ज़ी स्पेशल

ब्लू व्हेल गेम को बैन करने में सरकार विफल क्यों...

ब्लू व्हेल गेम को बैन करने में सरकार विफल क्यों...

विराग गुप्ता

| बुधवार , अगस्त 16, 2017 - 16:54
आज़ादी की 70वीं वर्षगांठ: मीलों हम आए हैं, मीलों हमें जाना है...

आज़ादी की 70वीं वर्षगांठ: मीलों हम आए हैं, मीलों हमें जाना है...

दुनिया में हम आर्थिक महाशक्ति के रूप में उभर रहे हैं वहीं उड़ीसा में एक आदिवासी अपनी पत्नी के शव को कंधे पर ले कर के जाता है. विदेशों में मेडल जीत कर देश का नाम रोशन करने वाले खिलाड़ी कई बार अपने ही देश में दो वक़्त कि रोटी को तरस जाते हैं.

| मंगलवार , अगस्त 15, 2017 - 17:24

अन्य ज़ी स्पेशल

राष्ट्रपति पद के लिए रामनाथ कोविंद के मायने

राष्ट्रपति पद के लिए रामनाथ कोविंद के मायने

पवन चौरसिया

| सोमवार , जून 19, 2017 - 17:02
डिजिटल दुनिया में बच्चों का शोषण; समाज,परिवार के सामने नई चुनौतियां

डिजिटल दुनिया में बच्चों का शोषण; समाज,परिवार के सामने नई चुनौतियां

इस बात को हमें अच्छे से समझ लेना चाहिए कि नए समाज, जिसमें विलासिता, उपभोक्तावाद और हिंसक प्रतिस्पर्धा मुख्य चारित्रिक पहलू हैं. इसने हमें संचार की तकनीक तो दी, किन्तु आपसी संबंधों से दूर भी किया है. उपकरण बढ़े हैं किन्तु अकेलापन उससे कहीं ज्यादा बढ़ा है. बच्चे अकेले हैं, माता-पिता अकेले है, जीवन में कुछ बनने-हासिल करने के लिए मशीनों का महत्व चरम पर है. सीखने का माध्यम संवाद नहीं, तकनीक है.

| शुक्रवार , जून 16, 2017 - 15:01
किसान आंदोलन : कर्ज से माफी ही नहीं मुक्ति की बात हो

किसान आंदोलन : कर्ज से माफी ही नहीं मुक्ति की बात हो

मध्यप्रदेश में अमन शांति की स्थापना के लिए किए गए उपवास से अब तक सात किसानों ने जीवनलीला समाप्त कर ली है. किसान आंदोलन के दौरान भी आत्‍महत्‍या के मामले सामने आए थे. इसका साफ मतलब यह माना जा सकता है कि किसान आंदोलन और उसके बाद मुख्यमंत्री का उपवास और घोषणाओं का समाज में बहुत सकारात्‍मक असर नहीं पड़ा है.

| शुक्रवार , जून 16, 2017 - 12:54
'अ डायलॉग विद जेसी' शो में BSNL के सीएमडी ने कहा, 'अगले 6 महीने में 25 हजार गांव में होगी वाई-फाई की व्यवस्था'

'अ डायलॉग विद जेसी' शो में BSNL के सीएमडी ने कहा, 'अगले 6 महीने में 25 हजार गांव में होगी वाई-फाई की व्यवस्था'

ज़ी मीडिया के ख़ास शो 'अ डायलॉग विद जेसी' में शिरकत करने वाले बीएसएनएल के सीएमडी अनुपम श्रीवास्तव से ज़ी रीजनल चैनल्स के सीईओ जगदीश चंद्र ने सरल, सहज लेकिन प्रभावी और धारदार सवाल किए. जिनका उन्होंने बेबाक जवाब भी दिया.

