ज़ी स्पेशल

रंग सप्तक : जीवन के खरे आनंद से भरपूर धरती के छंद

रंग सप्तक : जीवन के खरे आनंद से भरपूर धरती के छंद

लोकगीतों की अवधारणा को भारतीय समाज से जोड़कर देखें, तो संस्कार गीतों की एक भरी-पूरी दुनिया से हमारा सामना होता है. सरल-सहज और मिठासभरी धुनों में रचे-पगे सैकड़ों गीत परंपरा से गलबाहें करते हमारी आत्मा में उतर जाते हैं.

विनय उपाध्याय | Jan 17, 2018, 01:53 PM IST
डियर जिंदगी : सबकुछ खोजना, अपने को मिटाकर!

डियर जिंदगी : सबकुछ खोजना, अपने को मिटाकर!

अब हम बच्‍चे को वही बनाने पर आमादा हो गए हैं, जो फैशन में है. गाना फैशन में तो बच्‍चा गायक. गणित फैशन में हो तो बच्‍चा वहां दिमाग खपाए, भले ही उसकी रुचि गायन में हो. मांग क्रिकेट की तो बच्‍चा क्रिकेटर, भले ही वह मुक्‍केबाज़ बनने को बेकरार हो.

दयाशंकर मिश्र | Jan 17, 2018, 12:49 PM IST

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रंग सप्तक : जीवन के खरे आनंद से भरपूर धरती के छंद

रंग सप्तक : जीवन के खरे आनंद से भरपूर धरती के छंद

लोकगीतों की अवधारणा को भारतीय समाज से जोड़कर देखें, तो संस्कार गीतों की एक भरी-पूरी दुनिया से हमारा सामना होता है. सरल-सहज और मिठासभरी धुनों में रचे-पगे सैकड़ों गीत परंपरा से गलबाहें करते हमारी आत्मा में उतर जाते हैं.

विनय उपाध्याय | Jan 17, 2018, 01:53 PM IST
डियर जिंदगी : सबकुछ खोजना, अपने को मिटाकर!

डियर जिंदगी : सबकुछ खोजना, अपने को मिटाकर!

अब हम बच्‍चे को वही बनाने पर आमादा हो गए हैं, जो फैशन में है. गाना फैशन में तो बच्‍चा गायक. गणित फैशन में हो तो बच्‍चा वहां दिमाग खपाए, भले ही उसकी रुचि गायन में हो. मांग क्रिकेट की तो बच्‍चा क्रिकेटर, भले ही वह मुक्‍केबाज़ बनने को बेकरार हो.

दयाशंकर मिश्र | Jan 17, 2018, 12:49 PM IST
रंग सप्तक : सबसे अलग आवाज़...

रंग सप्तक : सबसे अलग आवाज़...

मुझे सबसे ज्यादा आलोक की कविताओं ने प्रभावित किया. ये कविताएं दरअसल मन से मन की बात हैं. आलोक को यह गलतफहमी कतई नहीं है कि उनके लिखे-कहे से साहित्य का कोई नया गोत्र शुरू हो रहा है. न ही साहित्य के किसी मठ में शरण लेने की उद्घोषणा उन्होंने कभी की.

विनय उपाध्याय | Jan 16, 2018, 04:07 PM IST
डियर जिंदगी : कल्‍पना के ‘स्‍वेटर’ और रिश्‍तों में दरार

डियर जिंदगी : कल्‍पना के ‘स्‍वेटर’ और रिश्‍तों में दरार

रिश्‍तों के जाले वक्‍त के साथ साफ होने चाहिए. उनकी उलझनों से अपनों को दुविधा देने की जगह रोशनी देनी चाहिए. लेकिन दुर्भाग्‍य से कई बार हमारे अपने ही हमारे जीवन में रोशनी की जगह अपनी परेशानी, दुविधा और नासमझी का अंधेरा डालने पर आमादा हो जाते हैं.

दयाशंकर मिश्र | Jan 16, 2018, 01:00 PM IST
क्या भारतीय सेना केवल 'आर्मी डे' के दिन ही सम्मान के काबिल है?

क्या भारतीय सेना केवल 'आर्मी डे' के दिन ही सम्मान के काबिल है?

संयुक्त राष्ट्र (UN) के लिए भी भारतीय सेना ने संयुक्त राष्ट्र शांति रक्षा सेना (UN Peace Keeping Force) में दुनिया के कई अशांत क्षेत्रों में अपने जवान भेजकर के विश्व-शांति बनाने के लिए सराहनीय योगदान दिया है. लेकिन इन सब के बावजूद बड़े ही खेद का विषय है कि आज-कल भारतीय सेना को गाली देना एक फैशन-सा बन गया है.

