ज़ी स्पेशल

डियर जिंदगी : सपनों के ‘जले’ पंख और गुलामी की आदत

डियर जिंदगी : सपनों के ‘जले’ पंख और गुलामी की आदत

हमारा दिमाग शोषण, सरल भाषा में गुलामी को ऐसे स्‍वीकार कर लेता है कि उसकी जंजीरें आत्‍मा तक पर असर डालने लगती हैं, लेकिन दिमाग उससे मुक्‍त नहीं हो पाता.

दयाशंकर मिश्र | Dec 12, 2017, 04:09 PM IST
गुजरात चुनाव के बाद आगे क्या?

गुजरात चुनाव के बाद आगे क्या?

चाहे आईआईटी हों और चाहे आईआईएम या दूसरे सैकड़ों प्रौद्योगिकी संस्थान, क्या इन सबका एक ही काम नहीं है कि विश्वविद्यालयों में सृजित ज्ञान का औद्योगिक इस्तेमाल करने के तरीके ढूंढें.

सुविज्ञा जैन | Dec 12, 2017, 11:22 AM IST

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डियर जिंदगी : सपनों के ‘जले’ पंख और गुलामी की आदत

डियर जिंदगी : सपनों के ‘जले’ पंख और गुलामी की आदत

हमारा दिमाग शोषण, सरल भाषा में गुलामी को ऐसे स्‍वीकार कर लेता है कि उसकी जंजीरें आत्‍मा तक पर असर डालने लगती हैं, लेकिन दिमाग उससे मुक्‍त नहीं हो पाता.

दयाशंकर मिश्र | Dec 12, 2017, 04:09 PM IST
गुजरात चुनाव के बाद आगे क्या?

गुजरात चुनाव के बाद आगे क्या?

चाहे आईआईटी हों और चाहे आईआईएम या दूसरे सैकड़ों प्रौद्योगिकी संस्थान, क्या इन सबका एक ही काम नहीं है कि विश्वविद्यालयों में सृजित ज्ञान का औद्योगिक इस्तेमाल करने के तरीके ढूंढें.

सुविज्ञा जैन | Dec 12, 2017, 11:22 AM IST
मणिशंकर अय्यर का निलंबनः राजनीतिक लाभ या सांस्कृतिक बदलाव?

मणिशंकर अय्यर का निलंबनः राजनीतिक लाभ या सांस्कृतिक बदलाव?

कांग्रेस पार्टी के भावी अध्यक्ष राहुल गांधी के पिता और पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी ने मणिशंकर अय्यर को राजनीति में लाया था और अब उनके बेटे राहुल गांधी ने उन्हें निलंबन तक पहुंचा दिया.

सत्येंद्र सिंह | Dec 12, 2017, 12:27 AM IST
मासूमों के प्रति कोई इतना वहशी कैसे हो सकता है?

मासूमों के प्रति कोई इतना वहशी कैसे हो सकता है?

16 दिसंबर को पूरा देश निर्भया कांड की 5वीं बरसी मनाएगा. दिल्ली में निर्भया के साथ जो दरिंदगी हुई उससे पूरा देश हिल गया, निर्भया के दोषियों को फांसी की सज़ा भी हुई, लेकिन इन पांच सालों में बदला कुछ भी नहीं है. 

निदा रहमान | Dec 12, 2017, 12:11 AM IST
डियर जिंदगी : 'चलो बात करते हैं...'

डियर जिंदगी : 'चलो बात करते हैं...'

हम अक्‍सर बिना कारण जाने हल की तलाश में भटकते रहते हैं. जबकि बिना असल कारण के समाधान असंभव है. यह कुछ हद तक वैसे ही जैसे लोग आए दिन बात करते रहते हैं कि गुस्‍सा कैसे खत्‍म किया जाए. तनाव कैसे खत्‍म किया जाए. दुख से कैसे निपटा जाए.

दयाशंकर मिश्र | Dec 11, 2017, 07:30 PM IST
व्यापम घोटाले की व्यापकता और इसका सामाजिक व सांस्कृतिक दुष्प्रभाव

व्यापम घोटाले की व्यापकता और इसका सामाजिक व सांस्कृतिक दुष्प्रभाव

व्यापम घोटाले में राजनीति से जुड़े लोगों के नाम हैं, तो नौकरशाही से जुड़े नाम भी. नौकरशाहों के सहयोग के बिना तो यह संभव था ही नहीं. जाहिर है कि व्यावसायिक वर्ग पीछे क्यों रहता. इन सभी की सफलता की कहानियां मुझ तक जैसे लोगों को प्रेरित करती हुई मालूम पड़ती थीं, लेकिन कुछ संदेह के साथ.

