ज़ी स्पेशल

डियर जिंदगी : कैसे बनते हैं 'मन'

डियर जिंदगी : कैसे बनते हैं 'मन'

हम जैसे हैं, उसके पीछे सबसे बड़ी भूमिका अंतर्मन की है. जिन चीजों से हमारे अंतर्मन का निर्माण होता है, उनके स्‍वाद, रुचि और प्रभाव हमारे मन पर न पड़ें यह संभव नहीं है. 

दयाशंकर मिश्र | मई 25, 2018, 07:55 AM IST
कर्नाटक में कसौटी पर कांग्रेस-जेडीएस गठबंधन

कर्नाटक में कसौटी पर कांग्रेस-जेडीएस गठबंधन

राजनीतिक स्थिरता के नाम पर यह किसी व्यक्ति या पार्टी की सत्ता को स्थिरता प्रदान करने की कोशिश है, लेकिन इसकी कीमत लोकतांत्रिक चेतना को चुकानी पड़ती है. 

सत्येंद्र सिंह | मई 24, 2018, 10:30 PM IST

अन्य ज़ी स्पेशल

डियर जिंदगी : लोगों की मदद कब करनी चाहिए!

डियर जिंदगी : लोगों की मदद कब करनी चाहिए!

जब हम उभरते हुए खिलाडियों की मदद नहीं कर पा रहे हैं. तो शिक्षा और जिंदगी में उभरती हुई प्रतिभा की पहचान कहीं मुश्किल है. यही कारण है कि हम जीवन में सफल लोगों की जयकार में ही जुटे रहते हैं, न कि उनके लिए कुछ करने की कोशिश करते हैं जो मंजिल के सफर में हैं.

दयाशंकर मिश्र | Apr 6, 2018, 01:08 PM IST
डियर जिंदगी : छोटी-छोटी ‘चीजों’ की खूबसूरती…

डियर जिंदगी : छोटी-छोटी ‘चीजों’ की खूबसूरती…

मुंबई में एक कमाल की चीज दिखी, भोजन करते हुए दूसरे की चिंता, मैंने यहां बचे हुए भोजन के प्रति जो नजरिया देखा वह अगर भारत में अगर आधे लोग ही अपना लें तो हम बड़ी आबादी का पेटभर सकते हैं.

दयाशंकर मिश्र | Apr 5, 2018, 09:02 AM IST
SC-ST एक्ट : समझ-समझ की बात है

SC-ST एक्ट : समझ-समझ की बात है

हमारे देश में जब कोई कानून बनाया जाता है तो उसी वक्त से ये मान लिया जाता है कि इस कानून की सबको जानकारी होगी. लेकिन जागरुकता के लिए कोई प्रयास नहीं किया जाता है.

पंकज रामेंदु | Apr 5, 2018, 01:04 AM IST
Opinion : मूर्तियां बनाने-तोड़ने के दौर में याद रखनी होगी एक भारतीय आत्मा की इच्छा

Opinion : मूर्तियां बनाने-तोड़ने के दौर में याद रखनी होगी एक भारतीय आत्मा की इच्छा

एक सवाल के जवाब में पं. माखनलाल ने कहा था, 'सच पूछो तो गरीबी का व्रत लेकर ही प्रखर राष्ट्र सेवा सार्वजनिक सेवा की जा सकती है, यह सुधार समझौते वाली मुझको भाती नहीं ठिठोली.'

लोक गायिका शारदा सिन्हा के साथ कुछ दूर... कुछ देर : यह परंपरा में स्त्रियों का समय है...

लोक गायिका शारदा सिन्हा के साथ कुछ दूर... कुछ देर : यह परंपरा में स्त्रियों का समय है...

शारदा सिन्हा का कहना है कि लोकगीत हमारे पुरखों की देन हैं जिनमें हर इंसान को अपने सुख-दुख की आवाज सुनाई देती है. यह हमारी तहजीब की रखवाली करने वाला वो अस्त्र है जिससे हर मुश्किल पार की जा सकती है.

विनय उपाध्याय | Apr 4, 2018, 01:48 PM IST
डियर जिंदगी: कितने कृतज्ञ हैं हम...

