Zee जानकारी : 31 सैटेलाइट लॉन्च कर भारत ने एक और वर्ल्ड रिकॉर्ड बनाया

Zee जानकारी : 31 सैटेलाइट लॉन्च कर भारत ने एक और वर्ल्ड रिकॉर्ड बनाया

-ISRO ने PSLV-C38 नामक रॉकेट की मदद से 31 सैटेलाइट लॉन्च करके शुक्रवार को एक और रिकॉर्ड बनाया है।

कार्टोसेट-2 और 30 नैनो सेटेलाइट को लेकर थोड़ी देर बाद अंतरिक्ष में जाएगा PSLV-C38

कार्टोसेट-2 और 30 नैनो सेटेलाइट को लेकर थोड़ी देर बाद अंतरिक्ष में जाएगा PSLV-C38

चेन्नई. 30 सह-उपग्रहों के साथ कार्टोसैट-2 सीरीज के उपग्रह के प्रक्षेपण की 28 घंटों की उल्टी गिनती शुरू हो गई है.

नेविगेशन सैटेलाइट की घड़ियां कर रहीं टिकटिक, इसरो करेगा सिस्टम का विस्तार

नेविगेशन सैटेलाइट की घड़ियां कर रहीं टिकटिक, इसरो करेगा सिस्टम का विस्तार

भारतीय अंतरिक्ष एजेंसी द्वारा रोज सुबह नौवहन उपग्रह प्रणाली एनएवीआईसी की घड़ी से टिक-टिक की आवाज आने की घोषणा के बाद एजेंसी के वैज्ञानिक चैन की सांस लेते हैं. एनएवीआईसी के छह उपग्रहों में दो के बदले केवल एक रूबीडियम घड़ी को चालू किया गया है. घोषणा का तात्पर्य यह है कि छह उपग्रहों में लोकेशन संबंधित आंकड़े प्रदान करने वाली परमाणु घड़ी सामान्य ढंग से काम कर रही है. पहले नौवहन उपग्रह आईआरएनएसएस-1ए के तीन परमाणु घड़ियां पहले ही नाकाम हो चुकी हैं.

जानिए, GSLV मार्क तीन की खासियतें- संचार क्षेत्र में गेम चेंजर साबित होगा यह सैटेलाइट

जानिए, GSLV मार्क तीन की खासियतें- संचार क्षेत्र में गेम चेंजर साबित होगा यह सैटेलाइट

इसरो ने कामयाबी का इतिहास रचते हुए सोमवार को शाम पांच बजकर 28 मिनट पर जीएसएलवी मार्क तीन का सफलतापूर्वक प्रक्षेपण किया. इसरो की इस सफलता ने भारत को उन चुनिंदा देशों-अमेरिका, रूस, चीन और जापान की श्रेणी में लाकर खड़ा दिया जो भारी भरकम सैटेलाइट को अंतरिक्ष में भेजने की क्षमता रखते हैं. इस कामयाबी के बाद भारत के पास अंतरिक्ष की दुनिया में नए कीर्तिमान स्थापित करने के अवसर होंगे. भारत अब अंतरिक्ष में मानवयुक्त मिशन भेज सकेगा. इसके अलावा व्यावसायिक सैटेलाइट प्रक्षेपण के लिए दुनिया में भारत की मांग और बढ़ेगी.

भारत के सबसे भारी रॉकेट से जीसैट-19 का सफल प्रक्षेपण, संचार उपग्रह के लिए बने आत्मनिर्भर

भारत के सबसे भारी रॉकेट से जीसैट-19 का सफल प्रक्षेपण, संचार उपग्रह के लिए बने आत्मनिर्भर

भारतीय अंतरिक्ष एजेंसी, इसरो आज यानी सोमवार (5 जून) को अपने सबसे भारी रॉकेट के जरिए संचार उपग्रह जीसैट-19 को लॉन्च कर दिया.

इसरो अंतरिक्ष में एक और नई कामयाबी की उड़ान के लिए तैयार, सबसे भारी रॉकेट से छोड़ेगा जीसैट-19 संचार उपग्रह

इसरो अंतरिक्ष में एक और नई कामयाबी की उड़ान के लिए तैयार, सबसे भारी रॉकेट से छोड़ेगा जीसैट-19 संचार उपग्रह

 भारतीय अंतरिक्ष एजेंसी, इसरो सोमवार (पांच जून) को अपने सबसे भारी रॉकेट के जरिए संचार उपग्रह जीसैट-19 को लॉन्च करेगा. भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) के मुताबिक, जीएसएलवी मार्क3 (जीएसएलवी-एमके3) रॉकेट को पांच जून को शाम 5.28 बजे छोड़ा जाएगा. यह रॉकेट भौगोलिक स्थानांतरण कक्षा (जीटीओ) तक चार टन वजन ढोने में सक्षम है.

