ज़ी स्पेशल

'माफ करो महाराज! हमारा नेता शिवराज'

'माफ करो महाराज! हमारा नेता शिवराज'

अखबारों की पूरी विज्ञापन सीरीज भी शिवराज सिंह चौहान के व्यक्तित्व को केंद्र में रखकर रची गई है. विज्ञापन की टैग लाइन है-माफ करो महाराज! हमारा नेता शिवराज.

संतोष मानव | Nov 18, 2018, 02:48 PM IST
फिल्म उद्योग की “ऑक्सीजन” फिल्में

फिल्म उद्योग की “ऑक्सीजन” फिल्में

अंग्रेजों के दौर पर बनी ‘ठग्स ऑफ हिन्दुस्तान’ ने दर्शकों को जितना अधिक निराश किया है, शायद ही अब तक किसी फिल्म ने किया हो.

डॉ. विजय अग्रवाल | Nov 16, 2018, 07:12 PM IST

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डियर जिंदगी: घर के भीतर प्रवेश करने की कला...

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प्रेम को पढ़ा तो हमने बहुत, लेकिन उसे ठहरकर जीना सरल नहीं है. इसे मन को समझाना होगा.

दयाशंकर मिश्र | Aug 30, 2018, 06:45 AM IST
डियर जिंदगी: दुख का आत्‍मा की 'काई' बन जाना...

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बाढ़ का पानी अगर शहर में एक बार घुस जाए तो आसानी से कहां निकलता है... और असली परेशानी तो पानी निकलने के बाद शुरू होती है!

दयाशंकर मिश्र | Aug 29, 2018, 07:50 AM IST
हम भीड़तंत्र की ओर बढ़ रहे हैं, खामोशी से नहीं, ढोल-नगाड़ों के साथ

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भारत में भीड़तंत्र अपने आप स्थापित नहीं हो रहा है, उसे स्थापित किया जा रहा है. जरा गौर से देखिए, भीड़ केवल महिला को निर्वस्त्र करके सड़क पर दौड़ाती ही नहीं है, बल्कि उसकी फोटो खींचती है, वीडियो बनाती है और सोशल मीडिया पर गर्व से अपनी पहचान के साथ निडर होकर साझा करती है.

सचिन कुमार जैन | Aug 28, 2018, 02:51 PM IST
Opinion: सिंधु की हार, हार नहीं होती...

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एशियाड के बैडमिंटन फाइनल में एक बार फिर पीवी सिंधु हार गईं. इससे पहले उनकी सबसे मशहूर हार ओलंपिक के फाइनल में हुई थी. दोनों ही बार वे दुनिया की एक नंबर खिलाड़ी से हारीं.

पीयूष बबेले | Aug 28, 2018, 02:38 PM IST
डियर जिंदगी: साथ छूटने से ‘बाहर’ आना…

डियर जिंदगी: साथ छूटने से ‘बाहर’ आना…

कुछ लोग उम्र, रिश्‍तों के ‘खास’ मोड़ पर एक-दूसरे का साथ छूट जाने से इतने दुखी, व्‍याकुल और उदास हो जाते हैं कि जिंदगी का मूल्‍य उसके सदके कर देते हैं. यह प्रेम नहीं जीवन के प्रति कृतज्ञता के भाव की कमी है.

दयाशंकर मिश्र | Aug 28, 2018, 07:38 AM IST
कांग्रेस में क्यों बढ़ रही है आरएसएस की दिलचस्पी

कांग्रेस में क्यों बढ़ रही है आरएसएस की दिलचस्पी

हाल के समय में कांग्रेस के प्रति संघ का यह नए किस्म का आकर्षण है. वैसे अतीत में महात्मा गांधी और राष्ट्रपति बनने से पहले सर्वपल्ली राधाकृष्णन भी संघ के कार्यक्रम में शामिल हो चुके हैं.

पीयूष बबेले | Aug 27, 2018, 04:59 PM IST
अटलजी और गठबंधन धर्म: लोकतंत्र 51 बनाम 49 का खेल नहीं

अटलजी और गठबंधन धर्म: लोकतंत्र 51 बनाम 49 का खेल नहीं

अटलजी ने लिखा है, "मैं इस विचार से सहमत नहीं हूं कि छोटे दल लोकतंत्र की प्रगति में बाधा हैं. छोटे दलों की अपेक्षाओं को राष्ट्रीय स्तर पर पर्याप्त महत्व दिया जाना चाहिए.'

जयराम शुक्ल | Aug 27, 2018, 01:49 PM IST
मधुशाला के परे: यहां लगता है कोई छोड़ गया है उर की गहरी पीर...

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मधुशाला लोकप्रिय क्यों हुई? क्या काव्य के अंतर्निहित गुण के कारण? अगर कभी कोई समाज-विज्ञानी इस पर शोध करे और विश्लेषण करे तो बड़े ही रुचिकर निष्कर्ष निकलेंगे.

आलोक श्रीवास्तव | Aug 27, 2018, 01:09 PM IST
डियर जिंदगी : ‘मन’ की ओर से इतनी बेरुखी क्‍यों…

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हम खुद का ‘रिव्‍यू’ करने से बहुत दूर हैं. जो चीजें, रिश्‍ते हमें रात-दिन चुभते र‍हते हैं, उनके बारे में ‘दो टूक’ निर्णय लेने की जगह हम सारी उम्र उनके आसपास भटकते हुए गुजार देते हैं.

दयाशंकर मिश्र | Aug 27, 2018, 07:50 AM IST
कितनी यादगार होंगी अटल घोषणाएं, योजनाएं या स्मारक?

