कुलभूषण जाधव मामला: ICJ में पाक की किरकिरी, कानूनी जानकारों ने रणनीति पर उठाए सवाल

भारतीय नागरिक कुलभूषण जाधव के मामले को अंतरराष्ट्रीय न्याय अदालत (आईसीजे) में निबटाने के तरीकों पर आज पाकिस्तान सरकार को आलोचनाओं का सामना करना पड़ा और अनेक कानूनी विशेषज्ञों ने पाकिस्तानी रणनीति पर सवालिया निशान खड़े किए और अदालत के न्यायाधिकार स्वीकार करने पर सवाल किए.

ज़ी न्यूज़ डेस्क | अंतिम अपडेट: शुक्रवार मई 19, 2017 - 03:57 PM IST
कुलभूषण जाधव मामला: ICJ में पाक की किरकिरी, कानूनी जानकारों ने रणनीति पर उठाए सवाल
कानूनी विशेषज्ञों ने पाकिस्तानी रणनीति पर सवालिया निशान खड़े किए और अदालत के न्यायाधिकार स्वीकार करने पर सवाल किए.

इस्लामाबाद: भारतीय नागरिक कुलभूषण जाधव के मामले को अंतरराष्ट्रीय न्याय अदालत (आईसीजे) में निबटाने के तरीकों पर आज पाकिस्तान सरकार को आलोचनाओं का सामना करना पड़ा और अनेक कानूनी विशेषज्ञों ने पाकिस्तानी रणनीति पर सवालिया निशान खड़े किए और अदालत के न्यायाधिकार स्वीकार करने पर सवाल किए.

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जाधव की सजाए मौत पर स्थगन लगाने का आदेश दिया

हेग आधारित आईसीजे ने कल 46 वर्षीय जाधव की सजाए मौत पर स्थगन लगाने का आदेश दिया है. इस आदेश के बाद मामले का ‘‘खराब ढंग से निबटाने’’ को ले कर पाकिस्तानी विदेश मंत्रालय की आलोचनाओं का सिलसिला शुरू हो गया. इस क्रम में आईसीजे में पाकिस्तान का पक्ष पेश करने वाले खावर कुरैशी के चयन पर भी नाराजगी जताई गई. पाकिस्तान बार काउंसिल के पूर्व उपाध्यक्ष फरोग नसीम के अनुसार पाकिस्तान को तत्काल 29 मार्च 2017 की अपना अधिघोषणा वापस ले लेना चाहिए जिसमें उसने आईसीजे का अनिवार्य न्यायाधिकार स्वीकार किया गया है. नसीम ने कहा कि जैसे ही भारत जाधव का मामला आईसीजे में ले गया पाकिस्तान को अपनी अधिघोषणा वापस ले लेनी चाहिए थी.

उन्होंने कहा, ‘पाकिस्तान इस हकीकत के बावजूद अदालत के समक्ष कश्मीर में मानवाधिकार के सुस्पष्ट और निर्दय उल्लंघन का मामला क्यों नहीं ले गया कि इस मामले में उसका पक्ष मजबूत था.’ अंतरराष्ट्रीय कानून के विशेषज्ञ पूर्व अतिरिक्त अटार्नी जनरल तारिक खोखर ने अफसोस जताया कि पाकिस्तान ने अधिसूचना के मार्फत आईसीजे का न्यायाधिकार स्वीकार किया है. उन्होंने कहा कि जैसे ही पाकिस्तान को पता चला कि भारत उसके खिलाफ आईसीजे का न्यायाधिकार लागू करेगा, उसे उससे हट जाना चाहिए.

खोखर ने कहा, ‘मध्यस्थता का एक मंच होने के नाते विवाद में शामिल प्रत्येक देश को आईसीजे में तदर्थ न्यायाधीश के रूप में काम करने के लिए अपनी पसंद के एक व्यक्ति को नामित करने की इजाजत है..भारत ने एक को नामित किया लेकिन पाकिस्तान ने नहीं.’ उन्होंने कहा कि पाकिस्तान को जितना समय मिला उसका इस्तेमाल उसने दलील देने में नहीं किया.

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आसिमा जहांगीर ने उठाए सवाल

अग्रणी वकील एवं मानवाधिकार कार्यकर्ता आसिमा जहांगीर ने कहा कि आईसीजे की व्यवस्था को अहं का मुद्दा बनाने के बजाय, ‘‘हमें बैठना चाहिए और सिर जोड़ कर व्यवस्था का अध्ययन कर कोई रास्ता निकालना चाहिए.’आसिमा ने सवाल किया, ‘किसने जाधव को कूटनीतिक पहुंच से वंचित करने की सलाह दी थी?’ अंतरराष्ट्रीय कानून के विशेषज्ञ अहमद बिलाल सूफी की राय थी कि पाकिस्तान को मामले के दूसरे चरण के लिए तैयारी करनी चाहिए. यह ‘ज्यादा अहम है क्योंकि यह गुण-दोष के आधार पर लड़ा जाएगा और यह जाधव के मार्फत पाकिस्तान के अंदर भारत का हस्तक्षेप दस्तावेजबंद करने का पाकिस्तान को मौका देगा.’’ सूफी ने कहा कि पाकिस्तान जाधव की गतिविधियों की जांच पर भारत से सहयोग का आग्रह कर सकता है.

पूर्व कानून मंत्री एसएम जफर ने कहा कि प्रथम दृष्टया एक गलत फैसला है. ‘मैं नहीं समझता कि मामले को समझे बगैर आईसीजे ने क्यों कोई स्थगनादेश पारित किया.’ जफर ने कहा कि पाकिस्तान अपनी कानूनी रणनीति बदल दे और आतंकवाद के कोण पर ज्यादा जोर दे. एक वरिष्ठ अधिकारी ने एक्सप्रेस ट्रिब्यून से कहा कि भारत आईसीजे के रजिस्ट्रार कार्यालय को मैनेज करने में कामयाब रहा जिसके पास अदालत के समक्ष मामले रखने की व्यापक शक्ति है.