डॉ. विजय अग्रवाल | Dec 8, 2017, 02:03 PM IST
डियर जिंदगी : आपका ‘सोना’ भी तो ‘मिट्टी’ नहीं हो रहा…

डियर जिंदगी : आपका ‘सोना’ भी तो ‘मिट्टी’ नहीं हो रहा…

हम कहने को कहते रहते हैं कि मेरा सपना कुछ ऐसा है, कुछ वैसा है, लेकिन उसके लिए करते कुछ नहीं. इस निरंतर टालने के कारण कई बार मन में गहरे दब गई अभिलाषा हमारी चेतना से लिपटकर हमारी आत्‍मा के 'गले की हड्डी' तक बन जाती है.

दयाशंकर मिश्र | Dec 8, 2017, 01:30 PM IST
WTO - क्या भारत को खाद्य सुरक्षा और खेती का नैतिक पक्ष याद रहेगा!

WTO - क्या भारत को खाद्य सुरक्षा और खेती का नैतिक पक्ष याद रहेगा!

अमेरिका सरीखे विकसित देशों का तर्क रहा है कि जब सरकार न्यूनतम समर्थन मूल्य देकर किसानों से सीधे अनाज खरीदती है, तो इससे खुले बाजार में प्रतिस्पर्धा कमजोर पड़ती है.

सचिन कुमार जैन | Dec 7, 2017, 04:58 PM IST
डियर जिंदगी : कमजोर, आक्रामक बच्‍चे और हम!

डियर जिंदगी : कमजोर, आक्रामक बच्‍चे और हम!

हिंसक होते बच्‍चों के बीच थोड़ा ठहरकर यह तो सोचना बनता ही है कि इतनी हिंसा हम उनके बीच कैसे जाने दे रहे हैं. कहीं ऐसा तो नहीं कि हमारे प्रेम में कमी आ गई है!

दयाशंकर मिश्र | Dec 7, 2017, 03:39 PM IST
कैसे स्थापित होगा राजनीतिक दलों में आंतरिक लोकतंत्र!

कैसे स्थापित होगा राजनीतिक दलों में आंतरिक लोकतंत्र!

ज्यादातर राजनीतिक दलों में जाति या वर्ग विशेष के नागरिकों को सदस्य बनाने के लिए अल्पसंख्यक प्रकोष्ठ, क्षत्रिय प्रकोष्ठ, अनुसूचित जाति एवं जनजाति प्रकोष्ठ, पिछड़ा प्रकोष्ठ,  ब्राह्मण प्रकोष्ठ, दलित प्रकोष्ठ बनाए जाते हैं. देखा जाए तो पूर्ण लोकतांत्रिक प्रक्रिया अपनाने वाले राजनीतिक दलों की यह प्रक्रिया राजनीतिक दल की लोकतांत्रिक भावना का अतिक्रमण करती है.

कपिल शर्मा | Dec 7, 2017, 11:33 AM IST
डियर जिंदगी : हम चाहते क्‍या हैं…

डियर जिंदगी : हम चाहते क्‍या हैं…

ऐसे युवाओं की संख्या बड़ी है, जिनमें पनप रही चाहत ही स्‍पष्‍ट नहीं है, उस पर आकर्षण के जाले लगे हैं! मैं बड़ी संख्‍या में ऐसे युवाओं से मिलता रहता हूं जो कहते हैं कि अपने सपनों को पूरा करने के लिए कुछ भी कर सकते हैं, लेकिन जैसे ही आप काम बताते हैं वह अपनें ‘कंफर्ट जोन’ में चले जाते हैं.

दयाशंकर मिश्र | Dec 6, 2017, 03:11 PM IST
मानुषी छिल्लर : 'खूबसूरत' सेल्फी के लिए उत्साहित लोग, अपनी सोच को भी खूबसूरत बना लें तो...

मानुषी छिल्लर : 'खूबसूरत' सेल्फी के लिए उत्साहित लोग, अपनी सोच को भी खूबसूरत बना लें तो...

मिस वर्ल्ड मानुषी छिल्लर लंदन के लिए रवाना हो गई हैं. हरियाणा की यह बेटी कन्या भ्रूणहत्या के लिए बदनाम अपने राज्य को दुनिया में नई पहचान दिलाएगी. दूसरी ओर देश में ‘बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ’ के बड़े नारों के बीच कड़वी हकीकत ये है कि आज भी हमारे देश की ‘पढ़ी-लिखी’ बेटियां समान व्यवहार से लेकर समान वेतनमान के लिये संघर्षरत हैं.

डॉ. मीना शर्मा | Dec 6, 2017, 12:02 PM IST
अज़ीम शायर निदा फाज़ली की याद में : कहीं सपना ज़िंदा है...

अज़ीम शायर निदा फाज़ली की याद में : कहीं सपना ज़िंदा है...

