जून से शुरू होगी विराट कोहली की असली अग्निपरीक्षा

Last Updated: Tuesday, April 25, 2017 - 18:04
जून से शुरू होगी विराट कोहली की असली अग्निपरीक्षा
भारतीय क्रिकेट टीम को अगले सत्र में तीन अहम देशों के दौरे के लिए बाहर जाना है (PIC : IPL/BCCI)
Mridula Bhardwaj

नई दिल्ली : ''घर के शेर'' भारतीय क्रिकेट टीम के बारे में यह बात पुरजोर ढंग से कही जाती है और भारत ने बार-बार इस बात को सही भी साबित किया. विराट कोहली की अगुवाई में क्रिकेट का यह सीजन बेहद शानदार रहा है. भारत ने इंग्लैंड और ऑस्ट्रेलिया से सीरीज जीत कर नंबर वन की पोजिशन बनाए रखी, लेकिन अब हवा बदलने वाली है. 

भारतीय क्रिकेट टीम को अगले सत्र में तीन अहम देशों के दौरे के लिए बाहर जाना है. दक्षिण अफ्रीका, इंग्लैंड और ऑस्ट्रेलिया. भारतीय बल्लेबाजों की तकनीक, सहनशीलता और एकाग्रता की असली परीक्षा यहीं होनी है. विराट कोहली की कप्तानी भी इन्हीं देशों में परखी जाएगी. संयोग से टेस्ट क्रिकेट में कप्तान बनने के बाद विराट को अपने ही देश में अपने दर्शकों के बीच ही अधिक क्रिकेट खेलनी पड़ी है. जहां विराट और उनके शूरवीरों ने सफलता के झंडे गाड़े हैं. अब विराट और उनकी टीम को असली अग्निपरीक्षा से गुजरना होगा और यह साबित करना होगा कि वे घर पर ही नहीं, बाहर भी शेर हैं. 

क्रिकेट के अगले सत्र में भारतीय टीम, जनवरी-फरवरी में दक्षिण अफ्रीका, जुलाई अगस्त में इंग्लैंड और नवंबर दिसंबर में ऑस्ट्रेलिया का दौरा करेगी और यही वे दौरे होंगे जो टेस्ट क्रिकेट में भारत को नंबर एक की पोजिशन से हटाने का काम कर सकते हैं. यह कहने का लिए इतिहास भी भारत के पक्ष में नहीं है. 

दक्षिण अफ्रीका में भारत की जीत का प्रतिशत 0.25, इंग्लैंड में 0.2 और ऑस्ट्रेलिया में महज 0.178 प्रतिशत रहा है. ऐसे में भारतीय टीम का लिए टेस्ट मैच ड्रॉ कराना ही बड़ी खबर होगी. हां, यदि वे टेस्ट जीत लेते हैं तो यह किसी चमत्कार से कम नहीं होगा. बेशक लीडर के रूप में भारत के पास विराट कोहली हैं, जो मनचाहा रिजल्ट देने में सक्षम हैं. 

इन तीनों दौरों पर विराट की मानसिक मजबूती टीम को जीत की राह पर लाने की पूरी कोशिश करेगी. भारतीय टीम को दक्षिण अफ्रीका और ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ चार-चार टेस्ट मैच खेलने हैं जबकि इंग्लैंड में पांच टेस्ट मैच होंगे. 

इंग्लैंड, ऑस्ट्रेलिया और दक्षिण अफ्रीका का दौरा उस स्थिति में काफी डराने वाला साबित होता है, यदि भारतीय टीम का पास शानदार पेस बैटरी ना हो. सौभाग्य से इस समय भारतीय टीम में उमेश यादव, ईशांत शर्मा और मोहम्मद शमी के रूप में अच्छे तेज गेंदबाज हैं. हालांकि, उमेश यादव की लाइन में गड़बड़ी करने की पुरानी प्रवृत्ति है, जिसका कारण उनका असर खत्म हो जाता है. जबकि दूसरी तरफ बेहतरीन पेस और गेंद को रिवर्स स्विंग कराने की शमी की क्षमता गजब की है. 

