ज़ी स्पेशल

डियर जिंदगी : काश! माफ कर दिया होता...

डियर जिंदगी : काश! माफ कर दिया होता...

माफी न मिलना तो आपके बस में नहीं है, लेकिन माफ करना तो आपका अधिकार है! इससे खुद को वंचित मत रखिए!

दयाशंकर मिश्र | Dec 12, 2018, 08:52 AM IST
डियर जिंदगी: अप्रिय की जुगाली!

डियर जिंदगी: अप्रिय की जुगाली!

हम अप्रिय चीजों में ऐसे उलझे रहते हैं कि जीवन में तनाव, बुरी यादों का अनजाने में संग्रह करते रहते हैं. अप्रिय की जुगाली एक लत की तरह मन को अस्‍वस्‍थ, खोखला करती रहती है

 

दयाशंकर मिश्र | Dec 11, 2018, 08:31 AM IST

अन्य ज़ी स्पेशल

डियर जिंदगी : मन की गांठ!

डियर जिंदगी : मन की गांठ!

हमें उनके लिए जो हम पर निर्भर हैं, कहीं अधिक उदार होने की जरूरत है. जो सबल हैं, उनके प्रति स्‍नेह तो सहज, स्‍वाभाविक है.

दयाशंकर मिश्र | Oct 5, 2018, 09:39 AM IST
डियर जिंदगी : मीठे का ‘खारा’ होते जाना

डियर जिंदगी : मीठे का ‘खारा’ होते जाना

अकेलापन, केवल अकेले रहना नहीं है. यह तो उस संक्रामक विचार प्रक्रिया का ‘टिप ऑफ आइसबर्ग’ है, जो अपने साथ निराशा, दुख, ईर्ष्‍या और गहरी उदासी को साथ लिए चलता है.

दयाशंकर मिश्र | Oct 4, 2018, 09:20 AM IST
डियर जिंदगी : रिश्‍ते की ‘कस्‍तूरी’ और हमारी खोज!

डियर जिंदगी : रिश्‍ते की ‘कस्‍तूरी’ और हमारी खोज!

तय करिए कि हमारा स्‍नेह, प्रेम और आत्‍मीय उस मोबाइल, गैजेट्स के लिए है, जिसे हमने बनाया है या उनके लिए है, जिन्‍हें हमने बनाया है. जिनसे हम बने हैं!

दयाशंकर मिश्र | Oct 3, 2018, 09:10 AM IST
कृष्णा राजकपूर: जिन्होंने बालीवुड में घोली रीवा की संस्कृति की महक

कृष्णा राजकपूर: जिन्होंने बालीवुड में घोली रीवा की संस्कृति की महक

राजकपूर को ग्रेट शोमैन के रूप में गढ़ने का योगदान रीवा को है. कृष्णा कपूर यहीं जन्मी, पली, बढ़ीं और पढ़ी. इसी एक अक्टूबर को उनके निधन के बाद जो संस्मरण पढ़ने को मिल रहे हैं उनमें एक मूलस्वर यही है.

जयराम शुक्ल | Oct 2, 2018, 07:15 PM IST
#Gandhi150: गांधी के समाजवाद को किसने लगाया पलीता?

#Gandhi150: गांधी के समाजवाद को किसने लगाया पलीता?

यह समाजवाद के प्रति गांधी की आस्था का ही नतीजा था कि उन्होंने अपना उत्तराधिकारी सरदार पटेल या राजेन्द्र प्रसाद के बजाय एक ‘समाजवादी’ जवाहरलाल नेहरू को बनाया. गांधी को लगता था कि नेहरू की समाजवाद में आस्था वास्तविक है.

सत्येंद्र सिंह | Oct 2, 2018, 01:09 PM IST
#Gandhi150: वर्तमान के आकाश पर जगमगाता भविष्य का सुनहरा तारा

#Gandhi150: वर्तमान के आकाश पर जगमगाता भविष्य का सुनहरा तारा

निश्चित रूप से गांधीजी का मूल्यांकन होना अभी बाकी है. जैसे-जैसे समय आगे बढ़ता जाएगा, गांधी की चमक निश्चित रूप से निखरती चली जाएगी.

