दशहरा 2018: 250 साल पुरानी है रामनगर की रामलीला, देश ही नहीं विदेश में भी है प्रसिद्ध

वाराणसी के रामनगर में होने वाली रामलीला देश ही नहीं विदेश में भी प्रसिद्ध है. 

दशहरा 2018: 250 साल पुरानी है रामनगर की रामलीला, देश ही नहीं विदेश में भी है प्रसिद्ध
(फाइल फोटो)

नई दिल्ली: दिल्ली की रामलीला और ऐसे ही देश के कई हिस्सों में होने वाला इसका आयोजन काफी मशहूर है. वाराणसी के रामनगर में होने वाली रामलीला देश ही नहीं विदेश में भी प्रसिद्ध है. रामनगर की ऐतिहासिक रामलीला का लिखित इतिहास तो नहीं है, लेकिन किंवदंतियों के अनुसार इसकी शुरुआत महाराज उदित नारायण सिंह के शासन काल में सन् 1776 में हुई थी. उन्होंने मिर्जापुर जिले के एक व्यापारी की उलाहना पर रामलीला शुरू की थी. 

रामनगर की रामलीला
वाराणसी से लगभग 20 किमी दूर रामनगर की रामलीला का ऐतिहासिक महत्व है. रामनगर में रामलीला 31 दिन तक चलती है. रामनगर की रामलीला की खास बात यह है कि इसके प्रधान पात्र एक ही परिवार के होते हैं. उनके परिवार के सदस्य पीढ़ी दर पीढ़ी रामलीला का मचंन करते आये हैं. आज भी भगवान राम की दिव्य वस्तुएं काशी नरेश के संरक्षण में प्राचीन बृहस्पति मंदिर में मौजूद हैं. यही कारण है कि रामनगर की रामलीला दुनिया भर में प्रसिद्ध है. कहा जाता है कि यहां की रामलीला का इतिहास 250 साल पुराना है. 

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कुमाऊंनी रामलीला
उत्तराखंड के कुमायूं अंचल में रामलीला का मंचन गीत और नाट्य शैली में किया जाता है. कुमांयू में रामलीला के मंचन की शुरुआत 18वीं सदी के मध्यकाल के बाद हो चुकी थी. कुमायूं के बाद नैनीताल, बागेश्वर और पिथौरागढ़ में क्रमश: 1880, 1890 और 1902 में रामलीला का मंचन प्रारंभ हुआ. कुमायूं की रामलीला अब से लगभग डेढ़ सौ साल पहले प्रारंभ हुई थी. यूनेस्को ने इस रामलीला को दुनिया का सबसे लंबा ऑपेरा घोषित करके इसे विश्व सांस्कृतिक दाय सूची अर्थात वर्ल्ड कल्चरल हेरिटेज लिस्ट में शामिल किया है. पीढ़ी-दर-पीढ़ी लोकमानस में रची-बसी रही यह रामलीला विशुद्ध मौखिक परंपरा पर आधारित है. रामलीला में अभिनय से ज्यादा जोर गायन पर रहता है. 

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चित्रकूट की रामलीला 
यहां की रामलीला का इतिहास काफी दिलचस्प है. चित्रकूट में रामलीला का मंचन फरवरी के अंतिम सप्ताह में किया जाता है और ये सिर्फ पांच दिनों तक चलता है. रामलीला की शुरुआत महाशिवरात्रि से होती है. चित्रकूट की रामलीला भारत में इसलिए प्रसिद्ध है क्योंकि रामलीला में तकनीकी इस्तेमाल से पात्रों की भावनाओं का इजहार कराया जाता है.  यहां के कलाकार नृत्य, संगीत में निपुण होते हैं जो तुलसीदास द्वारा रचित रामचरितमानस पर अभिनय करते हैं.