ज़ी स्पेशल

डियर जिंदगी: हिम्‍मत कहां से मिलेगी!

डियर जिंदगी: हिम्‍मत कहां से मिलेगी!

हम अपने सपने के लिए कितने पागल हैं, बच्‍चों की दिशा तय करने में यह पागलपन सबसे अधिक भूमिका निभाता है. इसमें योग्‍यता जितना ही यह जरूरी है कि आप कितना जोखिम उठाने के लिए तैयार हैं.

दयाशंकर मिश्र | Apr 20, 2018, 07:35 AM IST
Opinion : नकदी की समस्या को 'अचानक' कहना कितना सही?

Opinion : नकदी की समस्या को 'अचानक' कहना कितना सही?

नकद और उधार का चक्कर सबको पता है. वे दिन हवा हुए जब व्यापार में लोग आगे की तारीख के चैक लेकर सामान दे दिया करते थे. अब व्यापार में एक-दूसरे पर यकीन खत्म मानिए. ऊपर से डिजिटल युग ने हाल के हाल पैसे लेने की सुविधा दे दी. कोई बहाना नहीं बचा. यानी जरूरी है कि या तो हाथ में नकदी हो या अकाउंट में पैसा हो.

सुविज्ञा जैन | Apr 18, 2018, 03:16 PM IST

अन्य ज़ी स्पेशल

डियर जिंदगी: हिम्‍मत कहां से मिलेगी!

डियर जिंदगी: हिम्‍मत कहां से मिलेगी!

हम अपने सपने के लिए कितने पागल हैं, बच्‍चों की दिशा तय करने में यह पागलपन सबसे अधिक भूमिका निभाता है. इसमें योग्‍यता जितना ही यह जरूरी है कि आप कितना जोखिम उठाने के लिए तैयार हैं.

दयाशंकर मिश्र | Apr 20, 2018, 07:35 AM IST
डियर जिंदगी: तनाव में आप क्‍या करते हैं...

डियर जिंदगी: तनाव में आप क्‍या करते हैं...

गुस्‍से और तनाव के साथ सड़क पर उतरने का अर्थ ऐसा है मानो आपने तेज गति की गाड़ी को बीच सड़क पर बिना नियंत्रण के छोड़ दिया हो. अब तो कुछ भी हो सकता है. गौरव के साथ यही तो हुआ.

| Apr 19, 2018, 08:08 AM IST
Opinion : नकदी की समस्या को 'अचानक' कहना कितना सही?

Opinion : नकदी की समस्या को 'अचानक' कहना कितना सही?

नकद और उधार का चक्कर सबको पता है. वे दिन हवा हुए जब व्यापार में लोग आगे की तारीख के चैक लेकर सामान दे दिया करते थे. अब व्यापार में एक-दूसरे पर यकीन खत्म मानिए. ऊपर से डिजिटल युग ने हाल के हाल पैसे लेने की सुविधा दे दी. कोई बहाना नहीं बचा. यानी जरूरी है कि या तो हाथ में नकदी हो या अकाउंट में पैसा हो.

सुविज्ञा जैन | Apr 18, 2018, 03:16 PM IST
डियर जिंदगी: बेशकीमती होने का अर्थ!

डियर जिंदगी: बेशकीमती होने का अर्थ!

हम अक्‍सर इस बात से परेशान रहते हैं कि हम कितने उपयोगी/मूल्‍यवान हैं. इसकी एक ठोस वजह यह होती है कि हम अपने बारे में आश्‍वस्‍त नहीं होते. 

दयाशंकर मिश्र | Apr 18, 2018, 08:26 AM IST
Opinion: क्या अब देश में खेल संस्कृति का विकास होगा

Opinion: क्या अब देश में खेल संस्कृति का विकास होगा

राष्ट्रमंडल खेलों में 500 पदक अर्जित करने वाला भारत पांचवां देश बन गया है. 

परशुराम जयंती पर विशेष : जन्म से नहीं संस्कार से मिलता है ब्राम्हणत्व

परशुराम जयंती पर विशेष : जन्म से नहीं संस्कार से मिलता है ब्राम्हणत्व

यदि शूद्र में सत्य आदि उपयुक्त लक्षण हैं और ब्राह्मण में नहीं हैं, तो वह शूद्र शूद्र नहीं है, ना वह ब्राह्मण ब्राह्मण.

