विराट का फेवरेट है ये प्लेयर, फिर भी पता नहीं होता अगले मैच में क्या होगा?

टीम इंडिया के पूर्व कप्तान सुनील गावस्कर को बीसीसीआई का यह सलेक्शन रास नहीं आया और उन्होंने इस पर सवाल भी उठाए. गावस्कर अजिंक्य रहाणे को टीम में नहीं लेने पर खासे नाराज हुए.

विराट का फेवरेट है ये प्लेयर, फिर भी पता नहीं होता अगले मैच में क्या होगा?
कर्नाटक के बल्लेबाज हैं केएल राहुल (PIC : TWITTER/Hardik Pandya)

नई दिल्ली : ''केएल राहुल बेपनाह प्रतिभाशाली है. उन्होंने क्रिकेट के सभी फॉर्मेट मे अपने आपको साबित किया है. वह एक ऐसा खिलाड़ी है जिसे सपोर्ट किया जाना चाहिए क्योंकि उसमें योग्यता है. एक बार टीम मे उसकी भूमिका स्पष्ट हो जाए तो यह खिलाड़ी आपको मैच जीत कर देगा. हमें इसमें कोई संदेह नहीं है.” लगभग 15 दिन पहले विराट कोहली राहुल के सिर पर फूल फेंक रहे थे. वह मीडिया से बातचीत में बता रहे थे कि कैसे आरसीबी की उनका यह साथी वनडे इंडिया का अटूट सदस्य है. इस घटना के एक ही दिन बाद पता चला कि राहुल ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ पहले वनडे में शामिल नहीं हैं. उनकी जगह मनीष पांडे को टीम में लिया गया. राहुल ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ बाद के चारों वनडे में भी नहीं खेले. यानी ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ उन्हें एक भी वनडे खेलने का मौका नहीं दिया गया. 

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इसके बाद टीम इंडिया के चयनकर्ता एमएसके प्रसाद ने कहा, राहुल को चौथे नंबर के लिए तैयार किया जा रहा है. दूसरे खिलाड़ियों का कहा क्या रोल होगा इसके लिए टीम में प्रयोग चल रहे हैं. इसके बाद ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ टी-20 टीम का चयन हुआ. इस टीम में आशीष नेहरा और दिनेश कार्तिक को शामिल किया गया. इसके साथ ही ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ 5 मैचों की वनडे सीरीज में लगातार 4 मैचों में अर्धशतक जड़ने वाले अजिंक्य रहाणे को टी-20 में जगह न देकर केएल राहुल को टीम में शामिल किया गया. 

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टीम इंडिया के पूर्व कप्तान सुनील गावस्कर को बीसीसीआई का यह सलेक्शन रास नहीं आया और उन्होंने इस पर सवाल भी उठाए. गावस्कर अजिंक्य रहाणे को टीम में नहीं लेने पर खासे नाराज हुए. उनका कहना था कि लगातार शानदार प्रदर्शन करने के बाद भी रहाणे को टीम में नहीं चुना गया है और लगातार फ्लॉप रहने के बाद भी लोकेश राहुल को टी-20 टीम में जगह क्यों मिली है? 

हालांकि, पहले दोनों टी-20 मैचों में भी केएल राहुल को खेलने का मौका नहीं दिया गया. ऐसे में यही कहा जा सकता है कि भारतीय थिंक टैंक की इस प्रक्रिया को समझना उतना ही मुश्किल है जितना डार्विन की नेचुरल सलेक्शन की थ्योरी को. 

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पिछले साल इग्लैंड के खिलाफ शानदार 199 रनों की पारी खेलने के बाद राहुल ने यह साबित कर दिया था कि वह बड़े खिलाड़ी हैं. इसके बाद अगस्त मे राहुल ने टेस्ट में लगातार अद्धर्शतक जमाने के रिकॉर्ड की बराबरी की. टी-20 में राहुल ने 9 मैचों मे 52 की औसत से रन बनाए हैं. इन आकड़ों के बाद टीम से बाहर बैठना अस्थाई रूप से ही सही लेकिन आपको परेशान करता है. यह परेशानी तब और बढ़ जाती है जब हर तरफ आपकी तारीफ हो रही हो. 

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दाएं हाथ के इस बल्लेबाज के लिए यह एक कठिन समय है. खासकर आईपीएल सीजन के बाद से टीम में मनीष पांडे और केदार जाधव मध्यक्रम में लगातार अपनी जगह बना रहे हैं. हार्दिक पांड्या और महेंद्र सिंह धोनी का चयन सहज है. राहुल एक विश्वसनीय खिलाड़ी है. यदि टीम प्रंबधन राहुल को सपोर्ट करता है तो यह तरक्की कर सकता है. कोहली भी इस बात को अच्छी तरह जानते है. 

आईपीएल में राहुल को खरीदने के बाद कोहली ने कहा था कि, ''यदि राहुल को मौका मिलता है तो वह मैच जिताने वाला खिलाड़ी साबित होगा.'' तो क्या वन डे टीम से बाहर करके राहुल यही 'मौके' दिए जा रहे हैं. 

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ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ राहुल के मुकाबले पांड्या और केदार जाधव को नंबर 4 पर खिलाया गया. पांडया को इस सीरीज मे दो बार चौथे नंबर पर बल्लेबाजी के लिए भेजा गया. शिखर धवन और रोहित शर्मा की जगह ओपनर के रूप में अभी कोई नहीं हिला सकता. कवर के लिए अंजिक्य रहाणे हैं ही. इस कड़ी को तोड़ना राहुल के लिए बेहद कठिन काम है. तीसरे नबर पर विराट कोहली खुद है. नंबर 4 पर राहुल परिस्थितियों के अनुसार खेल सकते हैं. 

इस बात का विश्वास करने के अनेक कारण हैं कि कम से कम कागजों पर नंबर 4 के लिए वह सबसे उयुक्त बल्लेबाज दिखाई पड़ते हैं. यदि भारत के 30 रन पर 2 विकेट गिर जाते हैं तो टीम को राहुल जैसे तकनीकी रूप से मजबूत खिलाड़ी की जरुरत होगी. 

टेस्ट में राहुल इसे साबित कर चुके हैं. वह केदार जाधव और पांड्या से बेहतर बल्लेबाज हैं. दूसरी स्थिति मे यदि टीम मजबूत स्थिति में है और तो राहुल टी-20 का मास्क लगाकर तेजी से रन बटोर सकते हैं. 2016 के आईपीएल में चौथे नबर पर बल्लेबाजी करते हुए वह आरसीबी के लिए ऐसा कर चुके हैं. 

यदि 2019 के वर्ल्ड कप के लिए टीम तैयार हो रही है तो केएल राहुल को उसकी भूमिका के बार में पक्के तौर पर बताया जाना चाहिए और उन्हें भरपूर मौके दिए जाने चाहिए. लगातार राहुल की तारीफ करना और फिर उसे टीम से बाहर कर देना उनके ऊपर एक दबाव बनाएगा. यदि रोल के आधार पर ही चयन होना है तो राहुल को खेलने के अधिक मौके मिलने ही चाहिए. उम्मीद है आने वाले दिनों में उसकी भूमिका स्पष्ट होगी और उसे चौथे नंबर के लिए अनुकूल पाया जाएगा. 

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