क्या टीम इंडिया में भी 'जो फिट है वही हिट है?'

भारतीय कप्तान विराट कोहली स्वयं अपना उदाहरण प्रस्तुत कर के टीम में फिटनेस के प्रति एक अलख जलाए हुए हैं. खिलाड़ियों को भी मालुम पड़ गया है कि बगैर सौ प्रतिशत फिटनेस के भारतीय टीम में प्रवेश पाना अब असंभव है.

क्या टीम इंडिया में भी 'जो फिट है वही हिट है?'

आजकल फिटनेस चैलेंज की बातें हवा में तैर रही हैं. विराट कोहली ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को फिटनेस चैजेंज दिया और खेल मंत्री राज्यवर्धन सिंह राठौड़ ने तो टीवी कैमरा के सामने ही दंड पेल कर नारा दे दिया कि जो फिट है, वही हिट है. भारतीय क्रिकेट में विराट कोहली के नेतृत्व संभालने के बाद फिटनेस की ये बयार ज्यादा तेजी से चली है. इसी कारण आज क्षेत्ररक्षण की तीव्रता के मामले में भारत विश्व स्तर पर एकदम आगे निकल गया है. 5 वर्ष पहले तक फील्डिंग भारत की सबसे बड़ी कमजोरी मानी जाती थी. पर अब परिस्थितियां बदल गई हैं. खिलाड़ी जागरूक हो गए हैं. शारीरिक स्वास्थ्य के प्रति दृष्टिकोण में बड़ा परिवर्तन आ गया है. भारतीय कप्तान विराट कोहली स्वयं अपना उदाहरण प्रस्तुत कर के टीम में फिटनेस के प्रति एक अलख जलाए हुए हैं. खिलाड़ियों को भी मालुम पड़ गया है कि बगैर सौ प्रतिशत फिटनेस के भारतीय टीम में प्रवेश पाना अब असंभव है.

फिटनेस की बात फिजा में फिर जोर इसलिए पकड़ रही है कि आईपीएल में बेहतरीन प्रदर्शन कर के प्रभावित करने वाले संजू सैमसन फिटनेस में कमी के कारण भारतीय टीम से हटा दिए गए. आजकल भारतीय क्रिकेट के कए 'यो-यो टेस्ट' होने लगा है. इस तरह का परीक्षण एथलीटों में तो होता था. फिर हॉकी में इसे स्थान मिला. क्रिकेट ऑस्ट्रेलिया ने सबसे पहले क्रिकेट में अपने यहां इसे लागू किया. तमाम ऑस्ट्रेलियाई प्रशिक्षक भी इस विधि से प्रभावित हुए. उनके प्रशिक्षक जब अन्य देशों में प्रशिक्षण के लिए जाने लगे तब अपने साथ यो यो टेस्ट की विधि भी लागू करते गए. भारतीय क्रिकेट में भी फिटनेस माने का यह प्रमुख पैमाना बन गया.

आपने सुना होगा कि युवराज सिंह गत वर्ष यो यो टेस्ट पास नहीं कर पाए थे. सुरेश रैना अपने बढ़ते वजन के कारण आश्वस्त थे कि वह यो यो टेस्ट में नाकामयाब हो जाएंगे. इसलिए उन्होंने टेस्ट दिया भी नहीं था. अब उन्होंने वजन घटा लिया है और किसी भी परीक्षा के लिए तैयार हैं. हाल ही में संजू सैमसन और अंबाती रायडु के चयन व बाद में फिटनेस की कमी के कारण निष्कासन ने एक नई बहस को जन्म दे दिया है कि क्या क्रिकेट में प्रतिभा को कम व फिटनेस को ज्यादा नंबर दिए जाना चाहिए.

यो यो टेस्ट भारत में सिर्फ नेशनल क्रिकेट अकादमी बेंगलुरु में होता है. इसके लिए खिलाड़ियों को दो निश्चित बिंदुओं के बीच अलग अलग गति से दौड़ना होता है. एक सॉफ्टवेयर इस दौरान शरीर की गतिविधियों, हरकतों व अन्य पैरामीटर्स का रिकॉर्ड अंकित करता रहता है. फिर मार्क्स दिए जाते हैं. सही फिटनेस के लिए कम से कम 16.1 से 16.3 अंक जरूरी होते हैं. भारतीय टीम के सबसे फिट खिलाड़ी विराट कोहली हैं, जो अक्सर 21 का आंकड़ा प्राप्त कर लेते हैं. पहले युवराज सिंह 15-16 के बीच के अंक ही ले पा रहे थे. अब वह फिटनेस के करीब पहुंच गए हैं.

