कसाब को फांसी तक पहुंचाने वाली बच्ची

मुम्बई में 26 नवम्बर 2008 को हुए आतंकवादी हमले के गुनाहगार अजमल आमिर कसाब को गोली चलाते देखने वाली चश्मदीद गवाह राजस्थान के पाली जिले की सुमेरपुर की रहने वाली कक्षा नौ की बच्ची देविका का कहना है कि वह आईपीएस अफसर बनकर हजारों आतंकवादियों को मारना चाहती है ।

चार साल में कसाब पर 30 करोड़ रूपये खर्च

केंद्र और महाराष्ट्र सरकार ने अजमल कसाब को मुंबई के आर्थर रोड केंद्रीय कारागार में रखे जाने के दौरान उसे भोजन, सुरक्षा, दवा और कपड़े मुहैया करने पर करीब 29.5 करोड़ रूपये खर्च किए।

26/11 के पीड़ितों के परिवारों को संतोष होगा : चिदम्बरम

केंद्रीय वित्त मंत्री पी. चिदम्बरम ने बुधवार को कहा कि 26 नवंबर, 2008 के मुम्बई हमले के लिए दोषी ठहराए गए अजमल आमिर कसाब को फांसी देकर कानूनी कार्रवाई पूरी की गई और इससे हमले के पीड़ित परिवारों को संतोष मिलेगा।

बुधवार को गुनाह, बुधवार को ही सजा

अजमल कसाब के लिए बुधवार का दिन खास मायने रखता है क्योंकि वह इसी दिन लश्कर ए तैयबा के अपने नौ साथियों के साथ मुंबई में घुसा था और बुधवार को ही उसे फांसी के फंदे से लटका दिया गया।

कसाब का अंत: 26/11 के पीड़ितों को इंसाफ

देश की वाणिज्यिक राजधानी मुबइ में 26 नवंबर, 2008 को आतंकवादी हमले को अंजाम देने वालों में शुमार और एकमात्र जीवित पाकिस्तानी आतंकी अजमल आमिर कसाब को बुधवार सुबह पुणे की यरवडा जेल में फांसी दे दी गई। मुंबई हमले के पीडि़तों को कसाब की फांसी के साथ-साथ आज इंसाफ मिल गया।

जल्लाद को भी नहीं पता था कि वह किसको फांसी देगा

पाकिस्तानी आतंकवादी अजमल कसाब को फांसी दिए जाने में आज इस हद तक गोपनीयता बरती गयी कि आखिरी वक्त तक जल्लाद को भी नहीं पता था कि वह किसे फांसी देने जा रहा ।

`सी-7096` से होती थी कसाब की पहचान

कारागार में प्रवास के दौरान अजमल कसाब की पहचान संख्या ‘ सी-7096 ’ रही । उसे फांसी देने के लिए तैयार किये गये सरकारी दस्तावेज में भी यही पहचान संख्या लिखी गयी थी ।

`गांधी का हत्यारा गोडसे, कसाब से कम थोडे ही था`

लोकजनशक्ति पार्टी सुप्रीमों रामविलास पासवान ने कहा कि 26/11 मुंबई विस्फोट का आरोपी कसाब राष्ट्रपिता महात्मा गांधी के हत्यारे नाथुराम गोडसे से कम थोडे ही था।

कसाब जानता था, उसे कब दी जाएगी फांसी

लश्कर-ए-तोएबा के आतंकवादी अजमल कसाब को पता था कि उसे 21 नवंबर की सुबह फांसी पर लटकाया जाएगा। कसाब को मुंबई की ऑर्थर रोड जेल से 19 नवंबर को पुणे की यरवदा जेल ले जाए जाने से पहले, उससे उसके डेथ वारंट (मौत का वारंट) पर हस्ताक्षर कराए गए थे।

`कसाब को फांसी न दे पाने का मलाल`

पूरे देश की तरह इस परिवार को भी मुंबई आतंकी हमले के गुनहगार आमिर अजमल कसाब की फांसी का बेसब्री से इंतजार था। लेकिन बुधवार को कसाब को फांसी होने के बाद भी दिवंगत मम्मू सिंह जल्लाद का परिवार थोड़ा मायूस है, क्योंकि कसाब को अपने हाथों से फांसी देने की मम्मू जल्लाद की इच्छा अधूरी रह गई।