अंतरिक्ष में भारत की एक और उड़ान, इसरो 5 जून को छोड़ेगा जीसैट-19 संचार सैटेलाइट

अंतरिक्ष में भारत की एक और उड़ान, इसरो 5 जून को छोड़ेगा जीसैट-19 संचार सैटेलाइट

भारतीय अंतरिक्ष एजेंसी, इसरो ने मंगलवार (30 मई) को कहा कि पांच जून को अपने सबसे भारी रॉकेट के जरिए संचार उपग्रह जीसैट-19 को लॉन्च किया जाएगा. भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) के मुताबिक, जीएसएलवी मार्क3 (जीएसएलवी-एमके3) रॉकेट को पांच जून को शाम 5.28 बजे छोड़ा जाएगा. यह रॉकेट भौगोलिक स्थानांतरण कक्षा (जीटीओ) तक चार टन वजन ढोने में सक्षम है. रॉकेट जीसैट-19 उपग्रह को ले जाएगा, जिसका वजन 3,136 किलोग्राम है. इसे आंध्र प्रदेश के श्रीहरिकोटा से छोड़ा जाएगा.

Zee जानकारी: इसरो और नासा मिलकर बना रहे हैं दुनिया का सबसे महंगा और आधुनिक सैटेलाइट

Zee जानकारी: इसरो और नासा मिलकर बना रहे हैं दुनिया का सबसे महंगा और आधुनिक सैटेलाइट

अब अमेरिका जैसे देश अंतरिक्ष में भारत के साथ मिलकर काम कर रहे हैं। भारत की अंतरिक्ष एजेंसी ISRO और अमेरिका की अंतरिक्ष एजेंसी NASA मिलकर...

इसरो जून में सबसे भारी रॉकेट छोड़ने की तैयारी में, 12 सालों की मेहनत का नतीजा

इसरो जून में सबसे भारी रॉकेट छोड़ने की तैयारी में, 12 सालों की मेहनत का नतीजा

दक्षिण एशिया उपग्रह के सफल प्रक्षेपण से उत्साहित भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) अब अपने सबसे भारी रॉकेट जीएसएलवी मार्क-3 को छोड़ने की तैयारी में जुट गया है. इसरो द्वारा निर्मित यह अब तक का सबसे वजनी रॉकेट है, जिसका वजन 640 टन है. इस रॉकेट की सबसे बड़ी खासियत यह है कि रॉकेट के मुख्य व सबसे बड़े क्रायोजेनिक इंजन को इसरो के वैज्ञानिकों ने भारत में ही विकसित किया है, जो पहली बार किसी रॉकेट को उड़ने की शक्ति प्रदान करेगा.

Zee जानकारी: कूटनीति की कक्षा में स्थापित हुआ भारत का सैटेलाइट

Zee जानकारी: कूटनीति की कक्षा में स्थापित हुआ भारत का सैटेलाइट

SAARC देशों के लिए एक साझा Satellite लॉन्च करने का Idea सबसे पहले प्रधानमंत्री मोदी ने ही दिया था। वर्ष 2014 में जब भारत के PSLV रॉकेट ने 4 देशों के 5 Satellites को अंतरिक्ष में स्थापित किया था तब

पीएम मोदी ने साउथ एशिया सैटेलाइट के प्रक्षेपण को बताया ऐतिहासिक, कहा दो साल में किया वादा पूरा

पीएम मोदी ने साउथ एशिया सैटेलाइट के प्रक्षेपण को बताया ऐतिहासिक, कहा दो साल में किया वादा पूरा

भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सार्क सैटेलाइट GSAT9 के प्रक्षेपण को ऐतिहासिक बताया है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने साउथ एशिया संचार उपग्रह के सफल लॉन्चिंग के बाद 6 सार्क देशों के राष्ट्राध्यक्षों को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए इसकी जानकारी दी.

भारत की बड़ी छलांग:साउथ एशिया सैटेलाइट लांच, सार्क देशों को भारत का गिफ्ट, पीएम मोदी ने दी बधाई,  देखें VIDEO

भारत की बड़ी छलांग:साउथ एशिया सैटेलाइट लांच, सार्क देशों को भारत का गिफ्ट, पीएम मोदी ने दी बधाई, देखें VIDEO

भारत ने आज सफलतापूर्वक दक्षिण एशिया संचार उपग्रह का प्रक्षेपण किया जिसका पूरी तरह वित्त पोषण भारत कर रहा है और इसे दक्षिण एशिया के पड़ोसी देशों के लिए ‘अमूल्य उपहार’बताया जा रहा है जो क्षेत्र के देशों को संचार और आपदा के समय में सहयोग देगा.इस सैटेलाइट के लॉन्च से दक्षिण एशियाई देशों के बीच संपर्क को बढ़ावा मिलेगा.पीएम मोदी ने इस बड़ी सफलता पर इसरो को बधाई दी है.