इधर, हरियाणा से दिल्ली आ कर खेलने वाले नवदीप सैनी के चयन ने जानकारों में उथल पुथल मचा दी है. जब सैनी हरियाणा छोड़कर दिल्ली की टीम में शामिल किए गए थे, तब बिशन सिंह बेदी ने कहा था कि इससे वर्षों से दिल्ली में संघर्ष कर आगे बढ़ने की कोशिश करने वाले युवा तेज गेंदबाज हतोत्साहित होंगे. लेकिन गौतम गंभीर का मत सैनी के पक्ष में था. अब जबकि सैनी का चयन टीम इंडिया में हुआ है तो गौतम गंभीर ने बिशन सिंह बेदी का उपहास उड़ाया है. इसे ठीक नहीं कहा जा सकता. क्योंकि बिश सिंह बेदी विश्व क्रिकेट की एक सम्मानित शख्सियत हैं. भारत को हमेशा उन पर गर्व रहा है. आप अपने ही एक पुराने खिलाड़ी का उपहास उड़ाएं यह शोभा नहीं देता. आपका मत उनके मत से अलग हो सकता है, पर उनके प्रति कटुता भरा वक्तव्य देना क्रिकेट खेल की संभ्रांतता के दायरे में नहीं आता है. आशा है, नए खिलाड़ी ऐसे गलत उदाहरण से शिक्षा नहीं लेंगे. आज के खिलाड़ी पुराने खिलाड़ियों के बनिस्बत पैसों की अच्छी फसल काट रहे हैं. पर इससे उन्हें अपने ही खेल की महान हस्तियों का अपमान करने का लाइसेंस नहीं मिल जाता. विवेक क्रिकेट खेल की विशेषता है. इसका इस्तेमाल जरूर होना चाहिए.

केवल यो यो टेस्ट के आधार पर टीम में शामिल किए जाने या निष्कासन के फैसले को कहा तक स्वीकार किया जा सकता है. आज तो भारतीय क्रिकेट में यही हो रहा है. मुझे याद है कि जब टीम इंडिया के लिए प्रशिक्षक नियुक्त होना था, तब मोहिंदर अमरनाथ भी इंटरव्यू देने के लिए गए थे. मोहिंदर अमरनाथ की क्रिकेटीय बुद्धिमानी व बहादुरी की गाथा सारी क्रिकेट की दुनिया जानती है. उनसे इंटरव्यू में पूछा गया 'क्या आप कंप्यूटर चलाना जानते हैं? स्पष्टवादी व साहसी मोहिंदर अमरनाथ ने जवाब दिया 'कंप्यूटर चलाना तो नहीं, पर हां क्रिकेट चलना जरूर जानता हूं.' भारतीय क्रिकेट के सूरमाओं को उनका जवाब रास नहीं आया. नाराज होकर उन्होंने मोहिंदर अमरनाथ को नहीं चुना. नुकसान किसका हुआ, भारतीय क्रिकेट का.

अगर पहले के जमाने में यो यो टेस्ट होता तो बिशन सिंह बेदी व चंद्रशेखर जैसे खिलाड़ी कभी टीम इंडिया में प्रवेश ही नहीं ले पाते. इसलिए मैं कहता हूं कि प्रतिभा व फिटनेस के अलग अलग अंक निर्धारित करने होंगे. कई स्वाभाविक प्रतिभाएं ऐसी होती है कि वे विश्व क्रिकेट के विरले ही साबित होते हैं. फिटनेस की हल्की कमी उनका रास्ता रोकेगी तो स्वाभाविक प्रतिभाएं विश्व क्रिकेट के परिदृश्य पर आगे आने से रुक जाएंगीं.

(लेखक प्रसिद्ध कमेंटेटर और पद्मश्री से सम्मानित हैं.)

(डिस्क्लेमर : इस आलेख में व्यक्त किए गए विचार लेखक के निजी विचार हैं)

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