पवन चौरसिया | Jan 15, 2018, 05:41 PM IST
रंग सप्तक : कोलाज में रमते श्रीकांत

रंग सप्तक : कोलाज में रमते श्रीकांत

श्रीकांत कहते हैं, 'हर व्यक्ति का चीज़ों को देखने-परखने और अभिव्यक्त करने का अपना तरीका होता है. मेरे लिए अभिव्यक्ति जीवन की अनिवार्यता है. जो कुछ देखूं-समझूं और जानूं उसे शब्दों या रंगों द्वारा व्यक्त कर सकूं. अभिव्यक्ति की यह छटपटाहट मुझे निरंतर प्रयोगशील रखती हैं.

विनय उपाध्याय | Jan 15, 2018, 04:39 PM IST
Blog : कॉपी पर राइट की फाइट

Blog : कॉपी पर राइट की फाइट

लेखक की रचना उसकी मर्जी के बगैर छापना, इस्तेमाल करना कोई नई बात नहीं है. ऐसे विवाद अक्सर सुनने को मिलते रहे हैं. फिल्मों में रचना को बेतकल्लुफी से चुराना और अपना बताना तो आम बात रही है.

पंकज रामेंदु | Jan 15, 2018, 03:11 PM IST
डियर जिंदगी : अपने ‘सुर’ में होने का सुख…

डियर जिंदगी : अपने ‘सुर’ में होने का सुख…

ऐसा व्‍यक्ति जिसे सुख के लिए बाहर, दुनिया के आंगन में झांकने की जरूरत नहीं है, वही तो सुखी है. जो अपने स्‍वर में है, वही सुखी है. जो दूसरों को देख स्‍वर बदले, वह कैसे सुख तक पहुंच सकता है.

दयाशंकर मिश्र | Jan 15, 2018, 12:41 PM IST
सामाजिक संघर्ष का हल धर्म में है कि राजनीति में- एक सवाल

सामाजिक संघर्ष का हल धर्म में है कि राजनीति में- एक सवाल

संघर्ष रहेगा तो मानव समाज की समस्याएं भी यथावत ही रहेंगी क्योंकि जाति, प्रजाति की आर्थिक-राजनैतिक-सामाजिक आधार पर वंचना हमेशा तनाव पैदा करती रहेगी. फिर सवाल उठता है कि मानव समाज की इन समस्याओं का हल क्या हो सकता है. 

कपिल शर्मा | Jan 13, 2018, 12:43 PM IST
विचार के लिए एक मुद्दा दे गई सुप्रीम कोर्ट के जजों की प्रेस कॉन्फ्रेंस

विचार के लिए एक मुद्दा दे गई सुप्रीम कोर्ट के जजों की प्रेस कॉन्फ्रेंस

लोकतंत्र के चार खंभों में एक न्यायपालिका ही बची थी जिस पर खुलेआम आरोप नहीं लगते थे. वैसे गाहेबगाहे न्यायपालिका में भ्रष्टाचार के आरोप लगते रहे हैं. 

सुविज्ञा जैन | Jan 13, 2018, 11:27 AM IST
त्वरित टिप्पणी : सुप्रीम कोर्ट के 4 जजों की प्रेस कॉन्फ्रेंस से न्यायपालिका में  उठते 4 बड़े मसले

त्वरित टिप्पणी : सुप्रीम कोर्ट के 4 जजों की प्रेस कॉन्फ्रेंस से न्यायपालिका में उठते 4 बड़े मसले

आज प्रेस कॉन्फ्रेंस करने वाले जज चेलमेश्वर और चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा की नियुक्ति एक दिन ही हुई थी. चेलमेश्वर चीफ जस्टिस भले ही नहीं बन पाएंगे पर वो चीफ जस्टिस को सुप्रीम मानने के लिए तैयार नहीं हैं, जिससे यह जजों का व्यक्तिगत विवाद भी बन गया है.

विराग गुप्ता | Jan 12, 2018, 03:21 PM IST
डियर जिंदगी :  जिंदगी 'धूप' में ही संवरती है...

डियर जिंदगी : जिंदगी 'धूप' में ही संवरती है...

समय अपनी गति से ही बढ़ रहा है. हां, हुआ इतना है कि पहले सबसे बड़ी रुकावट आर्थिक थी. अब वह अलग-अलग रूपों में हमारे सामने है. अब से पहले शायद ही कभी युवा में डिप्रेशन के इतने लक्षण दिखते थे.

