ज़ी स्पेशल

डियर जिंदगी: विश्‍वास के भरोसे का टूटना !

डियर जिंदगी: विश्‍वास के भरोसे का टूटना !

जिंदगी का हिसाब ‘टुकड़े-टुकड़े’ में नहीं रखा जाता. इसके मायने हमेशा संपूर्णता में ग्रहण किए जाने चाहिए.

दयाशंकर मिश्र | Jan 22, 2019, 10:12 AM IST
ज़माने ज़माने की बात

ज़माने ज़माने की बात

आज़ादी की क़ीमत बड़ी महंगी पड़ रही थी, सारा जोश, सारा उत्साह धराशायी हुआ जाता था जिसमें मेरे गाँव के वाशिन्दे शामिल थे. गांव एक जाति और एक धर्म से बंधा नहीं होता. मेरे गांव में भी सातों जातियां और हिन्दू तथा मुसलमान नाम के धर्म थे. 

मैत्रेयी पुष्पा | Jan 21, 2019, 04:20 PM IST

अन्य ज़ी स्पेशल

अयोध्या पर पक्षकार बनकर मामले को तेजी से निपटा सकती है सरकार

अयोध्या पर पक्षकार बनकर मामले को तेजी से निपटा सकती है सरकार

पांच राज्यों में चुनावों के बाद शिवसेना द्वारा संसद में राम मंदिर का मुद्दा उठाये जाने से आम चुनावों के एजेंडे का आगाज़ हो गया.

विराग गुप्ता | Dec 14, 2018, 11:52 AM IST
नई कृषि निर्यात नीति जिस पर ज्यादा बात ही नहीं हुई

नई कृषि निर्यात नीति जिस पर ज्यादा बात ही नहीं हुई

सरकार के 2018 की नई कृषि निर्यात नीति को लागू करने की अनुमति दिए जाने की खबर में सबसे ज्यादा चर्चा कृषि निर्यात को बढ़ाने की है. कहा गया है कि यह किसानों की आय 2022 तक दोगुनी करने के सरकारी लक्ष्य की ओर उठाया गया एक कदम है. 

सुविज्ञा जैन | Dec 14, 2018, 11:26 AM IST
डियर जिंदगी: ‘गंभीर’ परवरिश !

डियर जिंदगी: ‘गंभीर’ परवरिश !

हम परवरिश कैसे करते हैं ! अपनी परवरिश के आधार पर. जैसी सब कर रहे हैं. उनके जैसे. जो भी हमें याद है, जो मेरी समझ है, उसके आधार पर!

दयाशंकर मिश्र | Dec 14, 2018, 08:07 AM IST
डियर जिंदगी: समझते क्यों नहीं!

डियर जिंदगी: समझते क्यों नहीं!

किसी को समझना बारिश की बूंदों में भीगने जैसा आसान होने के साथ, हिमालय की चढ़ाई करने जितना मुश्किल भी है!

दयाशंकर मिश्र | Dec 13, 2018, 08:29 AM IST
'महाभारत' के बाद शालीनता का शांतिपर्व

'महाभारत' के बाद शालीनता का शांतिपर्व

भाजपा के तीन मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान, वसुंधरा राजे और रमन सिंह महाभारत के उन तपे हुए योद्धाओं की तरह थे, जिनके नाम के आगे बड़ी विजयों की पूरी श्रृंखला थी, लेकिन उन्हें पता था कि आज इस धर्मयुद्ध में वे पिछले पांव पर हैं.

पीयूष बबेले | Dec 12, 2018, 04:40 PM IST
डियर जिंदगी : काश! माफ कर दिया होता...

डियर जिंदगी : काश! माफ कर दिया होता...

माफी न मिलना तो आपके बस में नहीं है, लेकिन माफ करना तो आपका अधिकार है! इससे खुद को वंचित मत रखिए!

दयाशंकर मिश्र | Dec 12, 2018, 08:52 AM IST
डियर जिंदगी: अप्रिय की जुगाली!

डियर जिंदगी: अप्रिय की जुगाली!

हम अप्रिय चीजों में ऐसे उलझे रहते हैं कि जीवन में तनाव, बुरी यादों का अनजाने में संग्रह करते रहते हैं. अप्रिय की जुगाली एक लत की तरह मन को अस्‍वस्‍थ, खोखला करती रहती है

 

दयाशंकर मिश्र | Dec 11, 2018, 08:31 AM IST
डियर जिंदगी: शुक्रिया 2.0 !

डियर जिंदगी: शुक्रिया 2.0 !

बॉलीवुड जिस तरह की चीजें रचता है, उसमें ऐसी रचना की गुंजाइश नहीं होती. तीनों ‘खान’, अमिताभ बच्‍चन में ऐसा ‘लोहा’ नहीं है, जिस पर पांच सौ करोड़ का दांव वह भी पर्यावरण पर आधारित कथा के लिए लगाया जा सके! 

दयाशंकर मिश्र | Dec 10, 2018, 08:07 AM IST
सिविल सेवकों का जनसेवक बनने का बढ़ता रुझान

सिविल सेवकों का जनसेवक बनने का बढ़ता रुझान

प्रशासकों द्वारा राजनीति के क्षेत्र में पदार्पण करना कोई नई बात नहीं है. प्रसिद्ध प्रशासक टीएन शेषन स्वयं इसमें और पराजित तथा निराश होकर चुपचाप बैठ गए. भारतीय विदेश सेवा के मणिशंकर अय्यर ने काफी नाम कमाया. 

