गूगल ने दो दिन बाद तालिबान एप को वापस लिया गूगल ने दो दिन बाद तालिबान एप को वापस लिया

इंटरनेट सर्च इंजन गूगल ने नफरत फैलाने वाले भाषण पर अपनी चिंताओं को लेकर तालिबान उग्रवादियों द्वारा बनाए गए एक दुष्प्रचार एप को हटा लिया है। ‘पश्तो अफगान न्यूज- अलीमारा’ नामक इस एप को शुरूआत में प्ले स्टोर पर स्वीकार कर लिया गया था।  इस एप में तालिबान की मुख्य वेबसाइट से लिए गए वीडियो और बयानों को दिखाया गया था। इस एप के जरिए इंटरनेट उपयोगकर्ता की तालिबान की पश्तो वेबसाइट तक पहुंच बनती थी और यह तालिबान द्वारा अपने दायरे को बढ़ाने के लिए डिजीटल अभियान के विस्तार का हिस्सा है। गूगल के एक प्रवक्ता ने कहा, ‘हम ऐसे एप की वकालत नहीं करते जो नस्ल, जातीय मूल, धर्म ,अस्थिरता, लैंगिकता, उम्र, राष्ट्रीयता , वरिष्ठता दर्जे , यौन मूल या लैंगिक पहचान के आधार पर लोगों के खिलाफ विचार रखता हो।’ 

अमेरिका-सऊदी ने लश्कर और LeT को रोकने के लिए मिलाया हाथ; भारत ने किया स्वागत अमेरिका-सऊदी ने लश्कर और LeT को रोकने के लिए मिलाया हाथ; भारत ने किया स्वागत

एक अप्रत्याशित कदम उठाते हुए सऊदी अरब ने लश्कर-ए-तैयबा, अल कायदा और तालिबान के वित्तपोषण एवं सहयोग नेटवर्क पर अंकुश लगाने के लिए अमेरिका के साथ हाथ मिलाया है। उसने चार व्यक्तियों और दो संगठनों पर प्रतिबंध लगाए हैं। भारत ने इस निर्णय का स्वागत किया है। वित्त विभाग ने जेम्स अलेक्जेंडर मैकलिंटोक, अल-रहमान वेलफेयर आर्गनाइजेशन, अब्दुल अजीज नूरूस्तानी, जामिया असारिया मदरसा, नवीद कमर तथार मुहम्मद एजाज सफाराश को वैश्विक आतंकवादी घोषित किया है। अमेरिकी वित्त विभाग की कल की इस कार्रवाई के बाद सऊदी अरब ने भी इन व्यक्तियों और इकाइयों के खिलाफ पाबंदी लगा दी।

Zee जानकारी : (लाहौर आत्मघाती हमला) आतंकवाद को जड़ से खत्म करे पाकिस्तान, वर्ना बहुत देर हो जाएगी Zee जानकारी : (लाहौर आत्मघाती हमला) आतंकवाद को जड़ से खत्म करे पाकिस्तान, वर्ना बहुत देर हो जाएगी

पाकिस्तान के लाहौऱ शहर की दूरी दिल्ली से 412 किलोमीटर है लेकिन आज पाकिस्तान जिस दर्द से गुजर रहा है उसे दिल्ली में बैठे लोगों के साथ-साथ पूरा भारत महसूस कर रहा है। लाहौर दुनिया के सबसे पुराने शहरों में से एक है। 'लाहौर : पास्ट एंड प्रेजेंट' नाम की पाकिस्तानी किताब में इस बात का जिक्र है कि भगवान राम के बेटे लव ने लाहौर शहर की स्थापना की थी। इसके बाद मुगलों ने इस शहर को अपने तरीके से बसाने की कोशिश की, मुगलों ने लाहौर में बहुत सारे बगीचे बनाए जिसकी वजह से इसे सिटी ऑफ गार्डेन्स यानी बगीचों का शहर भी कहा जाने लगा। 



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