सार्क देशों को आज 'गिफ्ट' देगा भारत, साउथ एशिया सैटेलाइट करेगा लॉंन्च

सार्क देशों को आज 'गिफ्ट' देगा भारत, साउथ एशिया सैटेलाइट करेगा लॉंन्च

भारत अपने सार्क के पड़ोसी देशों को मंगलवार को 'गिफ्ट' देगा. भारत अपने पड़ोसी देशों के लिए आज दक्षिण एशिया संचार उपग्रह जीसैट-9 का प्रक्षेपण करेगा. इस सैटेलाइट से सार्क देशों के संचार क्षेत्र में मदद मिलेगी. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने दो साल पहले इसरो को सार्क देशों के लिए उपग्रह तैयार करने के लिए कहा था.  

भारत 5 मई को ‘दक्षिण एशिया उपग्रह’का प्रक्षेपण करेगा, परियोजना का हिस्सा नहीं होगा पाकिस्तान

भारत 5 मई को ‘दक्षिण एशिया उपग्रह’का प्रक्षेपण करेगा, परियोजना का हिस्सा नहीं होगा पाकिस्तान

भारत पांच मई को ‘दक्षिण एशिया उपग्रह’ के प्रक्षेपण की योजना बना रहा है. इस उपग्रह से पाकिस्तान को छोड़कर दक्षिण एशिया क्षेत्र के सभी देशों का फायदा होगा. पाकिस्तान इस परियोजना का हिस्सा नहीं है.

उपग्रह बनाने के लिए इसरो ने की निजी क्षेत्र से जुगलबंदी

उपग्रह बनाने के लिए इसरो ने की निजी क्षेत्र से जुगलबंदी

भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) के एक बेहद सुरक्षित और साफ कमरे में एक नई किस्म की जुगलबंदी बन रही है. निजी क्षेत्र के दल यहां सरकारी इंजीनियरों के साथ मिलकर एक ऐसा उपग्रह बनाने का काम कर रहे हैं, जो जल्दी ही आसमान में स्थापित किया जाएगा.

भारत के 104 सैटेलाइट छोड़े जाने की खबर पढ़कर ये था US खुफिया एजेंसियों के संभावित प्रभारी का रिएक्शन

भारत के 104 सैटेलाइट छोड़े जाने की खबर पढ़कर ये था US खुफिया एजेंसियों के संभावित प्रभारी का रिएक्शन

अमेरिका की खुफिया एजेंसी सीआईए सहित देश की सभी खुफिया एजेंसियों के प्रभारी पद की दौड़ में शीर्ष प्रत्याशी ने कहा कि वह यह पढ़कर ‘स्तब्ध’ रह गये थे कि भारत ने गत महीने एक बार में 100 से ज्यादा उपग्रहों का सफल प्रक्षेपण किया।

Zee जानकारी: आधुनिक भारत के सबसे बड़े रहस्य का विश्लेषण

Zee जानकारी: आधुनिक भारत के सबसे बड़े रहस्य का विश्लेषण

DNA में आज सबसे पहले हम आधुनिक भारत के सबसे बड़े रहस्य का विश्लेषण करेंगे। ये रहस्य क़रीब 23 वर्ष पुराना है, जिसका रिश्ता ISRO यानी Indian Space Research Organisation से जुड़ा हुआ है। आपने पिछले कु

अंतरिक्ष में अपना स्टेशन बनाने में इसरो सक्षम: किरण कुमार

अंतरिक्ष में अपना स्टेशन बनाने में इसरो सक्षम: किरण कुमार

एक साथ 104 उपग्रहों को प्रक्षेपित कराकर इतिहास रचने से उत्साहित भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) ने सोमवार को कहा कि वह अंतरिक्ष में देश का अपना स्टेशन विकसित करने में सक्षम है, बशर्ते देश ‘दीर्घकालिक सोच’ के साथ इस महत्वाकांक्षी परियोजना के लिये मन बनाये।

अंतरिक्ष में एक-एक कर कैसे रॉकेट से अलग हुए सैटेलाइट? इसरो ने जारी किया अद्भुत और रोमांचक VIDEO

अंतरिक्ष में एक-एक कर कैसे रॉकेट से अलग हुए सैटेलाइट? इसरो ने जारी किया अद्भुत और रोमांचक VIDEO

इसरो ने बुधवार को पीएसएलवी-सी37 रॉकेट से 104 सैटलाइट लॉन्च कर इतिहास रचा था। लॉन्च का वीडियो तो आपने देखा होगा, लेकिन आपको यह नहीं पता होगा कि इस रॉकेट पर एक सेल्फी कैमरा (ऑनबोर्ड कैमरा) भी लगा हुआ था, जिसने सभी सैटेलाइट्स के कक्षा में स्थापित होने के वीडियो को रिकॉर्ड किया। अब इसरो ने इस फुटेज को जारी किया है और यह फुटेज अब सामने आया है। इसमें अंतरिक्ष में धरती की खूबसूरत तस्वीरें भी देखी जा सकती है। फुटेज में साफ नजर आ रहा है कि कैसे एक-एक कर सभी सैटलाइट्स रॉकेट से अलग हो रहे हैं।