ज़ी स्पेशल

#MeToo: पांच साल की उम्र में मुझे नहीं पता था 'बैड टच' या 'गुड टच'

#MeToo: पांच साल की उम्र में मुझे नहीं पता था 'बैड टच' या 'गुड टच'

सोशल मीडिया पर #MeToo अभियान चल रहा है. बहुत से लोगों को पता ही नहीं है कि आखिर इस अभियान का मतलब क्या है. दरअसल ये अभियान हॉलीवुड एक्‍ट्रेस एलिसा मिलानो ने शुरू किया है.  #MeToo अभियान के तहत दुनियाभर की महिलाएं अपने साथ हुई यौन शोषण की घटनाओं का खुलासा कर रही हैं. #MeToo के जरिए महिलाएं अब खुलकर कह रही हैं कि हां मैं भी. लेकिन क्या इतना आसान है ये बोलना कि मैं भी यौन शोषण का शिकार हुई हूं.

निदा रहमान | Oct 17, 2017, 12:23 AM IST
रुह में बसे रहते हैं गुरु

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गुरु-शिष्य परंपरा के बगैर हमारे संगीत की विकास यात्रा को समझना निरर्थक होगा. आदिकाल से इस परंपरा को सम्मान और महत्व मिलता रहा है. वेद, शास्त्र, पुराण से लेकर आज तक गुरु और शिष्य की नातेदारी बराबर बनी हुई है.

विनय उपाध्याय | Oct 13, 2017, 06:30 PM IST

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डियर जिंदगी : कुछ नहीं बदलता, काश! तुम यह समझ लेते...

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हम गुस्‍से को संभालना. तनाव से निकलना, हर दूसरी भावनात्मक बात पर आहत हो जाने से जितना जल्‍दी उबरना सीखेंगे, एक समाज के रूप में उतनी जल्‍दी स्‍वस्‍थ होते जाएंगे.

दयाशंकर मिश्र | Sep 4, 2017, 04:16 PM IST
एक मकान की हत्या पर माफीनामा

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शायद अब आप इस पते के रहस्य को जानने की अपनी उत्सुकता को संभाल नहीं पा रहे होंगे. मैं कुछ सूत्र देता हूं. शायद आप खुद सत्य तक पहुंच जाए.

डॉ. विजय अग्रवाल | Sep 4, 2017, 03:57 PM IST
Analysis: मोदी कैबिनेट में ली गई संघ की राय, लेकिन चयन में कोई भूमिका नहीं

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मोदी कैबिनेट के तीसरे विस्तार में जदयू और शिवसेना को कोई मंत्रालय नहीं मिला है.

| Sep 4, 2017, 12:38 AM IST
डियर जिंदगी : सेल्‍फी संकट और 'जॉम्बी' बनने की बेकरारी

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हम जीना छोड़कर तस्‍वीर के फ्रेम में आने को तड़प रहे हैं. हर लम्‍हे की तस्‍वीर जरूरी है, या लम्‍हे को जीना!

| Sep 1, 2017, 03:32 PM IST
बात जो सीधे दिल से निकली है

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मेरे फिल्मकार मित्र सभाजीत शर्मा ने 'सलाम चूंद' नाम से घंटे भर की एक डाक्यूमेंट्री बनाई है. मुझे इसके प्रीमियर में बुलाया था.

| Sep 1, 2017, 12:59 PM IST
मधुकली का ‘बादल राग’: ‘कैसा छंद बना देती हैं, बरसातें बौछारों वाली’

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कविता ही क्यों, कलाओं के रूप-रंग भी ऋतुओं के साथ जुड़े जीवन-अनुभव से आच्छादित रहे हैं.

| Aug 31, 2017, 05:38 PM IST
गांव अगर शहर से कहे अपनी व्यथा

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‘किसान बदहाल है.'
'किसानी घाटे का सौदा है.'
'किसान आत्महत्या कर रहे हैं.'
'खेती में लागत तक नहीं निकल रही.'
'इस मौसम की फसल भी बर्बाद हो गई.' 

सुविज्ञा जैन | Aug 31, 2017, 05:03 PM IST
डियर जिंदगी : हम भी ऐसे ही फैसले लेते हैं!

डियर जिंदगी : हम भी ऐसे ही फैसले लेते हैं!

पंचों ने फैसला देने से पहले आपस में जो बात की उसका निष्‍कर्ष सुनिए. उन्‍होंने कहा, 'हंस-हंसनी तो परदेसी हैं, कुछ दिन में यहां से चले जाएंगे. लेकिन हमें तो इन उल्‍लुओं के बीच गुजारा करना है. हमारा इनका रिश्‍ता, निर्भरता, साथ गहरा है. इसलिए हमें उल्‍लू के पक्ष में ही फैसला देना चाहिए.

दयाशंकर मिश्र | Aug 31, 2017, 03:13 PM IST
कहीं प्रकृति का चक्र ‘शिशुपाल’ की गर्दन तो नहीं उतारने वाला?