डियर जिंदगी: कितने कृतज्ञ हैं हम...

जिंदगी एक मेला है. जिसमें बहुरंग, विविधता के इतने आयाम हैं कि इंद्रधनुष की छटा उसके आगे फीकी पड़ जाए. हमें इन रंगों के साथ न केवल तालमेल सीखना है, बल्कि यह भी सीखना है कि हर रंग के साथ कैसे जीना है. जैसे इंद्रधनुष हमारी जिंदगी में हैं, वैसे सबकी जिंदगी में हैं.

दयाशंकर मिश्र | Apr 4, 2018, 07:11 AM IST
आय के स्रोत का ब्यौरा स्थापित करेगा चुनावी पारदर्शिता

आय के स्रोत का ब्यौरा स्थापित करेगा चुनावी पारदर्शिता

सुप्रीम कोर्ट के निदेश के आलोक में ऐसे उम्मीदवारों के नामांकन को अवैध घोषित कर चुनाव लड़ने हेतु निरर्ह घोषित किया जा सकेगा जो अपने आश्रितों की संपत्ति एवं आय के स्रोत का उल्लेख नामांकन में नहीं करते है. 

कपिल शर्मा | Apr 3, 2018, 04:57 PM IST
इनके ही लहू से सियासत सुर्ख दिखती है

इनके ही लहू से सियासत सुर्ख दिखती है

देश में दो ऐसे कानून हैं पहला तो यही एट्रोसिटी एक्ट और दूसरा दहेज प्रताड़ना का कानून, जिसके दुरुपयोग ने सामाजिक समरसता और घर-परिवार के तानेबाने को सबसे अधिक तबाह किया है. 

जयराम शुक्ल | Apr 3, 2018, 02:09 PM IST
डियर जिंदगी : बस 'मन' बदल गया है...

डियर जिंदगी : बस 'मन' बदल गया है...

हम पर अपने परिवार,समाज और बच्‍चों को बचाने, उन्‍हें नई दुनिया के लिए तैयार करने की जिम्‍मेदारी है. लेकिन हम हैं कि अपनी ही दुनिया के रंग में रंगे हैं. हमारा दुख तो गहरा है, जबकि बाकी दुनिया चैन की नाव पर सवार है. यह अहसास हमारी समूची विचार प्रक्रिया को तहस नहस किए हुए है.

दयाशंकर मिश्र | Apr 3, 2018, 01:33 PM IST
 एससी-एसटी एक्टः परवान चढ़ती दबाव की राजनीति

एससी-एसटी एक्टः परवान चढ़ती दबाव की राजनीति

समय के साथ दलित समुदाय ने शासन और समाज के विभिन्न हिस्सों में अपनी दखल बढ़ाई है. उनकी सत्ता की चाह ने गैर-दलितों के साथ संघर्ष को जन्म दिया है. यह गैर-दलितों के वर्चस्व को तोड़ने या चुनौती देने की कहानी है. इसलिए आज के दलित को 30 साल पूर्व वाला दीन-हीन दलित नहीं माना जा सकता.

सत्येंद्र सिंह | Apr 3, 2018, 01:29 PM IST
धन्यता के गीत गाती आवाज़ें

धन्यता के गीत गाती आवाज़ें

सौन्दर्य के सितार पर सद्भाव का संगीत हैं. विकृति के बाज़ार में संस्कृति का शंखनाद हैं. संत प्यार की पेढ़ी पर परमात्मा की प्रार्थना है. वे सदाचरण के आशीष हैं. जागरण के ताबीज हैं. 

विनय उपाध्याय | Apr 2, 2018, 02:23 PM IST
यादों में पं. ओमप्रकाश चौरसिया : अदम्य जिजीविषा की मिसाल

यादों में पं. ओमप्रकाश चौरसिया : अदम्य जिजीविषा की मिसाल

चौरसिया की पहचान एक संतूरवादक और कंपोजर की रही. उनके अकादमिक कार्यों की अलग श्रृंखला है लेकिन इस मसरूफियत के बीच नाट्य संगीत की ओर भी उनका रुझान रहा.

विनय उपाध्याय | Apr 2, 2018, 01:41 PM IST
डियर जिंदगी : नाराजगी के बिना सपने पूरे नहीं होते...