डॉ. विजय अग्रवाल | Oct 2, 2018, 12:49 PM IST
#Gandhi150: गांधी जयंती का उत्सव तो ठीक है, उनका अनुकरण करना जरूरी

#Gandhi150: गांधी जयंती का उत्सव तो ठीक है, उनका अनुकरण करना जरूरी

चाहे बात रही हो स्वच्छता की, या ग्राम रोज़गार की, या अस्पृश्यता दूर करने की; सांप्रदायिक सद्भाव की या रूढ़िवाद के विरुद्ध जागरूकता की – गांधीजी ने तो जीवन और समाज के सभी महत्वपूर्ण पहलुओं पर लोगों को एक रास्ता दिखने की कोशिश की थी. उनका अपना जीवन भी ऐसी बुराइयों के खिलाफ शांतिपूर्ण आन्दोलन चलाते बीता.

रतनमणि लाल | Oct 2, 2018, 11:33 AM IST
#Gandhi150: बीसवीं सदी के दो ही अविष्कार हैं महात्मा गाँधी और परमाणु बम

#Gandhi150: बीसवीं सदी के दो ही अविष्कार हैं महात्मा गाँधी और परमाणु बम

ऐसे अनेक उदाहरण हमें मिलते हैं, जिसमें गांधीजी ने अपने कदम वापस खीचे हैं और उसके युगांतरकारी परिणाम सामने आये हैं. इसका सर्वश्रेष्ठ उदाहरण चौरा-चौरी कांड के बाद आन्दोलन का वापस ले लिया जाना है. यहाँ वे स्वीकारते हैं कि भारत अभी उनकी तरह से स्वतंत्रता पाने के लायक नहीं बन पाया है. 

चिन्मय मिश्र | Oct 2, 2018, 09:33 AM IST
महात्मा गांधी: भारत तभी आजाद होगा जब उसके एक-एक आदमी का डर खत्म हो जाएगा

महात्मा गांधी: भारत तभी आजाद होगा जब उसके एक-एक आदमी का डर खत्म हो जाएगा

गांधी को मृत्यु का भय नहीं था. क्योंकि वह आजाद हिंदुस्तान में भी आजादी की लड़ाई लड़ रहे थे. गांधी के लिए आजादी का मतलब सिर्फ अंग्रेजों से आजादी नहीं था, उनका मतलब था मनुष्य की मुक्ति. अपने पूरे जीवन गांधी समझाते रहे कि मनुष्य डर की गुलामी में जीता है.

पीयूष बबेले | Oct 2, 2018, 08:47 AM IST
डियर जिंदगी : खुद को कितना जानते हैं!

डियर जिंदगी : खुद को कितना जानते हैं!

हमें दुनिया को जानने के मिशन, दावों पर निकलने से पहले अपने बारे में निश्‍चित होने की जरूरत है. हमारे सुख, प्रसन्‍नता, ‘जीवन -आनंद’ के सारे रास्‍ते यहीं से होकर जाते हैं.

 

दयाशंकर मिश्र | Oct 2, 2018, 07:47 AM IST
जब सिनेमा की 'बिकाऊ' महिलाएं अपने 'खरीददारों' का नाम बताती हैं, तो हम सुन क्‍यों नहीं पाते?

जब सिनेमा की 'बिकाऊ' महिलाएं अपने 'खरीददारों' का नाम बताती हैं, तो हम सुन क्‍यों नहीं पाते?

जिन फिल्‍मी महिलाओं पर हम बड़ी आसानी से 'बिकाऊ' होने का टैग लगा देते हैं, वहीं महिला जब ये सच नंगा कर देती है कि आखिर उसे 'खरीदने' की कीमत किसने दी तो हम उस 'खरीददार मर्द' पर शक क्‍यों नहीं कर पाते?

दीपिका शर्मा | Oct 1, 2018, 06:52 PM IST
सुप्रीम कोर्ट के नये चीफ जस्टिस- बदलाव का एक्शन प्लान

सुप्रीम कोर्ट के नये चीफ जस्टिस- बदलाव का एक्शन प्लान

निष्पक्ष, तार्किक, सख्त और ईमानदार होने के कारण न्यायिक व्यवस्था के मुखिया के तौर पर 13 महीने के संक्षिप्त कार्यकाल के बावजूद जस्टिस गोगोई कई अहम बदलाव ला सकते हैं.

