ज़ी स्पेशल

डियर जिंदगी: गुस्‍से का आत्‍महत्‍या की ओर मुड़ना!

डियर जिंदगी: गुस्‍से का आत्‍महत्‍या की ओर मुड़ना!

सड़क हादसे अक्‍सर दिमाग में चल रहे ऐसे स्‍पीड ब्रेकर का परिणाम होते हैं, जिनका जन्‍म घर, रिश्‍तों की टकराहट से होता है.

दयाशंकर मिश्र | Nov 15, 2018, 07:59 AM IST
गांधी@150: बड़े कमाल की थी पत्रकार गांधी की शख्सियत

गांधी@150: बड़े कमाल की थी पत्रकार गांधी की शख्सियत

दुनिया में छिड़ी अभिव्यक्ति की आजादी की बहस के बीच यह जानना काम का होगा कि पत्रकार के रूप में महात्मा गांधी इस चुनौती का सामना कैसे कर रहे थे.

चिन्मय मिश्र | Nov 14, 2018, 07:09 PM IST

अन्य ज़ी स्पेशल

मान लेना चाहिए कि हमारी जान हमारे हाथ में है

मान लेना चाहिए कि हमारी जान हमारे हाथ में है

हम खुद भी एक भीड़ की तरह व्यवहार करते हैं, भीड़ के साथ भी कुछ भी हो सकता है और भीड़ किसी के साथ कुछ भी कर सकती है.

अमृतसर रेल हादसाः पटरी पर शहर और बेपटरी देश

अमृतसर रेल हादसाः पटरी पर शहर और बेपटरी देश

इस दुर्घटना ने मुझे भीतर तक हिलाकर रख दिया है. असल में यह एक ऐसी दुर्घटना है जो हमारे उस मूल चरित्र की बानगी है, जिसमें हमारे दिमाग में इंसानी जीवन का मूल्य बहुत कम हो गया है.

पीयूष बबेले | Oct 20, 2018, 02:40 PM IST
डियर जिंदगी : माता-पिता के आंसुओं के बीच 'सुख की कथा' नहीं सुनी जा सकती...

डियर जिंदगी : माता-पिता के आंसुओं के बीच 'सुख की कथा' नहीं सुनी जा सकती...

बच्चों को दी जाने वाली शिक्षा और संस्कार पर बहुत गंभीरता से विचार की जरूरत है. अगर इस पर समय रहते संशोधन नहीं हुआ तो हम बुजुर्गों की एक ऐसी दुनिया बना देंगे, जहां तनाव, डिप्रेशन और उदासी के घाव के अतिरिक्त कुछ नहीं होगा. और यह जरूर याद रहे कि हम इस दुनिया से बहुत दूर नहीं होंगे!

दयाशंकर मिश्र | Oct 19, 2018, 09:20 AM IST
उपवासों की नाकामी के दौर में गांधी के उपवास दर्शन को समझना जरूरी है

उपवासों की नाकामी के दौर में गांधी के उपवास दर्शन को समझना जरूरी है

‘‘अनशन (उपवास) का सहारा केवल प्रेमी के खिलाफ ही लिया जा सकता है, और यह उससे अधिकार लेने के लिए नहीं, बल्कि उसे सुधारने के लिए है. ठीक वैसे ही जैसे कि कोई बेटा अपने शराबी पिता के लिए अनशन करे. बम्बई और उसके बाद बारडोली के मेरे उपवास उसी तरह के थे.’’- गांधी (यंग इंडिया - 01.05.1924)

चिन्मय मिश्र | Oct 18, 2018, 04:00 PM IST
सबरीमाला: जिसकी लाठी उसकी भैंस, क्या महिला जज सही थीं?

सबरीमाला: जिसकी लाठी उसकी भैंस, क्या महिला जज सही थीं?

सुप्रीम कोर्ट की 5 जजों की बेंच ने 4:1 के बहुमत से महिलाओं के हक में 28 सितंबर को फैसला दिया था जिस पर महिला जज इंदु मल्होत्रा ने असहमति व्यक्त की थी. सीनियर एडवोकेट से सीधे सुप्रीम कोर्ट की जज बनीं जस्टिस मल्होत्रा ने 74 पेज के पृथक फैसले में अनेक महत्वपूर्ण बिन्दुओं पर अपनी राय प्रकट की थी. 

