विद्या देवी भंडारी दूसरी बार नेपाल की राष्ट्रपति चुनी गईं

भंडारी का समर्थन सत्तारूढ़ सीपीएन-यूएमएल और सीपीएन (माओवादी सेंटर) वाम गठबंधन, संघीय समाजवादी फोरम-नेपाल और अन्य छोटे दल कर रहे हैं.

ज़ी न्यूज़ डेस्क ज़ी न्यूज़ डेस्क | Updated: Mar 13, 2018, 07:33 PM IST
विद्या देवी भंडारी दूसरी बार नेपाल की राष्ट्रपति चुनी गईं
2016 में फोर्ब्स ने दुनिया की 100 सबसे शक्तिशाली महिलाओं की लिस्ट में विद्या देवी भंडारी को 52वें नंबर पर रखा था. (फाइल फोटो - साभार ANI)

काठमांडो: नेपाल में मंगलवार को हुए राष्ट्रपति चुनावों के लिए मतदान हुआ जिसमें मौजूदा राष्ट्रपति विद्या देवी भंडारी दूसरी बार निर्वाचित हुई हैं. वह देश की पहली महिला राष्ट्रपति हैं. विद्या देवी पूर्व पीएम माधव प्रसाद नेपाल के कैबिनेट में 25 मई 2009 से 6 फरवरी 2011 के बीच देश की रक्षा मंत्री भी रह चुकी हैं. 2016 में फोर्ब्स ने उन्हें दुनिया की 100 सबसे शक्तिशाली महिलाओं की लिस्ट में 52वें नंबर पर रखा था. 

भंडारी ने दो तिहाई से ज्यादा बहुमत हासिल किया
वाम गठबंधन की उम्मीदवार निवर्तमान राष्ट्रपति भंडारी ने नेपाली कांग्रेस की उम्मीदवार कुमार लक्ष्मी राय को हराया. भंडारी ने दो- तिहाई से ज्यादा बहुमत हासिल किया. चुनाव आयोग के प्रवक्ता नवराज ढाकल ने कहा कि भंडारी को 39275 वोट मिले जबकि नेपाली कांग्रेस की उम्मीदवार राय को 11730 वोट प्राप्त हुए. भंडारी (56) का समर्थन सत्तारूढ़ सीपीएन- यूएमएल और सीपीएन( माओवादी सेंटर) वाम गठबंधन, संघीय समाजवादी फोरम- नेपाल और अन्य छोटे दलों ने किया.

संघीय संसद के 148 सदस्यों और प्रांतीय असेंबलियों के 243 सदस्यों के साथ सीपीएन-यूएमएल के कुल 23356 वोट हैं. नेपाली कांग्रेस के संसद में 76 और प्रांतीय विधानसभाओं में 113 सदस्य हैं और इस प्रकार उसके कुल 11428 वोट हैं. निर्वाचक मंडल में संसद और प्रांतीय एसेंबलियों के सदस्य शामिल होते हैं, जो राष्ट्रपति चुनावों में वोट डालते हैं.

दो बार संसदीय चुनाव में निर्वाचित हुई हैं विद्या देवी 
विद्या देवी भंडारी का जन्म 19 जून, 1961 को हुआ था. वह छात्र जीवन से ही राजनीति से जुड़ गई थीं और 1980 में उन्होंने कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ नेपाल (मार्क्सवादी-लेननवादी) की सदस्यता ग्रहण कर ली थीं. वह दो बार - 1994 और 1999 संसदीय चुनावों में निर्वाचित हुई. हालांकि 2008 में उन्हें संविधान सभा के चुनाव में हार का सामाना करना पड़ा था. 

 

(इनपुट - भाषा)