ज़ी स्पेशल

बात उठी एक आदिवासी गांव के संपूर्ण अध्ययन की

बात उठी एक आदिवासी गांव के संपूर्ण अध्ययन की

शोध पद्धति में केस स्टडी यानी वैयक्तिक अध्ययन और सांख्यिकीय अघ्ययन विधियां उपलब्ध हैं. सरकारों की रुचि सांख्यिकीय अध्ययन में होती है. देश की सरकार पौने सात लाख गांवों को एकसाथ देखना ज्यादा पसंद करती है. 

सुविज्ञा जैन | Apr 20, 2018, 09:02 PM IST
डियर जिंदगी: हिम्‍मत कहां से मिलेगी!

डियर जिंदगी: हिम्‍मत कहां से मिलेगी!

हम अपने सपने के लिए कितने पागल हैं, बच्‍चों की दिशा तय करने में यह पागलपन सबसे अधिक भूमिका निभाता है. इसमें योग्‍यता जितना ही यह जरूरी है कि आप कितना जोखिम उठाने के लिए तैयार हैं.

दयाशंकर मिश्र | Apr 20, 2018, 07:35 AM IST

अन्य ज़ी स्पेशल

सौंदर्य का मिथक और प्रेम

सौंदर्य का मिथक और प्रेम

प्रेम कहानियों से लड़कों के दिमाग में सुंदरता के कुछ प्रतिमान स्थापित हो जाते हैं, जैसे गोरा रंग, कजरारी आंखें, छरहरा कोमल बदन, लंबे बाल, तोते की चोंच जैसी नाक आदि-आदि. फिर वे इन्हीं की तलाश करने लगते हैं, जो कभी मिलते नहीं.

डॉ. विजय अग्रवाल | Feb 14, 2018, 02:12 PM IST
मसला बेरोज़गारी का (भाग दो) : कहां से सोचना शुरू हो बेरोज़गारी का समाधान

मसला बेरोज़गारी का (भाग दो) : कहां से सोचना शुरू हो बेरोज़गारी का समाधान

अभी अपने यहां व्यवस्थित यानी वैज्ञानिक ढंग से विमर्श का खाका बनाने का रिवाज़ नहीं है. चाहे कॉन्फ्रेंस हो या सेमिनार या वर्कशॉप सभी आयोजनों के लिए एक ही प्रकार का खाका बनता दिखता है. 

सुविज्ञा जैन | Feb 14, 2018, 01:48 PM IST
डियर जिंदगी: कह देना ठीक ही है!

डियर जिंदगी: कह देना ठीक ही है!

मन में भावना का संग्रह किसी के लिए शुभ नहीं. न जिसके मन में है, उसके लिए और न जिसके प्रति है, उसके लिए. इसलिए अपनी बात कहिए. संपूर्ण प्रेम, स्‍नेह और आत्‍मीयता से कहिए. कहना हमेशा न कहे से भला होता है.

दयाशंकर मिश्र | Feb 13, 2018, 02:42 PM IST
किसी को चाहने का मतलब है, उसके संपूर्ण अस्तित्व को स्वीकारना

किसी को चाहने का मतलब है, उसके संपूर्ण अस्तित्व को स्वीकारना

जब आप किसी से प्रेम करते हैं, तो वह इतनी बड़ी बात नहीं होती, जितनी बड़ी बात यह होती है कि कोई आपसे प्रेम कर रहा है. यह एक अद्भुत अनुभव होता है. यह सोच कि 'कोई मुझसे प्रेम कर रहा है', व्यक्ति के अंदर अपने अस्तित्व के प्रति एक बहुत बड़ा आत्मविश्वास पैदा कर देती है. 

डॉ. विजय अग्रवाल | Feb 13, 2018, 01:45 PM IST
असमां जहांगीर : शांतिदूत जिसने पाकिस्तानी ही नहीं भारतीयों के लिए भी किया संघर्ष

असमां जहांगीर : शांतिदूत जिसने पाकिस्तानी ही नहीं भारतीयों के लिए भी किया संघर्ष

असमां पाकिस्तानी सेना की आंख की किरकिरी बनीं रहीं. इसलिए उन्हें कई बार जान से मारने की कोशिश की गई. भारतीय नागरिक कुलभूषण जाधव के मुद्दे पर तो असमां ने पाकिस्तानी हुकूमत तक को आड़े हाथों ले लिया था.