डियर जिंदगी : नाराजगी के बिना सपने पूरे नहीं होते...

मुश्किलों को राई बनाइए और जिंदगी को कामयाबी का पहाड़. आपका इरादा पक्‍का है और हुनर में यकीन है तो लोगों की नाराजगी को उतना ही वजन देना चाहिए, जितना हम रास्ते के स्‍पीड ब्रेकर को देते हैं. 

दयाशंकर मिश्र | Apr 2, 2018, 09:04 AM IST
हम बुनियाद गढ़ने में ही तो गलती नहीं कर रहे

हम बुनियाद गढ़ने में ही तो गलती नहीं कर रहे

हाल ही में मध्यप्रदेश सरकार ने बच्चों का तनाव कम करने, अवसाद से बचाने और आत्महत्या की प्रवृत्तियों को रोकने के लिए एक समिति का गठन किया गया है. 

बॉल टेंपरिंग : क्या माफी का ऐसा दुर्लभ रूप देखा है?

बॉल टेंपरिंग : क्या माफी का ऐसा दुर्लभ रूप देखा है?

मानव के बदलते व्यवहार के दौर में ईमानदारी से अपनी गलती मानकर माफी मांगने का हौसला भी खत्म होता दिखता है.

सुविज्ञा जैन | Apr 1, 2018, 11:40 PM IST
न्याय व्यवस्था में भी संरक्षण से वंचित बच्चे!

न्याय व्यवस्था में भी संरक्षण से वंचित बच्चे!

एक तरफ तो समाज की विकृतियां बच्चों को असुरक्षित बना रही हैं, तो वहीं दूसरी ओर न्याय व्यवस्था भी अपनी जरूरी भूमिका नहीं निभा रही है. 

सचिन कुमार जैन | Apr 1, 2018, 04:43 PM IST
तरक्‍की के झांझ-मंजीरे बाद में, पहले बीमार शिक्षा की फिक्र कर लें

तरक्‍की के झांझ-मंजीरे बाद में, पहले बीमार शिक्षा की फिक्र कर लें

क्‍यों सारी वेतन वृद्धियां, तरक्‍की आदि का एक व्‍यवस्थित ढांचा नहीं बनाया जाता जो सभी संवर्गों पर समान रूप से लागू हो? असमानता में जीत के मौके हैं, यह बनी रहेगी तो उपकृत कर अपना हित साधन होता रहेगा. लेकिन नीतियों का झोल केवल शासन स्‍तर पर नहीं है. 

पंकज शुक्ला | Apr 1, 2018, 03:28 PM IST
सोचिए और ऐसी मिसालों से सबक लीजिए

सोचिए और ऐसी मिसालों से सबक लीजिए

दूरदर्शन ने एक बहुत रोचक सीरियल आनंदी गोपाल का प्रसारण किया था, शायद इसलिए क्योंकि डेढ़ सौ साल पहले वह देश के लिए डॉक्टरी की डिग्री हासिल करने वाली पहली महिला डॉक्टर थीं.

खोखले वादों के विपरीत नर्मदा को सदा नीरा रखने के जन यत्‍न

खोखले वादों के विपरीत नर्मदा को सदा नीरा रखने के जन यत्‍न

ऐसे दौर में जब नर्मदा शायद सबसे ज्यादा संकट में है नीतिगत खामियों, लापरवाहियों और मुनाफे के लालच की शर्मसार करती कहानियों के विपरीत कुछ ऐसे किस्‍से भी हैं, जो आस जगाते हैं...

पंकज शुक्ला | Mar 31, 2018, 03:58 PM IST
बच्चे नहीं, समाज और व्यवस्था के विवेक का अपहरण हुआ है!

बच्चे नहीं, समाज और व्यवस्था के विवेक का अपहरण हुआ है!

भारत में बहुत तेज़ी से सामाजिक-पारिवारिक व्यवस्था के तहत बच्चों की सुरक्षा व्यवस्था कमज़ोर हो रही है. बच्चे घर और परिवार में भी अकेले होने लगे हैं. 

सचिन कुमार जैन | Mar 31, 2018, 02:30 PM IST