विराग गुप्ता | Oct 18, 2018, 03:41 PM IST
डियर जिंदगी: ...जो कुछ न दे सके

डियर जिंदगी: ...जो कुछ न दे सके

 समय का छोटा सा टुकड़ा उनके लिए भी निकालना चाहिए, जिन्होंने 'धूप' के वक्त बिना शर्त हमें अपनी छांव देने के साथ ही, हमारे होने में अहम भूमिका का निर्वाह किया.

दयाशंकर मिश्र | Oct 18, 2018, 09:17 AM IST
सबरीमाला विवाद: जिस मंदिर के कपाट बंद हों, उसमें जाना ही क्यों

सबरीमाला विवाद: जिस मंदिर के कपाट बंद हों, उसमें जाना ही क्यों

सबरीमाला में चल रहा ये विवाद नया नहीं है . बल्कि यूं कहिये की पिछले दो दशक से ये विवाद चल रहा है . 

पंकज रामेंदु | Oct 17, 2018, 07:20 PM IST
#MeToo अकबर का इस्तीफा : यह दफ्तर हैं, कुंठित पुरुषों के हरम नहीं

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यह भी संयोग ही है कि अकबर का इस्तीफा उस दिन आया जब देश दुर्गाष्टमी का त्योहार मना रहा है.

पीयूष बबेले | Oct 17, 2018, 06:01 PM IST
स्त्री सशक्तिकरण का सबसे पुराना रूप है दुर्गा पूजा में कोठे की मिट्टी का प्रयोग

स्त्री सशक्तिकरण का सबसे पुराना रूप है दुर्गा पूजा में कोठे की मिट्टी का प्रयोग

पौराणिक मान्यता के अनुसार, प्राचीन काल में बंगाल की एक वेश्या की भक्ति से प्रसन्न होकर मां दुर्गा से उसे दर्शन दिए थे. इस दौरान वेश्या ने मां से समाज में जो एक आम स्त्री को सम्मान और प्यार मिलता है, इसके लिए वरदान मांगा था. तब मां ने कहा था कि तुम्हारे दरवाजे पर पुरुष सिर्फ विलास की कामना से आता है, इसलिए तुम्हें एक आम स्त्री की तरह दर्जा देना तो असंभव है.

आशु दास | Oct 17, 2018, 03:43 PM IST
डियर जिंदगी : साथ रहते हुए स्‍वतंत्र होना!

डियर जिंदगी : साथ रहते हुए स्‍वतंत्र होना!

जहां भाव से अधिक ‘समझ’ जमा हो जाती है, वहां रिश्‍तों में दरार की गुंजाइश बढ़ जाती है. रिश्‍तों के नाम भले वही हों, लेकिन उनके मिजाज, व्‍यवहार में जो ‘ताजी’ हवा आई है, उसके अनुकूल स्‍वयं को तैयार करना होगा.

दयाशंकर मिश्र | Oct 17, 2018, 10:19 AM IST
#मीटू अभियान : परंपरागत सामाजिक नियंत्रण का ई-वर्जन

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ऐसे लोग भी हैं जो कह रहे हैं कि हो सकता है कि आरोप सच हों लेकिन अब बोलने का क्या मतलब है? 

विनय जायसवाल | Oct 17, 2018, 12:12 AM IST
यानी बुनियादी सवाल पर मिला इस बार अर्थशास्त्र का नोबेल

यानी बुनियादी सवाल पर मिला इस बार अर्थशास्त्र का नोबेल

इस साल अर्थशास्त्र का नोबेल येल यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर. विलियम डी नोर्डहाउस और न्यूयॉर्क यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर पॉल रोमर को साझेतौर पर मिला है. 

सुविज्ञा जैन | Oct 16, 2018, 10:43 PM IST
विश्व खाद्य दिवस: क्या पेट भर राशन मिलना अब भी मुश्किल है

विश्व खाद्य दिवस: क्या पेट भर राशन मिलना अब भी मुश्किल है

रोजगार और आजीविका के संकट से जूझते समाज के लिए यह राशन कितना महत्वपूर्ण है. 