निदा रहमान | Feb 13, 2018, 01:00 PM IST
डियर जिंदगी: सवालों के 'जंगल' में खोए जवाब

डियर जिंदगी: सवालों के 'जंगल' में खोए जवाब

हम जिन सपनों के साथ जिंदगी की दौड़ में शामिल होते हैं. अक्‍सर दौड़ के बीच तक पहुंचते ही हम उनको छोड़कर उस सपने की ओर दौड़ जाते हैं, जिस ओर हमारा पड़ोसी, दोस्‍त और कोई ऐसा दौड़ रहा होता है, जिस पर हमें भरोसा हो.

दयाशंकर मिश्र | Feb 12, 2018, 07:45 PM IST
इस ख़ामोशी का खामियाज़ा सबको भुगतना पड़ेगा!

इस ख़ामोशी का खामियाज़ा सबको भुगतना पड़ेगा!

देश में लगातार ऐसी घटनाएं, वारदातें हो रही हैं जो बेचैन कर रही हैं. बेचैनी लोगों की मुर्दा शांति से भर जाने की है. बेचैनी लोगों के तमाशबीन हो जाने की है. बेचैनी हमारे आपके खामोश रहने की है.

निदा रहमान | Feb 12, 2018, 01:30 PM IST
पीएम मोदी की ‘डी हाइफनेशन’ नीति दर्शाता फिलिस्तीन दौरा

पीएम मोदी की ‘डी हाइफनेशन’ नीति दर्शाता फिलिस्तीन दौरा

सबसे अधिक चर्चा मोदी के फिलिस्तीन दौरे की रही, जिसको भारत में ही नहीं, बल्कि पूरी दुनिया में बड़े गौर से देखा गया. उनका फिलिस्तीन दौरा ऐसे समय में हुआ जब भारत का सबंध फिलिस्तीन के सबसे बड़े विरोधी माने जाने वाले इजराइल के साथ सबसे मजबूत स्तर पर है और एक तरह से अपने ‘स्वर्णिम युग’ में भी चल रहा है.

पवन चौरसिया | Feb 10, 2018, 04:06 PM IST
मसला बेरोज़गारी का (भाग एक) : क्या आपातकालिक समस्या बन गई है बेरोज़गारी?

मसला बेरोज़गारी का (भाग एक) : क्या आपातकालिक समस्या बन गई है बेरोज़गारी?

जब सरकारी आंकड़े उपलब्ध ही न हों तो इसका अलावा क्या चारा है कि गैरसरकारी अनुमान लगाए जाएं. सामाजिक क्षेत्र में काम करने वाले लोग बेरोज़गारी के आकार का अंदाजा लगाते रहते हैं और देश में मोटे तौर पर पर 10 से 15 करोड़ बेरोज़गारों का अनुमान लगाते हैं

सुविज्ञा जैन | Feb 10, 2018, 03:49 PM IST
Opinion : वन अधिकार पर व्यवस्था का आघात

Opinion : वन अधिकार पर व्यवस्था का आघात

सच तो यह है कि वन विभाग वन अधिकार के कानून को अपने प्रभुत्व और सत्ता के लिए चुनौती के रूप में देखता है. इस कानून के बनने की प्रक्रिया के दौरान और इसके बन जाने के बाद भी वनविभाग विशेषज्ञों ने हरसंभव प्रयास किया कि इसे खत्म या कमजोर किया जा सके.

सचिन कुमार जैन | Feb 9, 2018, 02:07 PM IST
पीरियड्स : विषय जो इतना अनछुआ रहा कि आज अक्षय कुमार को पैड पहनकर बताना पड़ा...

पीरियड्स : विषय जो इतना अनछुआ रहा कि आज अक्षय कुमार को पैड पहनकर बताना पड़ा...

काश! हर पिता अनिल कपूर की तरह बेटी के भविष्य के प्रति सजग होता और हर पति अक्षय जैसा बावला. उम्मीद करते हैं पैडमैन गांव-गलियारों के चौबारों में पहुंचकर बड़े बदलाव का वाहक बने.

डॉ. मीना शर्मा | Feb 9, 2018, 01:22 PM IST
डियर जिंदगी: आत्‍मीयता कहां है…

डियर जिंदगी: आत्‍मीयता कहां है…

नदी कितनी भी विशाल, सदाबहार क्‍यों न हो, उसमें ज्‍यादा तटबंध उसके पानी, गति को सोख लेते हैं. वह कुछ बरसों में थकने, थमने लगती है. प्रेम का भी ऐसा ही रिश्‍ता जीवन से है.