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इसमें कोई शक नहीं है कि वाजपेयी देश के उन कुछ राजनीतिक नेताओं में हैं जिनकी लोकप्रियता दलों की सीमाओं से बंधी नहीं है. 

रतनमणि लाल | Aug 24, 2018, 07:30 PM IST
आरसीईपी - मुनाफे के व्यापार के सामने कहीं देश हार न जाए!

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23 जुलाई 2018 को लोकसभा में वाणिज्य और उद्योग राज्य मंत्री ने एक प्रश्न के जवाब में जो बताया, वह भारत की अदूरदर्शिता का परिचायक है. 

सचिन कुमार जैन | Aug 24, 2018, 06:55 PM IST
अदालतों में कोर्ट मैनेजर से सेवाएं लेने में क्या कठिनाइयां आएंगी... (भाग- 2)

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किसी भी संगठन या प्रणाली के सिर्फ एक क्षेत्र को पेशेवर रूप से व्यवस्थित नहीं किया जा सकता. पूरी व्यवस्था में सुधार प्रक्रिया एक साथ शुरू किए बिना अपेक्षित परिणाम मिलना मुश्किल है.

सुविज्ञा जैन | Aug 24, 2018, 02:10 PM IST
केरल बाढ़: क्या भगवान ही नाराज हैं? आखिर कौन जिम्मेदार है इस प्रलय के लिए...

केरल बाढ़: क्या भगवान ही नाराज हैं? आखिर कौन जिम्मेदार है इस प्रलय के लिए...

माधव गाडगिल कहते हैं, 'केरल की तबाही मानव निर्मित है. यदि ठीक समय पर उचित कदम उठाए गए होते तो इतना विनाश नहीं होता.' वे मानते हैं कि हम एक न्यायविहीन समाज में रह रहे हैं और लचर प्रशासन हमें संचालित कर रहा है.

चिन्मय मिश्र | Aug 24, 2018, 01:00 PM IST
डियर जिंदगी: कहां है सुख और सुखी कौन!

डियर जिंदगी: कहां है सुख और सुखी कौन!

सुख के अपने-अपने घोंसले हैं. किसी को बया की क्रिएटिविटी लुभाती है, तो कोई ‘चट्टानों’ के बीच चैन खोजता है. जैसे परीक्षा में ‘कम से कम’ नंबर लाना जरूरी होता है, वही फॉर्मूला दूसरों को सुख देने के बारे में हमें अपनाना होगा. 

दयाशंकर मिश्र | Aug 24, 2018, 08:07 AM IST
इमरान खान की सीमाएं

इमरान खान की सीमाएं

इमरान खान भारत से अच्छे रिश्तों की कामना भले ही प्रकट करते हों, लेकिन अपनी पहली ही टिप्पणी में उन्होंने पाकिस्तानी सेना के दृष्टिकोण को ही आगे बढ़ाया है, जो कश्मीर में जेहादी आतंकवाद को बढ़ावा दे रही है.

सत्येंद्र सिंह | Aug 23, 2018, 08:27 PM IST
अदालतों में तैनात होंगे कोर्ट मैनेजर तो कैसे बदलेगी न्याय की सूरत  (भाग-1)

अदालतों में तैनात होंगे कोर्ट मैनेजर तो कैसे बदलेगी न्याय की सूरत (भाग-1)

आठ साल पहले हाईकोर्ट में प्रबंधंकों की नियुक्तियों का काम शुरू भी हुआ था. लेकिन सार्वजनिक तौर पर ज्यादा पता नहीं चला कि हो क्या रहा है. 

सुविज्ञा जैन | Aug 23, 2018, 06:38 PM IST
खुशियों का पीरियड

खुशियों का पीरियड

दरअसल, ज़रूरत शिक्षा में सहजता की है. जिस देश में गुरू पहले शिक्षक बने और फिर वो संविदा शिक्षक हो गए, वहां पर नौकरी ही की जा रही है. जबकि शिक्षा देना कोई नौकरी नहीं है. 

पंकज रामेंदु | Aug 23, 2018, 02:13 PM IST
श्रद्धांजलि कुलदीप नैयर: कलम के बिकने से भी खतरनाक है, उसका किसी के हाथों में खेल जाना

श्रद्धांजलि कुलदीप नैयर: कलम के बिकने से भी खतरनाक है, उसका किसी के हाथों में खेल जाना

हमें बराबर देखना चाहिए कि हमारा या हमारी कलम का कोई इस्तेमाल तो नहीं कर रहा है. अगर कलम जनता और लोकतंत्र के लिए है तब तो ठीक है, लेकिन अगर वह किसी की आरती का दीया या किसी की पीठ का खंजर है तो बहुत खतरनाक है.

पीयूष बबेले | Aug 23, 2018, 02:00 PM IST
डियर जिंदगी : बच्‍चों को कितना स्‍नेह चाहिए!

डियर जिंदगी : बच्‍चों को कितना स्‍नेह चाहिए!

हम बच्‍चे के लिए बहुत अधिक जुटाने के फेर में उसे बहुत अधिक अकेला छोड़ रहे हैं. उसके अंदर का अकेलापन उसे रूखा बना रहा है. कठोर, जिद्दी और रेत की तरह स्‍नेह से दूर.

दयाशंकर मिश्र | Aug 23, 2018, 08:03 AM IST
जीते जी सम्मानों से बहुत परहेज करते थे अटल जी

जीते जी सम्मानों से बहुत परहेज करते थे अटल जी

वाजपेयी जी के जीवन पर आधारित पुस्तक ‘राष्ट्रवादी पत्रकारिता के शिखर पुरुष: अटल बिहार वाजपेयी’ का एक अंश.

सौरभ मालवीय | Aug 22, 2018, 07:17 PM IST

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