13 मार्च है कांबली के लिए खास, उनके रिकॉर्ड के आगे गावस्कर, सचिन और विराट सब फेल

टेस्ट क्रिकेट में आज भी विनोद कांबली के नाम टीम इंडिया की ओर से बेटिंग एवरेज का ऐसा रिकॉर्ड है, जिस तक कोई भी भारतीय बल्लेबाज नहीं पहुंच पाया है.

Ravi Bhadouria रवि भदौरिया | Updated: Mar 13, 2018, 04:59 PM IST
13 मार्च है कांबली के लिए खास, उनके रिकॉर्ड के आगे गावस्कर, सचिन और विराट सब फेल
कांबली के नाम सबसे तेजी से टेस्ट मैचों में एक हजार रन बनाने का रिकॉर्ड भी रहा है. फाइल फोटो

नई दिल्ली : किसी समय टीम इंडिया में मास्टर ब्लास्टर सचिन तेंदुलकर से भी ज्यादा प्रतिभाशाली माने जाने वाले बल्लेबाज और उनके दोस्त विनोद कांबली का क्रिकेट करियर भले बहुत लंबा नहीं चला, लेकिन अपने छोटे से करियर में उन्होंने पूरी दुनिया को ये बता दिया, कि वह किस क्लास के बल्लेबाज हैं. खासकर टेस्ट फॉर्मेट में कांबली की बल्लेबाजी के आंकड़े उनके जीनियस होने की कहानी खुद कहते हैं. टेस्ट क्रिकेट में आज भी एक रिकॉर्ड ऐसा है, जिस तक कोई भी भारतीय बल्लेबाज नहीं पहुंच पाया है.

विनोद कांबली ने अपने दो साल के छोटे से टेस्ट करियर में कुल 17 टेस्ट मैच खेले. इस दौरान ही ही उन्होंने दो लगातार दोहरे शतक जड़कर सनसनी मचा दी थी. टीम इंडिया में इसके बाद इस कारनामे की बराबरी 2017 में आकर विराट कोहली ने की. लेकिन टेस्ट में जिस रन औसत से विनोद कांबली ने रन बनाए. उस रन औसत से अब तक कोई भी भारतीय बल्लेबाज रन नहीं बना पाया है.

1993 में विनोद कांबली ने पहला टेस्ट मैच खेला. 17 मैचों में उन्होंने 21 पारियों में बल्लेबाजी की. इस दौरान उन्होंने 54.20 की औसत से 1084 रन बनाए. आज तक इस औसत तक टीम इंडिया में कोई  नहीं पहुंच पाया. टीम इंडिया के महान बल्लेबाज सुनील गावस्कर और बल्लेबाजी के तमाम रिकॉर्ड अपने नाम करा चुके सचिन तेंदुलर भी इस रन औसत तक नहीं पहुंच पाए.

टेस्ट क्रिकेट में टीम इंडिया में सर्वश्रेष्ठ रन औसत वाले खिलाड़ी
खिलाड़ी         पारी    रन      औसत
विनोद कांबली    21    1084    54.20
सचिन तेंदुलकर   329   15921   53.78
विराट कोहली     112   5554    53.40
राहुल द्रविड़       284   13265   52.63
सुनील गावस्कर    214   10122   51.12

राहुल द्रविड़ और विराट कोहली 23 साल बाद भी विनोद कांबली के इस रिकॉर्ड को छू नहीं पाए. विनोद कांबली ने पहला टेस्ट फरवरी 1993 में इंग्लैंड के खिलाफ खेला. कांबली ने आखिरी टेस्ट नवंबर 1995 में न्यूजीलैंड के खिलाफ खेला. लेकिन इसके आगे उनका टेस्ट करियर आगे नहीं बढ़ा. हालांकि वनडे में वह वर्ष 2000 तक टीम में आते जाते रहे.

13 मार्च का दिन बहुत अहम है कांबली के लिए
13 मार्च का दिन विनोद कांबली के लिए बहुत अहम है. इसी दिन उन्होंने 1993 में लगातार दूसरा दोहरा शतक लगाकर पूरी दुनिया का ध्यान अपनी ओर खींचा था. वह टीम इंडिया की ओर से नई सनसनी बनकर उभरे थे. 1996 में इसी दिन श्रीलंका के खिलाफ सेमीफाइनल में जब वह खेल रहे थे, तो भारत की बुरी हालत पर लोगों ने उत्पात मचा दिया था. मैच रद्द कर श्रीलंका को विजेता घोषित कर दिया गया था. कांबली तब रोते हुए स्टेडियम से लौटे थे. यहीं से उनके करियर का अंत शुरू हो गया था. हालांकि वह कई बार टीम में लौटे, लेकिन पहले वाला भरोसा नहीं दिखा पाए.