| गुरुवार , जून 15, 2017 - 19:21
आंदोलनों में हिंसा की आवाजें, ठोस पहल की जरूरत

आंदोलनों में हिंसा की आवाजें, ठोस पहल की जरूरत

आजकल आंदोलनों का दौर है. आंदोलनों का चरि‍त्र भी अब कई-कई कारणों से बदल रहा है. आक्रोश अब हिंसा में बदल रहा है. ऐसा इसलिए भी क्योंकि जब तक समाज को असुविधा नहीं होती तब तक ऐसे आंदोलनों का कोई फौरी तौर असर नजर नहीं आता. इरोम शर्मिला को देख लें, नर्मदा बचाओ आंदोलन को देख लें या ऐसे ही बीसियों उदाहरण इस देश में मिल जाएंगे. इसलि‍ए अब आंदोलनों को भी ध्‍यानाकर्षण चाहि‍ए, उसका सहज जरि‍या है सनसनी.

| बुधवार , जून 14, 2017 - 13:29
कतर संकट: कूटनीति में छुपा पूरा खेल और भारत पर उसका असर

कतर संकट: कूटनीति में छुपा पूरा खेल और भारत पर उसका असर

“ विदेश-नीति एक धर्मशास्त्र का नहीं, बल्कि लागत और लाभ का मामला है.” अपनी मशहूर पुस्तक ‘दा पोस्ट-अमेरिकन वर्ल्ड’ में पत्रकार फरीद ज़कारिया ने  जिस कथन को लिखा है, अंतर्राष्ट्रीय राजनीति में वो बिलकुल तर्कसंगत है. हर देश अपनी विदेश-नीति में राष्ट्रहित को विचारधारा से ऊपर ही रखता है. यही राजनेतिक यथार्वाद का प्रथम उसूल भी है.

| सोमवार , जून 12, 2017 - 16:53
साउथ अफ्रीका से जीतने के लिए ये सबक आएगा काम

साउथ अफ्रीका से जीतने के लिए ये सबक आएगा काम

सुविज्ञा जैन

| रविवार , जून 11, 2017 - 11:46
डियर जिंदगी : हम किसके सपने जी रहे हैं...

डियर जिंदगी : हम किसके सपने जी रहे हैं...

रिजल्‍ट का मौसम हमेशा की तरह बच्‍चों और पैरेंट्स के लिए इस बार भी खास है. इसलिए, यह हर जगह टॉकिंग प्‍वाइंट है, बहस, उलझन का दौर है. यह चुनाव  एकदम नैसर्गिक, बिना किसी तनाव के होना चाहिए. हमने बच्‍चों के बारे में सारा विमर्श नंबर केंद्रित कर दिया है, इसलिए अब उसकी सहज प्रतिभा का मूल्‍य निरंतर कम होता जा रहा है.

| मंगलवार , जून 6, 2017 - 16:56
डियर जिंदगी : दूसरों के बारे में आपकी राय क्‍या है...

डियर जिंदगी : दूसरों के बारे में आपकी राय क्‍या है...

जरा, इस सवाल को बिना किसी कारण, यूं ही दूसरों के सामने उछाल कर देखिए. आप पाएंगे कि लोगों के बारे में राय देते हुए हम अक्‍सर निगेटिव होते हैं. इसके पीछे मूल वजह यही होती है कि अगर कोई काबिल और सबसे अच्‍छा है तो वह मैं हूं. 

दयाशंकर मिश्र | सोमवार , जून 5, 2017 - 12:35
डियर ज़िंदगी : नए 'रिवाज' कहां से आएंगे और कौन लाएगा...

डियर ज़िंदगी : नए 'रिवाज' कहां से आएंगे और कौन लाएगा...

आलोचना से डरना एक समाज के रूप में इस मायने में अच्‍छा है कि लोग आमतौर पर कुछ नियम-कायदों के बंधन को मान लेते हैं. समाज में इस आलोचना का डर कई बार क़ानून के डर के मुकाबले अधिक देखा गया है. तो समाज को व्‍यवस्थित करने के लिहाज से इसे ठीक कहा जा सकता है. लेकिन आलोचना अगर समाज के बदलाव के साथ अपने को अपडेट नहीं करती तो वह समाज विशेषकर युवाओं के पांव की बेड़ियों की भूमिका निभाने लगती है.