डॉ. विजय अग्रवाल | Dec 8, 2018, 03:38 PM IST
लोकतंत्र की पीठ पर शनि की साढ़ेसाती

लोकतंत्र की पीठ पर शनि की साढ़ेसाती

तेलंगाना और राजस्थान में मतदान के साथ ही विधानसभा चुनाव 2018 संपन्न हो गया. चुनाव खत्म होते ही सभी प्रत्याशी ज्योतिष के संपर्क में पहुंचने लगे हैं, हालांकि उनके तकदीर का फैसला 11 दिसंबर को होगा.

जयराम शुक्ल | Dec 7, 2018, 07:38 PM IST
डियर जिंदगी: आनंद, उल्‍लास, रोमांच का रूठना!

डियर जिंदगी: आनंद, उल्‍लास, रोमांच का रूठना!

तकनीक, इंटरनेट ने हमें आनंद सुलभ कराने में मदद जरूर की है, लेकिन स्‍मार्टफोन ने उस आनंद में ही सेंध लगा दी. हम आनंद में सुखी होने की जगह तकनीक में उलझ गए. 

दयाशंकर मिश्र | Dec 7, 2018, 09:15 AM IST
बाबा साहब मानते थे कि गैरबराबरी दूर करने के लिए राज्य को सख्त कदम उठाने चाहिए

बाबा साहब मानते थे कि गैरबराबरी दूर करने के लिए राज्य को सख्त कदम उठाने चाहिए

भारतीय समाज में सदियों से मानवीय गरिमा का हनन होता आया है, जहां मनुष्य ही मनुष्य से घृणा रखे हुए है. ऐसे में उनका मानना था कि सामाजिक और आर्थिक असमानता एक राष्ट्र के तौर पर भारत को सशक्त नहीं बनाती हैं. 

डियर जिंदगी: खुशहाली के ख्‍वाब और 'रेगिस्‍तान'!

डियर जिंदगी: खुशहाली के ख्‍वाब और 'रेगिस्‍तान'!

जिंदगी को सारा अंतर इससे पड़ता है कि आपका चीजों के प्रति नजरिया कैसा है! आपका दृष्टिकोण ही सब कुछ है. इसलिए, उसे सहेजिए, संभालिए.

दयाशंकर मिश्र | Dec 6, 2018, 08:50 AM IST
डियर जिंदगी: आपका किला!

डियर जिंदगी: आपका किला!

अक्‍सर हम जिन चीजों से सहमत नहीं होते, उन्‍हें अनदेखा करते जाते हैं, हम उनसे खुद को बहुत दूर मानते हैं, जबकि सच्‍चाई कुछ और होती है.

दयाशंकर मिश्र | Dec 5, 2018, 08:11 AM IST
दर्द का पैगाम देती सड़कें

दर्द का पैगाम देती सड़कें

आपाधापी,जनसंख्या वृद्धि और नित्यप्रति बढ़ते वाहनों ने जिन्दगी की परिभाषा ही बदल दी है. आज सीधा-सादा जीवन मुश्किलों से भरा हो गया है, आवश्यकताएं बढ़ती जा रही हैं.

रेखा गर्ग | Dec 4, 2018, 11:06 PM IST
विराट कोहली पर रहेगा टीम इंडिया का दारोमदार, ‘स्टार्क एंड कंपनी’ लेगी कड़ी परीक्षा

विराट कोहली पर रहेगा टीम इंडिया का दारोमदार, ‘स्टार्क एंड कंपनी’ लेगी कड़ी परीक्षा

विकेटकीपर व विस्फोटक बल्लेबाज ऋषभ पंत परिस्थितियों से घबराते नहीं हैं और खेल को दुश्मन की गली तक ले जाने के लिए मशहूर हैं. 

सुशील दोषी | Dec 4, 2018, 05:17 PM IST
डियर जिंदगी: पापा की चिट्ठी!

डियर जिंदगी: पापा की चिट्ठी!

हम बच्‍चों को उतनी आजादी भी नहीं दे रहे जो हमें अपने माता-पिता से विरासत में मिली थी. हमारी अपेक्षा का बोझ उनके कोमल मन को हर दिन कठोर, रूखा बना रहा है!

दयाशंकर मिश्र | Dec 4, 2018, 08:04 AM IST
गांधी@150: गांधी जी का राम मंदिर उनके मन में ही था

गांधी@150: गांधी जी का राम मंदिर उनके मन में ही था

आजकल ‘‘राम’’ चर्चा में हैं. राम नाम नहीं, बल्कि राम मंदिर की वजह से. क्या इसे राष्ट्रीय अस्मिता से जोड़ने की कोई जरूरत है? वैसे राम जन्मभूमि विवाद गांधीजी के समय भी जारी था. परन्तु उन्होंने कभी इस विषय पर टिप्पणी की हो ऐसा कोई प्रमाण संभवतः नहीं है. हां, वे बेझिझक रामराज्य की बात करते रहे और स्वराज की अपनी परिकल्पना को रामराज्य से ही परिभाषित भी करते रहे.

चिन्मय मिश्र | Dec 3, 2018, 05:09 PM IST
घने जंगलों के बीच भारत की तीसरी सबसे प्रदूषित दुनिया

घने जंगलों के बीच भारत की तीसरी सबसे प्रदूषित दुनिया

इस बात पर ध्यान देना जरूरी है कि क्या अब सिंगरौली पर और नए उद्योग लगाए जाने चाहिए, क्या यहां का पर्यावरण उसे बर्दाश्त कर सकता है.

पंकज रामेंदु | Dec 3, 2018, 05:00 PM IST
भोपाल गैस त्रासदी: आंसू सूख गए, पर न्याय नहीं मिला

भोपाल गैस त्रासदी: आंसू सूख गए, पर न्याय नहीं मिला

गैस कांड की बरसी अब केवल रस्म अदायगी भर हो गई है. हक और न्याय की आवाजें अब थकी हुई, निराशा से भरी नजर आती हैं.