दयाशंकर मिश्र | Feb 9, 2018, 11:38 AM IST
निदा फाज़ली-जगजीत सिंह की याद में : छोटा करके देखिये जीवन का विस्तार...

निदा फाज़ली-जगजीत सिंह की याद में : छोटा करके देखिये जीवन का विस्तार...

निदा फाज़ली की गज़लों और जगजीत सिंह की आवाज़ का साथ अनूठा रहा. ऐसा लगता है जैसे दोनों एक ही फलसफे पर भरोसा करने वाला शख्स रहे हों.

पंकज रामेंदु | Feb 8, 2018, 05:59 PM IST
डियर जिंदगी: ‘असहमति’ के बीच आनंद सूत्र!

डियर जिंदगी: ‘असहमति’ के बीच आनंद सूत्र!

ऑफिस के द्वंद्व कब तक घर से दूर रहेंगे. रहेंगे तो कैसे रहेंगे. वहां के संकट हम पर चौबीस घंटे हावी न रहें, इसके लिए दोनों जीवन के बीच संतुलन के प्रयास तेज करने होंगे.

दयाशंकर मिश्र | Feb 8, 2018, 11:47 AM IST
अज़ीम शायर निदा फाज़ली : कहीं सपना ज़िंदा है...

अज़ीम शायर निदा फाज़ली : कहीं सपना ज़िंदा है...

राजनीति की रणभूमि पर चल रहे दांव-पेंच के खेल को भी इस अज़ीम शायर ने महसूस किया. कहा, ‘हमारे यहां ये क्यों हो रहा है? कैसे हो रहा है? किसके लिए हो रहा है? इन सवालों का एक ही जवाब है- इलेक्शन

विनय उपाध्याय | Feb 8, 2018, 11:22 AM IST
Opinion : क्या ‘शिक्षा बनाम रोजगार’ की लड़ाई लड़ रहे हैं यह याचिकाकर्ता?

Opinion : क्या ‘शिक्षा बनाम रोजगार’ की लड़ाई लड़ रहे हैं यह याचिकाकर्ता?

जिस देश में अस्सी प्रतिशत से भी अधिक छात्र और छात्राएं मध्यमवर्गीय या निम्नवर्गीय परिवारों से आते हों, वहां पर जल्द से जल्द नौकरी प्राप्त करने का भारी दबाव रहता है...

पवन चौरसिया | Feb 7, 2018, 07:13 PM IST
Valentine's Day : डर के आगे प्यार है...

Valentine's Day : डर के आगे प्यार है...

हमारे समाज में प्रेम को ऐसा वर्जित कार्य बना दिया गया है कि यह किसी भी रूप में स्वीकार्य नहीं होता है.

पंकज रामेंदु | Feb 7, 2018, 05:41 PM IST
डियर जिंदगी: हमारा ‘रिमोट’ किसके पास है!

डियर जिंदगी: हमारा ‘रिमोट’ किसके पास है!

हम भारतीय संवाद से अधिक गुस्‍से की ओर बढ़ रहे हैं. पहले संयुक्‍त परिवार, उसके बाद अब एकल परिवार और अब एकल के बाद ‘सेल्‍फ’. यानी मैं. मैं यानी ऐसी दुनिया जिसमें दूसरे के लिए कोई जगह नहीं.

दयाशंकर मिश्र | Feb 7, 2018, 04:07 PM IST
...चलो चाय के बाद आखिरकार 'पकौड़ा' भी सियासत के काम आया

...चलो चाय के बाद आखिरकार 'पकौड़ा' भी सियासत के काम आया

यदि भारत में पकौड़ा इस वक्‍त सियासत का हॉट टॉपिक है तो इसी तर्ज पर पड़ोसी पाकिस्‍तान में समोसा भी चर्चा में रहा है.

अतुल चतुर्वेदी | Feb 6, 2018, 02:13 PM IST
डियर जिंदगी: आप स्‍वार्थी नहीं हैं!

डियर जिंदगी: आप स्‍वार्थी नहीं हैं!

जैसे ही हम किसी को स्‍वार्थी कहते हैं, वह तिलमिला उठता है. उसे गुस्‍सा आ जाता है. वैसे गुस्‍से के बारे में यह समझना जरूरी है कि यह अक्‍सर आता नहीं, लाया जाता है. अधिकांश खुद को गलत साबित होने से बचाने के फेर में.

दयाशंकर मिश्र | Feb 6, 2018, 01:10 PM IST