विराग गुप्ता | Oct 1, 2018, 04:07 PM IST
डियर जिंदगी : ‘पहले हम पापा के साथ रहते थे, अब पापा हमारे साथ रहते हैं…’

डियर जिंदगी : ‘पहले हम पापा के साथ रहते थे, अब पापा हमारे साथ रहते हैं…’

वह सभी रिश्‍ते जिनसे हमारा ‘कुटुंब’ बनता है, माता-पिता जितने ही मूल्‍यवान हैं. बच्‍चों की शिक्षा जरूरी है, लेकिन अगर उस शिक्षा में मूल्‍य नहीं हैं, मनुष्‍य की कद्र, रिश्‍तों की ऊष्‍मा नहीं है, तो बच्‍चा ‘मशीन‘ बनेगा, मनुष्‍य नहीं! मशीन प्रेम नहीं करती, बस वह प्रेम का भरम बनाए रखने वाली चीजें बनाती है.

दयाशंकर मिश्र | Oct 1, 2018, 08:50 AM IST
जोधपुर की जेल डायरी

जोधपुर की जेल डायरी

जेल के बाहर एक रजिस्‍टर पड़ा है जिसमें नाम, पता, उम्र के अलावा जाति को लिखे जाने का भी प्रावधान है. अंग्रेजों के जमाने की वह परंपरा आज भी जारी है.

वर्तिका नंदा | Sep 30, 2018, 02:53 PM IST
आरक्षण पर एक आदर्शवादी इंतजार!

आरक्षण पर एक आदर्शवादी इंतजार!

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ ने अभी दिल्ली में तीन दिनों के एक अत्‍यंत महत्वपूर्ण विचार-विमर्श कार्यक्रम का आयोजन किया था. इस आयोजन में संघ के प्रमुख मोहन भागवत ने वर्तमान की एक अत्‍यंत ज्‍वलंत समस्या आरक्षण को लेकर बहुत महत्वपूर्ण बात कही.

डॉ. विजय अग्रवाल | Sep 30, 2018, 10:39 AM IST
MP: सियासी रस्‍साकशी में अदालत नहीं बनी ‘पॉलीटिकल कोर्ट’

MP: सियासी रस्‍साकशी में अदालत नहीं बनी ‘पॉलीटिकल कोर्ट’

कांग्रेस और भाजपा नेताओं की याचिकाओं पर कोर्ट ने जांच प्रक्रिया आरंभ कर लोकतांत्रिक प्रक्रिया और न्‍यायपालिका के महत्‍व को रेखांकित करते हुए स्‍वयं को दूर कर लिया

पंकज शुक्ला | Sep 28, 2018, 03:25 PM IST
न्याय महोत्सव के बाद कितना बदल जाएगा देश

न्याय महोत्सव के बाद कितना बदल जाएगा देश

हां, यह बात जरूर देखनी होगी कि क्या वह वंचित तबका संपूर्ण रूप से इस न्याय महोत्सव का जश्न मना पाएगा या नहीं.

पीयूष बबेले | Sep 28, 2018, 01:22 PM IST
डियर जिंदगी : कह दीजिए, मन में रखा बेकार है…

डियर जिंदगी : कह दीजिए, मन में रखा बेकार है…

कुछ अनकहा मत रखिए, इससे रिश्‍ते सुंदर, स्‍वस्‍थ और मन हल्‍का रहेगा!

दयाशंकर मिश्र | Sep 28, 2018, 08:36 AM IST
''जा पर विपदा परत है ते आवहिं एहि देस''

''जा पर विपदा परत है ते आवहिं एहि देस''

राजनीतिक रूप से चित्रकूट की महत्ता और भी ही. भाजपा के विपदा काल में यह उसकी शक्तिपीठ था. नानाजी देशमुख ने यहां दीनदयाल शोध संस्थान और ग्रामोदय विश्वविद्यालय की स्थापना की थी.

जयराम शुक्ल | Sep 27, 2018, 11:00 PM IST
मशीनीकरण हमारे लिए कितना माफिक?

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वर्ल्ड इकोनोमिक फोरम हर साल विश्व में रोजगार के भविष्य पर एक रिपोर्ट जारी करता है. इसमें आने वाले समय में रोजगार की संभावनाओं और चुनौतियों का लेखा जोखा दिया जाता है.

सुविज्ञा जैन | Sep 27, 2018, 09:50 PM IST

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