राजनीति की रणभूमि पर चल रहे दांव-पेंच के खेल को भी इस अज़ीम शायर ने महसूस किया. कहा, ‘हमारे यहां ये क्यों हो रहा है? कैसे हो रहा है? किसके लिए हो रहा है? इन सवालों का एक ही जवाब है- इलेक्शन

विनय उपाध्याय | Dec 5, 2017, 04:22 PM IST
डियर जिंदगी : कोलकाता; मनुष्‍य पर सवार ‘इल्लियां’ और संवेदना के ‘ब्‍लैक होल’

डियर जिंदगी : कोलकाता; मनुष्‍य पर सवार ‘इल्लियां’ और संवेदना के ‘ब्‍लैक होल’

राजाराम कहते हैं, 'यहां लोगों की जबान बहुत कड़वी हो गई है.' मैं सोच में पड़ गया कि मुझे तो नजर आती, दिखती भी नहीं. फिर अगले ही पल याद आता है कि असल अनुभव तो इनके पास है. जैसे लोहे का स्‍वाद, लुहार से अधिक घोड़े से पूंछना चाहिए, वैसे ही मनुष्‍यों के बारे में असल बात तो वही बता सकता है, जो उन्‍हें ढो रहा है.

दयाशंकर मिश्र | Dec 5, 2017, 02:52 PM IST
राहुल गांधी की ताज़पोशी- वंशवाद से लोकतंत्र को किस तरह से है खतरा!

राहुल गांधी की ताज़पोशी- वंशवाद से लोकतंत्र को किस तरह से है खतरा!

सोनिया गांधी कांग्रेस की 19 सालों से अध्यक्ष रही हैं. यह पद उन्हें गांधी-नेहरू परिवार की विरासत की वजह से ही मिला. कांग्रेसी वंशवाद के इसी दौर में 8 अध्यक्षों के माध्यम से भाजपा देश की रूलिंग पार्टी बन गई.

विराग गुप्ता | Dec 5, 2017, 11:44 AM IST
तिनका तिनका : बंद दरवाजे खुलेंगे कभी... आंखों में न रहेगी नमी, न होगी नमी

तिनका तिनका : बंद दरवाजे खुलेंगे कभी... आंखों में न रहेगी नमी, न होगी नमी

आरती बताया करती थी कि उसकी हर शाम कविता के साथ ढलती है और कविता के साथ ही सुबह का सूरज उगता है. वह 8000 से ज्‍यादा डायरियां लिख चुकी है जिसमें उसकी जिंदगी के तकरीबन हर दिन का हिसाब है.

वर्तिका नंदा | Dec 4, 2017, 07:23 PM IST
GDP में वृद्धि आखिर किसकी वृद्धि है, कितना विश्वसनीय है यह पैमाना!

GDP में वृद्धि आखिर किसकी वृद्धि है, कितना विश्वसनीय है यह पैमाना!

अगर गौर से देखें तो इस बार केवल मैन्युफैक्चरिंग क्षेत्र में वृद्धि से जीडीपी सुधरी. वैसे हमेशा से ही मैन्युफैक्चरिंग और सर्विसेज के आंकड़े ही जीडीपी के आंकड़ों को प्रभावित करते आए हैं. लेकिन इसमें देश की कुल आबादी की आधी से ज्यादा वह आबादी छूट जाती है जो कृषि से जुडी है.

सुविज्ञा जैन | Dec 4, 2017, 02:56 PM IST
मालिनी अवस्थी : धरती के छंद गाती आवाज़

मालिनी अवस्थी : धरती के छंद गाती आवाज़

कभी किसी सभागार की चार-दीवारी में, कभी आसमान तले भीड़ भरे जलसे के मंच पर, कभी दूरदर्शन के किसी चैनल पर, तो कभी अपनों के बीच किसी छोटी महफिल में. आवाज़ और अंदाज़ के निरालेपन के बीच मालिनी की पेशकश यकीनन सुनने वालों पर करिश्माई असर करती है.

विनय उपाध्याय | Dec 4, 2017, 01:01 PM IST
डियर जिंदगी : जापान के बुजुर्गों की दास्‍तां और हमारा रास्‍ता…

डियर जिंदगी : जापान के बुजुर्गों की दास्‍तां और हमारा रास्‍ता…

युवा अपने में खोए हुए हैं. वह अपने सपनों, ख्‍यालों की दुनिया में इतने खोए हैं कि उन्‍हें बुजुर्गों की परवाह ही नहीं है. यह लापरवाही बहुत हद तक अपने बड़ों को देखते हुए पनपती है.

दयाशंकर मिश्र | Dec 4, 2017, 12:00 PM IST
भोपाल गैस त्रासदी: पिंटू को नहीं भूलती वो हांफती हुई रात

भोपाल गैस त्रासदी: पिंटू को नहीं भूलती वो हांफती हुई रात

सुबह के तीन बज चुके थे. मामला धीरे धीरे साफ हो गया था टीला जमालपुरा से चंद किमी दूर पर बने यूनियन कार्बाइड से गैस का रिसाव हुआ था जिसने हवा में ज़हर घोल दिया था. लोग अब संभलने की कोशिश कर रहे थे. इसी जद्दोज़हद में सूरज की किरणों ने पड़ना शुरू कर दिया था. पिंटू गीली रजाई को समेटे सो रहा था, उसकी मां ने अब धीरे से गीली रज़ाई को हटा कर घर से लाकर एक कंबल उसे ओढ़ा दिया था.

पंकज रामेंदु | Dec 3, 2017, 12:57 PM IST