ईशांत शर्मा के साथ भी यही दिक्कत है कि वह लगातार अच्छी लाइन और लेंथ पर गेंदबाजी नहीं कर पाते. देखा जाए तो उमेश यादव और मोहम्मद शमी के साथ-साथ भारत को भुवनेश्वर और ईशांत की जरूरत होगी. 

भुवनेश्वर और ईशांत दोनों ही तेज गेंदबाजी के एक अलग स्कूल से निकले हैं. इसलिए भारतीय चयनकर्ताओं को इनका चयन ध्यानपूर्वक करना होगा. तेज गेंजबाजों के मुकाबले स्पिन भारत का लिए अधिक चिंता की बात है. 

भारत में ट्रंप कार्ड रहे अश्विन इंग्लैंड और ऑस्ट्रेलिया में कभी भी एक पारी में पांच विकाट नहीं ले पाए हैं और दक्षिण अफ्रीका में तो उनका प्रदर्शन बेहद निराशाजनक रहा है. यह दीगर बात है कि अश्विन ने दक्षिण अफ्रीका में अपने शुरुआती मैच ही खेले हैं. 

विराट कोहली के कप्तान बनने का बाद अश्विन ने खुद को दोबारा इन्वेंट किया है. पिछले महीने ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ शानदार प्रदर्शन करने के बावजूद रविंद्र जडेजा पर अश्विन के मुकाबले कम प्रेशर होगा. लेकिन उनका चयन पिच के साथ-साथ इस बात पर भी निर्भर करेगा कि लेग स्पिनर अमित मिश्रा किस तरह का परफॉर्म करते हैं. 

ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ अच्छा प्रदर्शन करने वाले कुलदीप यादव भी भारतीय टीम में शामिल होने के दावेदार हो सकते हैं. यदि भारत को विदेशों में जीत हासिल करनी है तो शमी और यादव को सभी मैचों में अहम भूमिका निभानी होगी. 

जसप्रीत बुमराह और हार्दिक पांड्या का साथ भारतीय टीम को वन डे और टी-20 में भी यादव और शमी को मौका देना होगा. इसी तरह अश्विन और जडेजा की भी अहम भूमिका रहेगी. दोनों को लगातार विकेट निकालने होंगे. 

यही वह बिंदू होगा जहां चयनकर्ताओं के साथ-साथ कोच अनिल कुंबले और कप्तान विराट की भी अपनी अपनी भूमिका होगी. बीसीसीआई को यह कोशिश करनी चाहिए कि मुरली विजय, चेतेश्वर पुजारा, रिद्धिमान साहा जडेजा और आश्विन अपने अपने फोरमेट में खेलें. यह भी सच है कि भारत की बैटिंग में गहराई है. 

ऋद्धिमान साहा, आर अश्विन, रविंद्र जडेजा और जयंत यादव सभी टेस्ट मैचों में शतक बना चुके हैं. कोहली को भी ऑस्ट्रेलियन ग्राउंड बहुत रास आते हैं, लेकिन इंग्लैंड में कोहली का औसत 13.40 का ही है. 

ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ 2-1 से जीतने वाली भारतीय टीम ने यह भी दिखाया है कि विराट कोहल के रन न बनाने की स्थिति में भी भारतीय टीम जीत सकती है,  लेकिन विदेशों में ऐसा करना आसान नहीं होगा. इसका लिए एक अहम कारक हो सकता है पिच को सही ढंग से पढ़ पाना और इसका लिए कुंबले उपयुक्त व्यक्ति हो सकते हैं. 

विदेशी पिचों पर ही विराट की कप्तानी की भी अग्निपरीक्षा होगी. गेंदबाजी-बल्लेबाजी में बदलाब उन्हें विदेशी सरजमीं पर स्टार बना सकते हैं. प्रयोग करने की विराट की क्षमता विपक्षी टीम को चकित कर सकती है. लेकिन इन सभी सकारात्मक चीजों का बावजूद विराट और पूरी भारतीय टीम का लिए ये दौरे बेहद कठिन साबित होने जा रहे हैं, यह तय है. 

ज़ी न्यूज़ डेस्क

First Published: Tuesday, April 25, 2017 - 18:04
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