लगी है. गौरतलब है कि पुलिस की जांच राज्य सरकार के अधीन है और सीबीआई केन्द्र सरकार के तहत काम करती है. कठुआ मामले में पुलिस द्वारा चार्जशीट दायर करने के बाद अदालत में ट्रायल शुरू होने के बाद बगैर सुप्रीम कोर्ट के आदेश के अब सीबीआई जांच कैसे हो सकती है? राजनीतिक या सांप्रदायिक चश्मे से मामलों के समाधान का ट्रेन्ड यदि इसी तरह से बढ़ता रहा तो जांच एजेंसियों की बची-खुची विश्वसनीयता भी कहीं ख़त्म न हो जाए!

वकील भी अब राजनीति के दायरे में
संविधान के अनुसार हर आरोपी को अदालत में वकील के मार्फत पैरवी करने का अधिकार है. कठुआ मामले में बच्ची के परिजनों की वकील दीपिका राजावत ने दुष्कर्म और हत्या की धमकी मिलने का आरोप लगाते हुए सुप्रीम कोर्ट से सुरक्षा की गुहार लगाई है. रेप से जुड़े आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट फाइल करने पर स्थानीय वकीलों द्वारा पुलिस को रोकने के मामले की जांच के लिए बार-काउंसिल द्वारा नियुक्त पांच सदस्यीय समिति अपनी रिपोर्ट सुप्रीम कोर्ट को जल्द सौंपेगी. रेप मामले में सांप्रदायिक ध्रुवीकरण होने के बाद महबूबा सरकार ने अदालत में पैरवी के लिए सिख समुदाय के दो विशेष अभियोजक वकील नियुक्त किए हैं. सवाल यह है कि धार्मिक ध्रुवीकरण के बढ़ रहे ऐसे मामलों में कानून निष्पक्ष तरीके से कैसे लागू हो जहां दोषियों को कठोर दण्ड के साथ न्यायिक प्रक्रिया भी दुरुस्त दिखे!

अदालत पर भरोसा नहीं तो फिर पूरा सिस्टम ही फेल
मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती ने हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश को पत्र लिखकर फास्ट ट्रैक कोर्ट के गठन के साथ मामले की सुनवाई 90 दिन में ख़त्म करने की मांग की है. दूसरी ओर जिला अदालत में मामले की सुनवाई पर रोक लगाने के साथ केस को चंडीगढ़ ट्रान्सफर करने के लिए सुप्रीम कोर्ट से मांग हो रही है. सवाल यह है कि पुलिस द्वारा चार्जशीट दायर करने के बाद अदालत में ट्रायल शुरू हो गया है, तो फिर इस मामले की सीबीआई जांच कैसे हो सकती है?

(लेखक सुप्रीम कोर्ट अधिवक्ता और संवैधानिक मामलों के विशेषज्ञ हैं)
(डिस्क्लेमर : इस आलेख में व्यक्त किए गए विचार लेखक के निजी विचार हैं)

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