त्वरित टिप्पणी : सुप्रीम कोर्ट के 4 जजों की प्रेस कॉन्फ्रेंस से न्यायपालिका में उठते 4 बड़े मसले

आज प्रेस कॉन्फ्रेंस करने वाले जज चेलमेश्वर और चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा की नियुक्ति एक दिन ही हुई थी. चेलमेश्वर चीफ जस्टिस भले ही नहीं बन पाएंगे पर वो चीफ जस्टिस को सुप्रीम मानने के लिए तैयार नहीं हैं, जिससे यह जजों का व्यक्तिगत विवाद भी बन गया है.

Virag Gupta विराग गुप्ता | Updated: Jan 12, 2018, 03:24 PM IST
त्वरित टिप्पणी : सुप्रीम कोर्ट के 4 जजों की प्रेस कॉन्फ्रेंस से न्यायपालिका में  उठते 4 बड़े मसले

सुप्रीम कोर्ट के चार जज जे चेलमेश्वर, रंजन गोगोई, मदन लोकुर और कुरियन जोसफ की प्रेस कॉन्फ्रेंस न्यायपालिका के इतिहास में अनूठी होने के साथ लोकतंत्र के लिए खतरे की घंटी भी है. चीफ जस्टिस के बाद चारों जज वरिष्ठतम होने के नाते कॉलेजियम के सदस्य हैं, जिसकी सिफारिश पर हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट में जजों की नियुक्ति होती है. आइए जानते हैं, इस विवाद की तह में क्या हैं 4 बड़े मसले-

जजों के भ्रष्टाचार के बढ़ते मामले- पिछले कई सालों से जजों पर भ्रष्टाचार के अनेक आरोप लग रहे हैं. अरुणाचल प्रदेश के दिवंगत मुख्यमंत्री कालिखो पुल ने अपने सुसाइड नोट में जजों के भ्रष्टाचार का विस्तार से जिक्र किया पर सरकार और सुप्रीम कोर्ट ने उसे ठंडे बस्ते में डाल दिया. कलकत्ता हाईकोर्ट के तत्कालीन जज सीएस कर्णन द्वारा न्यायपालिका में भ्रष्टाचार की शिकायतों पर कारवाई के बजाय उन्हें अवमानना के लिए जेल भेज दिया गया.
मेडिकल काउंसिल मामले में जजों के भ्रष्टाचार पर कारवाई के बजाय उस पर गैरपारदर्शी तरीके से बेंच का गठन करने से यह समस्या अब नासूर बन गई है.

चीफ जस्टिस की अन्य जजों पर सर्वोच्चता नहीं- चीफ जस्टिस की सर्वोच्चता के बावजूद संविधान के अनुसार सभी जजों का दर्जा बराबर है, जिसका पालन न होने पर कॉलेजियम के अन्य वरिष्ठ जजों को शिकायत है. दरअसल न्यायिक व्यवस्था उच्च परंपराओं पर आधारित है, और इन नियमों को लिपिबद्ध नहीं किया गया. आज प्रेस कॉन्फ्रेंस करने वाले जज चेलमेश्वर और चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा की नियुक्ति एक दिन ही हुई थी. चेलमेश्वर चीफ जस्टिस भले ही नहीं बन पाएंगे पर वो चीफ जस्टिस को सुप्रीम मानने के लिए तैयार नहीं हैं, जिससे यह जजों का व्यक्तिगत विवाद भी बन गया है.

जजों की नियुक्ति के लिए बनी कॉलेजियम व्यवस्था पर सवाल- कॉलेजियम व्यवस्था के तहत सुप्रीम कोर्ट के 5 वरिष्ठ जज देश के सभी हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट के अन्य जजों की नियुक्ति के लिए अनुशंसा करते हैं. कॉलेजियम की मनमानी व्यवस्था को खत्म करने के लिए संसद द्वारा पारित एनजेएसी कानून को सुप्रीम कोर्ट की संविधान पीठ ने रद्द कर दिया. उसके बाद एमओपी पर सरकार और सुप्रीम कोर्ट में अभी तक सहमति नहीं बन पाई, जिसका 4 जजों के पत्र में जिक्र भी है.

सुप्रीम कोर्ट में मुकदमों की मनमानी लिस्टिंग- सुप्रीम कोर्ट ने प्रकाश सिंह मामले में यह कहा था कि चीफ जस्टिस रोस्टर के मास्टर होते हैं. मेडिकल काउंसिल मामले में जस्टिस जे चेलमेश्वर द्वारा मामले की लिस्टिंग पर विवाद होने के बाद चीफ जस्टिस की सर्वोच्चता की फिर से पुष्टि कर दी गई. आज की प्रेस कॉन्फ्रेंस के बाद दिए गए पत्र से यह जाहिर है कि सुप्रीम कोर्ट में महत्वपूर्ण मामलों की लिस्टिंग मनमाने तरीके से हो रही है. चीफ जस्टिस रोस्टर के मास्टर यदि हैं तो लिस्टिंग के लिए स्थापित परंपराओं और नियमों के पालन की जवाबदेही भी तो उन्हीं की है.

(लेखक सुप्रीम कोर्ट के वकील और संवैधानिक मामलों के विशेषज्ञ हैं)