कसाब की अंतिम ख्‍वाहिश थी: फांसी के बारे में अम्मी को बता दें

मुंबई पर चार वर्ष पहले आतंकी हमले में शामिल लश्कर-ए-तोएबा के आतंकी अजमल कसाब को जब 21 नवंबर को फांसी दिए जाने के बारे में बताया गया तो उसने कहा कि मेरी अम्मी को बता दें। लगता है कि कसाब की मां नूरी लाइ उसके सबसे करीब थीं। फांसी पर लटकाने से पहले जब उससे उसकी आखरी इच्छा के बारे में पूछा गया तो उसने उन्हीं का नाम लिया।

मुंबई आतंकी हमले का काला चेहरा कसाब

बेपरवाह सी कार्गो पैंट, ढीला ढाला नीला स्वेटशर्ट, पीठ पर बैग और हाथों में असाल्ट राइफल..यही था अजमल कसाब मुंबई पर खौफनाक आतंकी हमले का काला चेहरा, जिसने पाकिस्तान में रची गई नापाक साजिश को अमली जामा पहनाने में अहम किरदार निभाया।

`कसाब को फांसी देना सही कदम`

वर्ष 2008 के मुम्बई आतंकवादी हमले में शहीद हुए एनएसजी कमांडो संदीप उन्निकृष्णन के पिता ने बुधवार को कहा कि पाकिस्तानी आतंकवादी अजमल आमिर कसाब को फांसी दिया जाना सही दिशा में उठाया गया कदम है।

'फांसी से पहले कसाब घबराया हुआ, लेकिन शांत था'

मासूमों, महिलाओं और बेगुनाहों के हत्यारे पाकिस्तानी आतंकवादी आमिर अजमल कसाब को बुधवार को फांसी दे दी गई।

पाक को सूचना देने के बाद दी कसाब को फांसी

मुम्बई में वर्ष 2008 के आतंकवादी हमले के दोषी पाकिस्तानी आतंकवादी अजमल आमिर कसाब को फांसी से पहले अंतर्राष्ट्रीय प्रोटोकॉल के मुताबिक पाकिस्तान को सूचित किया गया था।

ऑपरेशन एक्स के तहत हुआ कसाब का `द एंड`

पाकिस्तानी आतंकवादी आमिर अजमल कसाब को फांसी देने की प्रक्रिया पूरी तरह गोपनीय रखी गई।

मप्र: कसाब को फांसी दिए जाने पर जश्न

मुंबई आतंकी हमले के दोषी आमिर अजमल कसाब को फांसी दिए जाने से मध्य प्रदेश मे जश्न का माहैाल है। जगह-जगह आतिशबाजी हो रही है और मिठाइयां बांटी जा रही है। साथ ही लोग अब अफजल गुरु को भी फांसी दिए जाने की मांग कर रहे हैं।

मुंबई हमले से कसाब को फांसी तक का घटनाक्रम

26 नवंबर 2008 को हुए मुंबई हमलों के करीब चार साल बाद पाकिस्तानी आतंकवादी मोहम्मद अजमल आमिर कसाब को आज यहां यरवदा जेल में फांसी दे दी गई। मुंबई हमले से लेकर कसाब को फांसी दिए जाने तक का घटनाक्रम इस प्रकार है।

राष्ट्रपति ने पहले खारिज की थी कसाब की याचिका

राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने वर्ष 2008 के मुम्बई आतंकवादी हमले के अकेले जीवित बचे आतंकवादी अजमल आमिर कसाब की दया याचिका कुछ सप्ताह पहले ही खारिज कर दी थी।

कसाब को यरवडा जेल में दफनाया गया

मुम्बई हमले के दोषी पाकिस्तानी आतंकवादी अजमल आमिर कसाब को पुणे की यरवडा जेल में बुधवार सुबह फांसी दिए जाने के बाद उसे वहीं जेल परिसर में दफना दिया गया।

कसाब को फांसी: पुणे जेल के पास कड़ी सुरक्षा व्यवस्था

मुंबई में 26 नवंबर 2008 को हुए हमलों के दोषी आतंकवादी अजमल कसाब को बुधवार सुबह फांसी दिए जाने की खबर फैलते ही पुणे के यरवदा केंद्रीय कारागार के आसपास बड़ी संख्या में लोग एकत्र होने लगे। कसाब को फांसी के ब्यौरे के बारे में जेल अधिकारी चुप्पी साधे हुए हैं।