BCCI vs CoA : बोर्ड के इन 4 अधिकारियों को बर्खास्त करने की सिफारिश

विनोद राय और डायना एडुल्जी के दो सदस्यीय सीओए पैनल ने सुप्रीम कोर्ट में अपनी आठवीं स्थिति रिपोर्ट सौंपी.

BCCI vs CoA : बोर्ड के इन 4 अधिकारियों को बर्खास्त करने की सिफारिश

नई दिल्ली : बीसीसीआई के वर्तमान पदाधिकारियों के साथ टकराव के बीच प्रशासकों की समिति (सीओए) ने उनकी बर्खास्तगी की मांग की. सीओए का कहना है कि बीसीसीआई संविधान के अनुसार इन पदाधिकारियों का कार्यकाल समाप्त हो चुका है. सीओए ने सुप्रीम कोर्ट से इसके साथ लोढ़ा समिति की सिफारिशों के अनुरूप नये संविधान को औपचारिक तौर पर अपनाये बिना एजीएम के लिये भी निर्देश देने की अपील की.

विनोद राय और डायना एडुल्जी के दो सदस्यीय सीओए पैनल ने सुप्रीम कोर्ट में अपनी आठवीं स्थिति रिपोर्ट सौंपी जिसमें उन्होंने कार्यवाहक अध्यक्ष सीके खन्ना, कार्यवाहक सचिव अमिताभ चौधरी और कोषाध्यक्ष अनिरूद्ध चौधरी को हटाकर नये पदाधिकारियों का चुनाव करवाने की सिफारिश की. सीओए ने इसके साथ ही आईपीएल अध्यक्ष राजीव शुक्ला को भी बर्खास्त करने के लिये कहा, क्योंकि उनका भी कार्यकाल समाप्त हो गया है.

बीसीसीआई और सीओए की लड़ाई निचले स्तर तक पहुंची
बीसीसीआई पदाधिकारियों और सीओए के बीच रिश्ते काफी निचले स्तर पर पहुंच गये हैं. सुप्रीम कोर्ट से नियुक्त समिति जहां लोढ़ा सुधारों को लागू करने में लगातार देरी करने के लिये पदाधिकारियों पर दोष मढ़ रही है वहीं पदाधिकारियों का मानना है कि राय एंड कंपनी को शीर्ष अदालत ने जो अधिकार सौंपे हैं वे उस दायरे से बाहर निकल रहे हैं.

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सीओए ने अपनी रिपोर्ट में बीसीसीआई संविधान के नियम 15 (आई) का हवाला देते हुए कहा, ‘पदाधिकारियों और उपाध्यक्षों का चुनाव बोर्ड की हर साल होने वाली एजीएम में किया जाएगा. इस तरह से चुने गये पदाधिकारी और उपाध्यक्ष तीन साल तक अपने पद पर रहेंगे.’ सीओए ने चेन्नई में मार्च 2015 में बीसीसीआई की 85वीं एजीएम में चुने गये पदाधिकारियों की पूरी सूची भी इसमें जोड़ी है, जिसमें जगमोहन डालमिया को अध्यक्ष चुना गया था.

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इस तरह से वर्तमान संविधान के अनुसार एजीएम में चुने गये सभी पदाधिकारियों का कार्यकाल एक मार्च 2018 को समाप्त होगा. इसके बाद अगले ढाई वर्ष में डालमिया का निधन हो गया जबकि शशांक मनोहर ने इस्तीफा दे दिया और अनुराग ठाकुर को शीर्ष अदालत ने बर्खास्त कर दिया था.
खन्ना को वरिष्ठ उपाध्यक्ष होने के कारण कार्यवाहक अध्यक्ष बनाया गया जबकि अमिताभ चौधरी संयुक्त सचिव थे इसलिए उन्होंने सचिव पद संभाला. सुप्रीम कोर्ट के दो जनवरी 2017 के फैसले के अनुसार अनिरूद्ध पहले की तरह कोषाध्यक्ष बने रहे.