B'day Special : 1347 विकेट लेने वाला ये अकेला गेंदबाज आखिरी मैच में रह गया था खाली हाथ

बात चाहे टेस्ट क्रिकेट की हो गया वनडे क्रिकेट की दोनों में सबसे ज्यादा विकेट लेने का रिकॉर्ड इस सर्वश्रेष्ठ ऑफ स्पिनर के नाम है.

B'day Special : 1347 विकेट लेने वाला ये अकेला गेंदबाज आखिरी मैच में रह गया था खाली हाथ

नई दिल्ली : क्रिकेट की दुनिया में जिस तरह बल्लेबाजी के रिकॉर्ड के लिए सचिन तेंदुलकर को याद करते हैं, उसी तरह गेंदबाजी में श्रीलंकाई ऑफ स्पिनर मुथैया मुरलीधरन का नाम है. आज जब भी क्रिकेट में रिकॉर्ड की बात आती है, तो मुथैया मुरलीधरन का नाम आता है. बात चाहे टेस्ट क्रिकेट की हो गया वनडे क्रिकेट की दोनों में सबसे ज्यादा विकेट लेने का रिकॉर्ड इस सर्वश्रेष्ठ ऑफ स्पिनर के नाम है. अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट के सभी फॉर्मेट को मिलाकर मुरली ने कुल 1347 विकेट अपने नाम किए.

17 अप्रैल 1972 को श्रीलंका के केंडी में जन्मे मुथैया मुरलीधरन के पूर्वज तमिलनाडु से यहां पहुंचे. वह तमिल आबादी के साथ साथ पूरे श्रीलंका के हीरो हैं. मुरलीधरन की पत्नी तमिलनाडु की ही रहने वाली हैं. अगस्त 1992 में मुरलीधरन ने अपने क्रिकेट करियर की शुरुआत ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ टेस्ट खेलकर की. उन्होंने अपना पहला वनडे मैच 1993 में भारत के खिलाफ खेला. बड़ी बात ये है कि अंतिम मैच भी उन्होंने भारत के खिलाफ ही खेला.

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मुरलीधरन ने सिर्फ 133 टेस्ट मैचों में 800 विकेट अपने नाम किए. टेस्ट क्रिकेट में उनके इस रिकॉर्ड के आसपास भी कोई खिलाड़ी नहीं है. टेस्ट क्रिकेट में सिर्फ 87 मैचों में 500 विकेट अपने नाम कर लिए. बाद में मुरली और शेन वॉर्न के बीच टेस्ट के विकेटों की जंग चली. अंत में उसमें मुरली ही विजयी रहे.

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2009 में मुरली ने वनडे में भी सबसे ज्यादा विकेट लेने का कारनामा किया. इस मामले में उन्होंने पाकिस्तानी तेज गेंदबाज वसीम अकरम को पीछे छोड़ा. मुरलीधरन ने 350 वनडे मैच खेले. इसमें उन्होंने 534 विकेट लिए. लेकिन ये भी एक विडंबना है कि टेस्ट और वनडे में विकेटों के ढेर लगाने वाला ये गेंदबाज जब 2011 में वर्ल्डकप के फाइनल में अपना आखिरी मुकाबला खेल रहा था, तब वह पूरे मैच में एक विकेट भी नहीं ले पाया. टी 20 क्रिकेट में मुरली ने 13 विकेट लिए.

चकिंग के भी लगे आरोप
1995-96 में जब मुरली का करियर शुरुआती दौर में था. उस समय उन्होंने टेस्ट में सिर्फ 80 विकेट लिए थे. तब ऑस्ट्रेलिया के एमसीजी में अंपायर डेरेल हेयर ने उन्हें संदिग्ध गेंदबाजी एक्शन के लिए गेंदबाजी से रोका. हालांकि तब कप्तान अर्जुन रणतुंगा के कड़े विरोध के बावजूद वह अपनी गेंदबाजी जारी रख पाए. हालांकि उन पर चकिंग के आरोप लगते रहे.

मुरली के नाम टेस्ट क्रिकेट में बल्लेबाज के तौर एक बुरा रिकॉर्ड दर्ज है. वह टेस्ट में सबसे ज्यादा बार शून्य पर आउट होने वाले बल्लेबाज हैं. वह टेस्ट क्रिकेट में वह कुल 11 बार शून्य पर आउट हुए. दूसरे नंबर पर रंगना हेराथ हैं वह 10 बार शून्य पर आउट हुए.

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