दयाशंकर मिश्र | शुक्रवार , जून 2, 2017 - 11:56
डियर जिंदगी : हम बदलाव के लिए कितने तैयार हैं...

डियर जिंदगी : हम बदलाव के लिए कितने तैयार हैं...

हममें से ज़्यादातर लोग दावा करते हैं कि वह परिवर्तन पसंद हैं. बदलाव चाहते हैं, लेकिन भीतर से वह परिवर्तन विरोधी होते हैं, जो इस उम्‍मीद में जीते रहते हैं कि बस, एक बार सैटल हो जाएं. यह कहते-सुनते बच्‍चे जवान हो जाते हैं और जवान सीनियर सिटीज़न. लेकिन हर कोई बस इतना सा ख़्वाब लिए जिए जा रहा है कि सेटल हो जाएं. सैटल हो जाएंगे, तो वह ज़िंदगी जिएंगे, जो ख़्वाब में थी. अंतहीन ख़्वाबों का सिलसिला.

दयाशंकर मिश्र | गुरुवार , जून 1, 2017 - 12:20
डियर जिंदगी : हम 'आभार' से बहुत दूर निकल आए हैं...

डियर जिंदगी : हम 'आभार' से बहुत दूर निकल आए हैं...

एक दिन उनको चालीस बरस पहले उनके बॉस रहे शख्‍स की ओर से न्‍योता मिला. उनकी बेटी की शादी का निमंत्रण. उनके घर से कोई 400 किमी दूर. उन्‍होंने अपने बेटे जो किसी तीसरे छोर पर रहता था, उसे भी इस शादी में शामिल होने का आदेश दिया. बेटे ने थोड़ा विरोध जताते हुए इसमें जाने से इंकार कर दिया.

दयाशंकर मिश्र | बुधवार , मई 31, 2017 - 14:13
डियर जिंदगी : कौन हमें गुस्‍सैल, दुखी और बीमार बना रहा है...

डियर जिंदगी : कौन हमें गुस्‍सैल, दुखी और बीमार बना रहा है...

आप 'डियर जिंदगी' के इस लेख से असहमत हो सकते हैं. इस पर नाराजगी जाहिर कर सकते हैं. मैं इसका स्‍वागत करता हूं.

| मंगलवार , मई 30, 2017 - 16:54
NBCC के सीएमडी ने कहा- देश में लैंड मार्क प्रोजेक्ट बनाने का है सपना

NBCC के सीएमडी ने कहा- देश में लैंड मार्क प्रोजेक्ट बनाने का है सपना

ज़ी मीडिया के ख़ास शो 'A DIALOGUE WITH JC' में ज़ी रीज़नल चैनल्स के सीईओ और एक्ज़ीक्यूटिव डायरेक्टर जगदीश चंद्र के साथ इस बार रूबरू हुए एनबीसीसी के सीएमडी एके मित्तल. शो में मित्तल ने जगदीश चंद्र के धारदार सवालों का बेबाकी से जवाब दिया. मित्तल ने कहा कि उन्होंने अपने करियर की शुरुआत में नहीं सोचा था कि वह चेयरमैन बनेंगे. उन्होंने किसी गॉड फादर के रोल से साफ इंकार किया और कहा कि ईश्वर ऐसे रास्ते बनाते गया. 

| सोमवार , मई 29, 2017 - 19:03
डियर जिंदगी : रिजल्ट हमारा दोस्त, कभी बुरा नहीं होता

डियर जिंदगी : रिजल्ट हमारा दोस्त, कभी बुरा नहीं होता

सीबीएसई बोर्ड की 12वीं का रिजल्‍ट आने के बाद हम ऐसे बच्‍चों की सफलता की कहानियां बताने, सुनने में व्‍यस्‍त हैं, जिन्‍होंने लगभग 100 प्रतिशत अंक हासिल कर लिए हैं. यह रिजल्‍ट का बहुत छोटा हिस्‍सा है, इसका एक बड़ा हिस्‍सा ऐसे बच्‍चों से भरा पड़ा है, जो 80 या 90 प्रतिशत से अधिक अंक आने पर दुखी हैं तो उससे कम वालों की मनोदशा तो सहज ही समझी जा सकती है.

