FIFA U-17 : गोलकीपर धीरज के पिता ने कहा, हम नहीं चाहते थे कि बेटा फुटबॉल खेले

धीरज सिंह मणिपुर के बिसनपुर जिले के मोइरंग के रहने वाले हैं.

FIFA U-17 : गोलकीपर धीरज के पिता ने कहा, हम नहीं चाहते थे कि बेटा फुटबॉल खेले
धीरज का फुटबॉलर बनने का सफर (PIC : TWITTER)

नई दिल्ली : भारत अंडर-17 फुटबॉल टीम के गोलकीपर एम धीरज सिंह के पिता का कहना है कि वह कतई नहीं चाहते थे कि उनका बेटा फुटबॉल खेले और इस वजह से एक समय स्कूल में टॉपर रहे इस युवा फुटबॉलर को उसकी नानी ने किट खरीदकर दी. धीरज के पिता रोमित ने कहा कि उनका बेटा पढ़ने में बहुत अच्छा था और वे नहीं चाहते थे कि वह फुटबॉल खेले क्योंकि इस खेल को करियर का विकल्प नहीं माना जाता है.

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फीफा अंडर-17 विश्व कप में अपने बेटे को खेलते हुए देखने के लिए आए रोमित ने कहा, ‘‘धीरज पढ़ने में बहुत अच्छा था और अपनी कक्षा में हमेशा प्रथम आता था. वह बोर्डिंग स्कूल में था और वहां वह ड्रामा और पेंटिंग में भाग लेता था. यहां तक कि वह भजन भी गाता था. मैं उसके फुटबॉल खेलने के खिलाफ था. मैंने उसके लिए फुटबॉल किट्स नहीं खरीदी, इसलिए उसने अपनी नानी से फुटबॉल, जूते और अन्य चीजें खरीदने के लिए कहा.’’ 

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उन्होंने कहा, ‘‘उसकी मां भी नहीं चाहती थी कि वह फुटबॉल खेले लेकिन जब धीरज राष्ट्रीय स्तर (आयु वर्ग) में खेलने लग गया तो हम नरम पड़ गए. अब हम खुश हैं कि वह इतने बड़े टूर्नामेंट में देश के लिए खेल रहा है. हमने कभी नहीं सोचा था कि एक दिन वह इस स्तर पर खेलेगा और लोग उसकी प्रशंसा करेंगे.’’

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धीरज ने अमेरिका और कोलंबिया के खिलाफ शानदार गोलकीपिंग की थी, जिसकी काफी प्रशंसा हो रही है. वह मणिपुर के बिसनपुर जिले के मोइरंग के रहने वाले हैं. रोमित ओर हेमाम ऊषा देवी के एक बेटा धीरज और दो बेटियां हैं.

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