जयराम शुक्ल | Apr 17, 2018, 09:46 PM IST
डियर जिंदगी:  महसूस किए बिना जीते रहना!

डियर जिंदगी: महसूस किए बिना जीते रहना!

जब हम बच्‍चों को दिन-रात अपने पर फोकस करने का पाठ घोलकर पढ़ा रहे हैं, तो उनसे कैसे यह अपेक्षा कर रहे हैं कि वह सोशल होंगे.

दयाशंकर मिश्र | Apr 17, 2018, 07:09 AM IST
ब्लॉगः सुप्रीम कोर्ट में कठुआ रेप मामला, न्याय बना सियासी फुटबॉल

ब्लॉगः सुप्रीम कोर्ट में कठुआ रेप मामला, न्याय बना सियासी फुटबॉल

कठुआ गैंगरेप मामले की जांच में विवाद के दौर में यह सुनिश्चित करना जरूरी है कि पुलिस और केन्द्रीय सुरक्षाबलों के बीच बढ़ रही अविश्वास की खाई का लाभ आने वाले समय में कहीं आतंकी संगठनों को न मिले?

विराग गुप्ता | Apr 16, 2018, 03:59 PM IST
डियर जिंदगी : अपनी जिंदगी में दूसरे का ‘हिस्‍सा’

डियर जिंदगी : अपनी जिंदगी में दूसरे का ‘हिस्‍सा’

शिक्षित होने की सबसे बड़ी शिक्षा ही मनुष्‍यता है. बाकी उसके साथ जो मिले वह तो मूल के साथ सूद जैसी बात है.

दयाशंकर मिश्र | Apr 16, 2018, 08:03 AM IST
भोजन व्यवहार के आंकलन बिना संभव नहीं खाद्य सुरक्षा

भोजन व्यवहार के आंकलन बिना संभव नहीं खाद्य सुरक्षा

कई राज्यों में पीडीएस के तहत दाल, खाद्य तेल, मसाले, आयोडाइज्ड नमक, चीनी एंव केरोसीन तेल भी पूर्व से ही सस्ती दरों में उपलब्ध कराया जा रहा है. अतएव क्षेत्रीय भोजन व्यवहार का आंकलन कर खाद्य पदार्थाे को उपलब्ध कराने से पीडिएस लाभुकों द्वारा अनाज का व्यर्थ प्रयोग रोकने के साथ कालाबाजारी को भी सीमित किया जा सकेगा.

कपिल शर्मा | Apr 14, 2018, 07:57 PM IST
दलितों पर चक्रव्यूह में भाजपा

दलितों पर चक्रव्यूह में भाजपा

पिछले आम चुनाव के समय ही भाजपा दलितों के प्रति अपना प्रेम प्रकट कर रही थी. सत्ता में आने के बाद रामनाथ कोविंद को राष्ट्रपति बनाना दलित समाज के प्रति उसके सम्मान का ही हिस्सा था. ऐसी प्रतीकात्मक राजनीति कांग्रेस भी करती रही है. लेकिन एक बात जो उसे कांग्रेस से अलग करती है, वह है दलित अस्मिता के प्रतीक बाबा साहेब डॉ. बीआर आंबेडकर को प्रतिष्ठित करना.

सत्येंद्र सिंह | Apr 14, 2018, 03:37 PM IST
आंबेडकर को मात्र ‘दलित-नेता’ कहना उनके साथ सबसे बड़ा अन्याय

आंबेडकर को मात्र ‘दलित-नेता’ कहना उनके साथ सबसे बड़ा अन्याय

14 अप्रैल भारत के लिए किसी भी राष्ट्रीय पर्व से कम नहीं है. आज एक कृतज्ञ राष्ट्र संविधान निर्माता डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर को उनके 127वें जन्मदिवस पर श्रद्धांजलि अर्पित करता है.

पवन चौरसिया | Apr 14, 2018, 01:48 PM IST
एक पिता का पत्र जो हर स्कूल के लिए एक सबक है

एक पिता का पत्र जो हर स्कूल के लिए एक सबक है

क्या इस नंबर गेम से मुक्ति संभव है और क्या इसमें कुसूर केवल एक स्कूल भर का है. शायद नहीं. सवाल इतने भारी भी नहीं हैं और इतने आसान भी नहीं हैं.