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2008 में आई ‘दि हैपनिंग’ फिल्म प्रकृति के उस भयानक रूप की कल्पना है जो कई मायनों में अब सच लगने लगी है. लेखक-निर्देशक नाइट श्यामलन की फिल्म हैपनिंग की कहानी का सार ये है कि किस तरह धरती पर मौजूद पेड़ एक साथ मिलकर इंसानों के खिलाफ एक जंग छेड़ देते हैं . वो एक ऐसा ज़हर छोड़ना शुरू कर देते हैं जो आदमी के दिमाग में मौजूद वायरिंग को पूरी तरह बदल कर रख देता है.

पंकज रामेंदु | Aug 31, 2017, 11:01 AM IST
डियर जिंदगी :  जिंदगी को चिड़ियाघर बनने से बचाएं...

डियर जिंदगी : जिंदगी को चिड़ियाघर बनने से बचाएं...

उम्र कुछ भी हो... जिंदगी के नए मायने तलाशें. खुद को दूसरों के हिसाब से चलाना बंद करें. जिंदगी को चिड़ियाघर बनने से बचाएं. जहां उम्र गिनने के बदले भोजन मिलता है. जिंदगी प्रयोगशाला है. प्रयोग करें, आनंद में रहें. संग्रह को संतुलित करिए और तबियत को आजाद.

दयाशंकर मिश्र | Aug 30, 2017, 04:57 PM IST
राम रहीम और रामपाल के मामलों में सिस्टम क्यों फेल

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राम रहीम और रामपाल के अपराधों की परतें खुलने से सिस्टम और अदालती व्यवस्था पर लगे सवालिया निशान.

| Aug 29, 2017, 06:03 PM IST
डियर जिंदगी : बच्‍चे हमसे नाराज क्‍यों रहते हैं...

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आज हम बात कर रहे हैं कि बच्‍चों की नाराजगी को कैसे समझा जाए. उनके सवालों को कितनी संवदेना, समझदारी से सुलझाया जा सकता है.

दयाशंकर मिश्र | Aug 29, 2017, 02:45 PM IST
जलो मत बराबरी करो

जलो मत बराबरी करो

जयराम शुक्ल

| Aug 29, 2017, 10:49 AM IST
डियर जिंदगी : बच्‍चे हमसे हैं, हमारे लिए नहीं हैं...

डियर जिंदगी : बच्‍चे हमसे हैं, हमारे लिए नहीं हैं...

बच्‍चे कहते रहते हैं कि उन्‍हें समय चाहिए तो हमारा तर्क होता है कि समय के अलावा सबकुछ है. हम बच्‍चों को समय नहीं दे पाते क्‍योंकि समय की कटौती उनके हिस्‍से से ही होती है. उनके लिए सुविधा बढ़ाने के नाम पर होती है.

दयाशंकर मिश्र | Aug 28, 2017, 05:47 PM IST
बधाई देने वाले अपनी बेटी को सिंधु बनने की आज़ादी देंगे ?

बधाई देने वाले अपनी बेटी को सिंधु बनने की आज़ादी देंगे ?

निदा रहमान

सायना नेहवाल और पीवी सिंधु हमारी चैंपियन हैं, वो हमारे देश की बेटियों के लिए मिसाल हैं, उनकी प्रेरणा हैं. वर्ल्ड बैडमिंटन चैंपियनशिप में सिंधु एक चैंपियन की तरह खेली और आखिर तक हार नहीं मानी. बेटियां जुझारू होती हैं, वो ज़िद्दी भी होती हैं, वो संघर्ष करती हैं. सिंधु भले ही जापान की नोजोमी ओकुहारा से हार गईं लेकिन उनकी हार में भी जीत है .

| Aug 28, 2017, 08:57 AM IST
धर्मगुरु, राजनीति और हिंसा के त्रिकोण से त्रस्त समाज में राज्य की भूमिका

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भारत विश्व-गुरु तभी बनेगा जब भारत में गुरु/संत/बाबा फिर से शंकराचार्य, बुद्ध, नानक और कबीर के जैसा आचरण और व्यक्तित्व रखेंगे जिन्होंने समाज में फैले अज्ञान के अंधियारे को अपने ज्ञान और शिक्षा से प्रकाशित किया.

| Aug 27, 2017, 04:54 PM IST
भाजपा और कांग्रेस की 'स्वॉट एनालिसिस'

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आधुनिक प्रौद्योगिकी में किसी परियोजना के विभिन्न चरणों का साफ़ साफ़ ब्योरा होता है. सबसे पहले जो सोच विचार होता है उसके लिए हर प्रतिष्ठान अपना विश्लेषण करवाता है. इस विश्लेषण का नाम है स्वॉट एनालिसिस. 

| Aug 27, 2017, 12:14 AM IST
‘मैसेंजर ऑफ गॉड’ नहीं ‘गाइड’ बनना जरूरी है

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खास बात ये है कि उस खत में उसने इस बात का ज़िक्र किया था कि किस तरह उसके घरवाले जो बाबा के अंधभक्त हैं वो उसकी एक बात सुनना नहीं चाहते हैं.

| Aug 26, 2017, 01:48 PM IST
बहादुर साध्वी और पत्रकार को सलाम

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खत के आखिरी हिस्से में साध्वी लिखती है कि इन सब लड़कियों के साथ-साथ मुझे भी मेरे परिवार के साथ मार दिया जाएगा, अगर मैं इसमें अपना नाम लिखूंगी...

| Aug 26, 2017, 01:32 PM IST