कानून मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने एक्सप्रेस ट्रिब्यून को बताया कि पाकिस्तान के मुख्य वकील कुरैशी ने दो गलतियां कीं. उन्होंने कहा, ‘‘उन्होंने सुनवाई से पहले तदर्थ न्यायाधीश नामित नहीं किया और कूटनीतिक पहुंच पर भारत और पाकिस्तान के बीच 2008के द्विपक्षीय समझौते के बारे में भारतीय वकील की दलीलों का जवाब नहीं दिया’

भारत की बड़ी कूटनीतिक जीत साबित

नीदरलैंड के हेग स्थित अंतर्राष्ट्रीय कोर्ट ने आज (गुरुवार को) जासूसी के आरोप में पाकिस्तान की जेल में बंद भारतीय नेवी के पूर्व अधिकारी कुलभूषण जाधव की फांसी की सज़ा पर रोक लगा दी. इसी के साथ अंतरराष्ट्रीय मंच पर यह भारत की बड़ी कूटनीतिक जीत साबित हुई है. अदालत ने पाकिस्तान से मामले में अंतिम फैसला आने तक कथित जासूस कुलभूषण जाधव को फांसी न देने का आदेश दिया और आदेश के क्रियान्वयन को लेकर उठाए गए कदमों से अदालत को अवगत कराने को कहा.

सुषमा ने साल्वे को कहा शुक्रिया

 भारत की ओर से वरिष्ठ वकील हरीश साल्वे ने कुलभूषण जाधव केस की पैरवी की.खबर है कि हरीश साल्वे ने 1 एक रुपये की फीस लेकर कुलभूषण जाधव मामले में अंतरराष्ट्रीय कोर्ट में भारत का पक्ष रखा. 42 साल के अपने करियर में वह कई कॉरपोरेट घरानों का पक्ष कोर्ट में रख चुके हैं. उनकी गिनती भारत के सबसे महंगे वकीलों में होती है. अंतर्राष्ट्रीय न्‍यायालय का फैसला आने के बाद ट्विटर पर लोगों ने भारत के वकील हरीश साल्‍वे की जमकर वाहवाही की. भारत की विदेश मंत्री सुषमा स्वराज समेत कई नेताओं ने हरीश साल्वे को शुक्रिया कहा.

CJ के फ़ैसले को पाकिस्तान ने नकारा

भारतीय नागरिक कुलभूषण जाधव की मौत की सजा पर अन्तरराष्ट्रीय न्यायालय (आईसीजे) द्वारा रोक लगाए जाने के बाद पाकिस्तान के विदेश कार्यालय ने गुरुवार (18 मई) को कहा कि इस्लामाबाद राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े मामले में अंतरराष्ट्रीय न्यायालय के न्यायक्षेत्र को नहीं स्वीकार करता. विदेश कार्यालय के प्रवक्ता नफीस जकारिया ने भारत पर बरसते हुए कहा कि वह जाधव का मामला अंतरराष्ट्रीय न्यायालय (आईसीजे) ले जाकर ‘अपना असली चेहरा छिपाने की कोशिश’ कर रहा है.

अंतर्राष्ट्रीय न्यायालय ने जाधव की फांसी पर रोक लगाई 

कुलभूषण जाधव मामले में भारत को गुरुवार को अंतर्राष्ट्रीय अदालत (आईसीजे) में बेहद अहम कूटनीतिक, नैतिक व कानूनी जीत मिली. अदालत ने पाकिस्तान से मामले में अंतिम फैसला आने तक कथित जासूस कुलभूषण जाधव को फांसी न देने का आदेश दिया और आदेश के क्रियान्वयन को लेकर उठाए गए कदमों से अदालत को अवगत कराने को कहा. आईसीजे के अध्यक्ष रॉनी अब्राहम ने अपने आदेश में कहा, "इस अदालत ने एकमत से फैसला किया है कि मामले में अदालत का अंतिम फैसला आने तक कुलभूषण जाधव को फांसी न देने के लिए पाकिस्तान हर उपाय करेगा. साथ ही अदालत ने एकमत से यह भी फैसला किया है कि इस आदेश के क्रियान्वयन को लेकर उठाए गए कदमों से पाकिस्तान अदालत को अवगत कराएगा."

अदालत में उस वक्त दोनों देशों के अधिकारी मौजूद थे, जब न्यायाधीश ने रजिस्ट्रार को दोनों पक्षों को आदेश की प्रति प्रदान करने को कहा. आदेश में अदालत ने कहा कि मौजूदा मामले के विवरणों के देखकर प्रथमदृष्टया लगता है कि अदालत का मामले में हस्तक्षेप करने का अधिकार है. अदालत ने कहा कि उसने पाया है कि भारत ने जिन अधिकारों की मांग की है और अदालत जिन तात्कालिक कदमों को उठा सकती है, इन दोनों के बीच एक वैध संबंध है. न्यायाधीश अब्राहम ने उल्लेख किया कि पाकिस्तान के वकील ने यह दलील दी है कि जाधव को अगस्त तक फांसी नहीं दी जाएगी, लेकिन यह आश्वासन नहीं दिया है कि उसके बाद उसे फांसी नहीं दी जाएगी. अदालत ने यह भी कहा कि जाधव तक राजनयिक पहुंच प्रदान की जानी चाहिए, जिसकी भारत ने मांग की है.