अगर आज डॉ. आंबेडकर होते तो दलित उत्पीड़न कानून में बदलाव पर क्या कहते

अगर आज डॉ. आंबेडकर होते तो दलित उत्पीड़न कानून में बदलाव पर क्या कहते

इस तरह के काल्पनिक सवालों के जवाब तो होते नहीं हैं, लेकिन इसी तरह के विषयों पर डॉक्टर साहब ने अपने जीते-जी तो बातें कहीं थीं, उन्हें अगर दोबारा पढ़ा जाए तो उनके विचारों का कुछ अंदाजा लग सकता है.

अनामदास | Apr 13, 2018, 07:18 PM IST
डियर जिंदगी : अनूठी 'उधारी' और मदद का बूमरैंग...

डियर जिंदगी : अनूठी 'उधारी' और मदद का बूमरैंग...

हमारी मदद अक्‍सर लौटाने वाले की हैसियत देखती है. जिनकी 'रिटर्न' वैल्‍यू कम है, उन्‍हें पैसे देना हमारे यहां सामान्‍य नहीं है. हम वंचितों के लिए कभी उदार रहे भी नहीं हैं. 

दयाशंकर मिश्र | Apr 13, 2018, 08:56 AM IST
Zee Analysis : पुलिस हिरासत में किसी की मौत किस ओर इशारा करती है

Zee Analysis : पुलिस हिरासत में किसी की मौत किस ओर इशारा करती है

1980 में पुलिस की बर्बरता का शिकार बनी एक महिला और उसके पति और साथियों की हत्या का एक इसी तरह के मामला जन आंदोलन में बदल गया था.

पंकज रामेंदु | Apr 12, 2018, 11:51 PM IST
उन्नाव कांडः कुलदीप सिंह सेंगर के बहाने योगी पर निशाना

उन्नाव कांडः कुलदीप सिंह सेंगर के बहाने योगी पर निशाना

कानून-व्यवस्था के स्तर पर किसी भी सरकार की भूमिका मुख्यतः दो स्तरों पर ही आंकी जाती है. पहला यह कि वह अपराध की घटनाओं को रोक पाती है या नहीं और दूसरे घटना घटित होने के बाद वह क्या कदम उठाती है.

सत्येंद्र सिंह | Apr 12, 2018, 03:36 PM IST
आरक्षण का सहारा न लें, स्वावलंबी बनें

आरक्षण का सहारा न लें, स्वावलंबी बनें

कर्म की प्रधानता होनी चाहिए उसी के हिसाब से मूल्यांकन होना चाहिए. जो सम्पन्न हैं जाति से दलित हैं. यदि वह भी आरक्षण चाहते हैं तो वे दलित ही रहेंगे. अपनी सोच से अपने विचारों से. ना जाने क्यों जब-जब आगे बढ़ना चाहते हैं तब-तब कमजोर जातिगत भावनाए भारत को आहत कर देती हैं.

रेखा गर्ग | Apr 12, 2018, 03:11 PM IST
डियर जिंदगी : 'चीजों' की जगह अनुभव चुनिए...

डियर जिंदगी : 'चीजों' की जगह अनुभव चुनिए...

समाज में शिक्षा की कमी के कारण सबसे अधिक ज़ोर ख़रीदने पर है. इस ख़रीदारी की जड़ में इच्‍छा से कहीं अधिक आरोपित चाहत और तुलना होती है.

दयाशंकर मिश्र | Apr 12, 2018, 07:16 AM IST
डियर जिंदगी: मेरी अनुमति के बिना आप मुझे दुखी नहीं कर सकते!

डियर जिंदगी: मेरी अनुमति के बिना आप मुझे दुखी नहीं कर सकते!

आत्‍महत्‍या पर काम करने वाले विशेषज्ञ मानते हैं कि यह असल में एक ऐसी कुंठा का पाला पोसा विचार है, जो सबसे पहले मन की गहराई में जन्‍म लेता है. उसके बाद जैसे ही उसे बाहर से 'आहार' मिलता है, वह विचार बड़ा और घातक हो जाता है.

दयाशंकर मिश्र | Apr 11, 2018, 07:45 AM IST