दयाशंकर मिश्र | सोमवार , मई 29, 2017 - 14:52
"अ डायलॉग विद जेसी शो" में राज्यवर्धन सिंह राठौड़ ने कहा, 'दुश्मन सरहद पार ही नहीं, सरहद के अंदर भी हैं'

"अ डायलॉग विद जेसी शो" में राज्यवर्धन सिंह राठौड़ ने कहा, 'दुश्मन सरहद पार ही नहीं, सरहद के अंदर भी हैं'

"अ डायलॉग विद जेसी शो" में बतौर खास मेहमान आए केंद्रीय सूचना एवं प्रसारण राज्यमंत्री राज्यवर्धन सिंह राठौड़ से ज़ी रीजनल चैनल्स के सीईओ जगदीश चंद्र ने बेहद सरल और धारदार सवाल किए, जिनका जवाब राज्यवर्धन सिंह राठौड़ ने बेबाकी से दिया. शो में उन्होंने कहा कि दुश्मन सरहद के पार ही नहीं सरहद के अंदर भी हैं.

| रविवार , मई 28, 2017 - 18:10
डियर जिंदगी : उनके लिए जो पहली, दूसरी नौकरी के बाद मुश्किल वक्त में हैं

डियर जिंदगी : उनके लिए जो पहली, दूसरी नौकरी के बाद मुश्किल वक्त में हैं

आईआईएम से निकले युवा का जैसा मिज़ाज होना चाहिए. उसका वैसा ही है. इसके साथ उसके पिता का आर्मी ऑफ़िसर का बैगग्राउंड उसे विरासत में मिला. उसकी पहली नौकरी वैसी ही है, जैसी हम आईआईएम के कैंपस प्‍लेसमेंट की कहानियां पढ़ते हैं. लाखों का पैकेज और सपनों का शहर मुंबई, लेकिन अनुभूति आनंद की ज़िंदगी पटरी पर नहीं आ रही थी. 

दयाशंकर मिश्र | शुक्रवार , मई 26, 2017 - 16:33
दोहरी-नीतियों और चरित्र से आतंक का खात्मा असंभव!

दोहरी-नीतियों और चरित्र से आतंक का खात्मा असंभव!

यूरोप एक बार फिर आतंकी हमले से दहल उठा है. ब्रिटेन के मैनचेस्टर में एक कॉन्सर्ट के दौरान हुए आत्मघाती धमाके ने पूरी दुनिया को झकझोर कर रख दिया है. इस लेख के लिखे जाने तक लगभग 22 लोगों की मृत्यु और करीब 60 लोगों के घायल हो जाने की खबर है जिनमें अधिकांश युवा और बच्चे शामिल हैं. सुरक्षा एजेंसियों ने इसके पीछे इस्लामिक स्टेट के आतंकियों की साज़िश होने से इनकार नहीं किया है.

| गुरुवार , मई 25, 2017 - 20:27
डियर ज़िंदगी : आपने सच्‍ची तारीफ़ कितने बरस पहले की थी...

डियर ज़िंदगी : आपने सच्‍ची तारीफ़ कितने बरस पहले की थी...

हम शिकायतों का पुलिंदा बन गए हैं. सुबह से शाम, देर रात सोने से पहले और जागने के बाद हम शिकायत के मास्‍टर हो जाते हैं. अक्‍सर ही हमें चीज़ों में कमी नज़र आने लगी है. इसका सबसे बड़ा असर यह हुआ है कि हम वर्तमान के सुख से दूर एक किस्‍म की मानसिक बाधा का शिकार हो गए हैं. हर बात में शिकायत, बात-बात में शिकायत. 

दयाशंकर मिश्र | गुरुवार , मई 25, 2017 - 16:34