दयाशंकर मिश्र | Jan 12, 2018, 01:36 PM IST
रंग सप्तक : उत्सव गाती रेखाएं

रंग सप्तक : उत्सव गाती रेखाएं

ब्रजेश आत्म प्रशिक्षित कलाकार हैं. परंपरा ही उनकी गुरु है जिसकी पूंजी पूर्वजों से हासिल है. ब्रजेश को अपनी निमाड़ की धरती और वहां की लोकरंगी संस्कृति से अगाध प्रेम है.

विनय उपाध्याय | Jan 12, 2018, 01:02 PM IST
डियर जिंदगी :  'मौन' को देखा है!

डियर जिंदगी : 'मौन' को देखा है!

एक दशक पहले तक 'मौन' खूबसूरत, महत्‍वपूर्ण गुण था. मौन हमारे समाज, चिंतन प्रक्रिया का अहम हिस्‍सा था. मौन में अकेला अवकाश ही नहीं है, जो हमें भीतर से ऊर्जा देता था. बल्कि हमें उन गैरजरूरी चीजों में उलझने से रोकता है, जो हमारी क्षमता, ऊर्जा और स्‍नेह को सोख लेती हैं.

दयाशंकर मिश्र | Jan 11, 2018, 06:08 PM IST
Analysis : विदेशी निवेश के लिए सरकार की नई कवायद से जुड़े कुछ तथ्य

Analysis : विदेशी निवेश के लिए सरकार की नई कवायद से जुड़े कुछ तथ्य

2013 में हम एफडीआई प्रवाह के मामले में 15वे नंबर पर थे, 2014 में 9वें पर आ गए थे. और 2015 में हम एफडीआई के लिए सबसे अच्छा विकल्प बनकर उभरे थे.

सुविज्ञा जैन | Jan 11, 2018, 05:41 PM IST
विश्व पुस्तक मेलाः बच्चों की किताबों की दुनिया में हाशिये पर हिन्दी

विश्व पुस्तक मेलाः बच्चों की किताबों की दुनिया में हाशिये पर हिन्दी

रोजी-रोटी के लिए प्रकाशन कार्य करने वाला कोई भी दुकानदार वही कार्य करेगा, जिससे उसको मुनाफा होगा यानी हिन्दी में किताब छापने या बेचने से परहेज करेगा.

सत्येंद्र सिंह | Jan 11, 2018, 03:49 PM IST
विश्व पुस्तक मेला : नीरस दुनिया से चौथी दुनिया का सफर

विश्व पुस्तक मेला : नीरस दुनिया से चौथी दुनिया का सफर

मान लीजिए कि मैंने अपनी जिंदगी में सौ अच्छी किताबें पढ़ीं, तो एक प्रकार से मैंने अपनी एक ही जिंदगी में सौ लोगों की जिंदगियां जी लीं. इन किताबों को पढ़े बिना ऐसा कर पाना क्या किसी के लिए भी संभव है?

डॉ. विजय अग्रवाल | Jan 11, 2018, 12:35 PM IST
नर्सरी एडमिशन: निजी स्कूल सिर्फ पैसे लेते हैं, ज़िम्मेदारी नहीं

नर्सरी एडमिशन: निजी स्कूल सिर्फ पैसे लेते हैं, ज़िम्मेदारी नहीं

स्कूल बल्कि अधिकांश निजी शिक्षण संस्थान भी दाखिला सिर्फ पैसों के लिए देते हैं. बाकि उनकी कोई ज़िम्मेदारी नहीं बनती है.

पंकज रामेंदु | Jan 10, 2018, 11:12 PM IST
डियर जिंदगी : 'तुम' पहले जैसे नहीं रहे...

डियर जिंदगी : 'तुम' पहले जैसे नहीं रहे...

दुनिया तेजी से बदल रही है. जिम्‍मेदारी बदल रही है. काम का बोझ बढ़ रहा है. ऐसे में रिश्‍तों के बीच प्रेम का संतुलन गड़बड़ा गया है.

दयाशंकर मिश्र | Jan 10, 2018, 07:30 PM IST
डियर जिंदगी : हमें पुल बनाने हैं, दीवारें नहीं...

डियर जिंदगी : हमें पुल बनाने हैं, दीवारें नहीं...

दोस्‍तों, परिवार और सहकर्मियों के बीच अक्‍सर जरा-जरा सी बात पर मनमुटाव से शुरू हुई बाधा 'दीवार' का रूप लेती जाती है. हम समझ नहीं पाते, टालते रहते हैं. टलते-टलते दीवारें अक्‍सर हमारे मन, मस्तिष्‍क से होते हुए हमारी कोमल और उदार भावना को चट कर जाती हैं.

दयाशंकर मिश्र | Jan 9, 2018, 05:34 PM IST