डियर जिंदगी : ‘आईना, मुझसे मेरी पहली सी सूरत मांगे...’

डियर जिंदगी : ‘आईना, मुझसे मेरी पहली सी सूरत मांगे...’

हम दो कदम आगे बढ़ते हैं, तो पीछे के उजालों को भूलने लगते हैं. यह पीछे छूटते उजाले धीरे-धीरे हमारी सूरत बदलने लगते हैं. एक दिन होता यह है कि आईना, हमारी हमारी शक्‍ल भूलने लगता है. पहली सी सूरत मांगने लगता है!

दयाशंकर मिश्र | Oct 16, 2018, 10:01 AM IST
श्रद्धांजलि अन्नपूर्णा देवी: मैहर के सुरबहार का यूं खामोश हो जाना

श्रद्धांजलि अन्नपूर्णा देवी: मैहर के सुरबहार का यूं खामोश हो जाना

अन्नपूर्णा देवी बाबा की बेटी से ज्यादा मां शारदा की वरद् पुत्री थीं. संगीत जगत में उनकी ख्याति सुरबहार की साधक के रूप में हुआ.

जयराम शुक्ल | Oct 15, 2018, 07:40 PM IST
यह कहानी पढ़िए और जनका के हौसले को करिए सलाम

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आज 'इंटरनेशनल डे आफ रूरल वुमन' है. यूनाइटेड नेशन्स की ओर से यह दिन 2008 से हर साल ग्रामीण महिलाओं के सम्मान में मनाया जाता है. चलिए यही सही, इस बहाने कम से कम हम देश में ग्रामीण महिलाओं के संघर्ष को याद तो कर ही लेते हैं.

डियर जिंदगी: अपेक्षा का कैक्टस और स्नेह का जंगल

डियर जिंदगी: अपेक्षा का कैक्टस और स्नेह का जंगल

बच्चों को होशियार, चतुर, 'चांद' पर जाने लायक बनाने की कोशिश में हम स्नेह की चूक कर रहे हैं, जो एक हरे-भरे, लहलहाते जीवन को सुखद आत्मीयता की जगह कहीं अधिक कैक्टस और कंटीली झाड़ियों से भर रही है.

दयाशंकर मिश्र | Oct 15, 2018, 09:11 AM IST
लोकतंत्र में बच्चों की आवाज सुना जाना सबसे जरूरी

लोकतंत्र में बच्चों की आवाज सुना जाना सबसे जरूरी

देश के चार राज्यों में चुनाव होने जा रहे हैं. इनमें मध्यप्रदेश भी शामिल है. मध्यप्रदेश में इस चुनाव के संदर्भ में बच्चों की आवाज शामिल करने की एक साझा कोशिश की जा रही है. प्रदेश के तकरीबन 27 जिलों के पांच हजार बच्चों ने मिलकर अपना एक जनघोषणापत्र बनाया है और इसे सभी राजनैतिक दलों को सौंपा है.

युवा बिहारी आंत्रप्रेन्योर ही बिहार को बदलेंगे...

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हम जब तक बिहार की शिक्षा व्यवस्था ठीक नहीं करते हैं ये ठीक नहीं हो सकता है. काफी सारे लोग जॉब के लिए बाहर चले गए, क्योंकि उनके ज्ञान का यहां कोई इस्तेमाल नहीं था

राहुल कुमार | Oct 12, 2018, 05:36 PM IST
स्वामी साणंद: गंगा को तमाशा न बनाइए, खुद तमाशबीन न बनिए, प्रण लीजिए...

स्वामी साणंद: गंगा को तमाशा न बनाइए, खुद तमाशबीन न बनिए, प्रण लीजिए...

प्रोफेसर कहते थे कि उनके जीवन का मूल्य नहीं है, मूल्य गंगा का है. प्रोफेसर अब नहीं हैं, लेकिन गंगा अभी भी हैं. उन्हें अभी भी बचाया जा सकता है. वो नहीं बचीं, तो हम भी नहीं बचेंगे.

अजय पाण्डेय | Oct 12, 2018, 04:00 PM IST

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