डोनाल्ड ट्रंप ने दी अमेरिकी मदद में कटौती की धमकी, तो फिलिस्तीन ने कहा- हम ब्लैकमेल नहीं होंगे

फिलिस्तीनी शरणार्थियों के लिए संयुक्त राष्ट्र राहत एवं कार्य एजेंसी को दिए जाने वाली रकम में अमेरिका सबसे बड़ा योगदान करता है. इसने 2016 में 368,000,000 डॉलर से अधिक दिया.

डोनाल्ड ट्रंप ने दी अमेरिकी मदद में कटौती की धमकी, तो फिलिस्तीन ने कहा- हम ब्लैकमेल नहीं होंगे
अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप. (फाइल फोटो)

वॉशिंगटन: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इजरायल के साथ शांति वार्ता बहाल नहीं करने तक फलस्तीन को दी जाने वाली वित्तीय सहायता में कटौती करने की धमकी दी है. साथ ही, उन्होंने यरूशलम को इजरायल की राजधानी के तौर पर मान्यता देने के अपने फैसले पर वैश्विक नाराजगी को भी खारिज कर दिया. फिलिस्तीनी शरणार्थियों के लिए संयुक्त राष्ट्र राहत एवं कार्य एजेंसी को दिए जाने वाली रकम में अमेरिका सबसे बड़ा योगदान करता है. इसने 2016 में 368,000,000 डॉलर से अधिक दिया. अमेरिका फिलिस्तीनियों का सबसे बड़ा वित्त प्रदाता है. ट्रंप ने पिछले महीने यरुशलम को इजरायल की राजधानी के तौर पर मान्यता दी थी, जबकि अरब नेताओं ने इसके खिलाफ चेतावनी दी थी.

फिलिस्तीनी पूर्वी यरूशलम को अपने भविष्य की राजधानी के तौर पर देखते हैं. ट्रंप ने बीती रात ट्वीट कर कहा, ‘‘हम फिलिस्तीन को प्रत्येक वर्ष करोड़ों डॉलर देते हैं और बदले में हमें कोई आदर या प्रसंशा नहीं मिलती. वे इजरायल के साथ लंबित शांति समझौता पर बात तक करने के लिए राजी नहीं है.’’ उन्होंने कहा, ‘‘हमनें वार्ता के सबसे कठिन हिस्से यरुशलम को बातचीत से अलग कर दिया, इजरायल को इसके लिये ज्यादा कीमत चुकानी होगी. लेकिन फिलिस्तीन के शांति वार्ता के लिए राजी नहीं होने की सूरत में क्यों हम उन्हें भविष्य में इस तरह के भारी भुगतान करें.’’

Palestine United States Donald Trump Jerusalem Israel

ट्रंप के पिछले महीने के फैसले ने फिलिस्तीनी राष्ट्रपति महमूद अब्बास को अमेरिकी उप राष्ट्रपति माइक पेंस के साथ दिसंबर में बैठक करने की एक योजना रद्द करने के लिए प्रेरित किया. वहीं, संयुक्त राष्ट्र में अमेरिकी राजदूत निक्की हेली ने 3 जनवरी को कहा कि यदि फिलिस्तीन शांति समझौते से इनकार करता रहा तो अमेरिका सहायता में कटौती करेगा.

निक्की ने न्यूयॉर्क में संरा मुख्यालय में कहा, ‘‘मेरा मानना है कि राष्ट्रपति ने मूल रूप से यह कहा है कि जब तक फिलिस्तीन शांति वार्ता के लिए राजी नहीं हो जाता वह कोई अतिरिक्त धन नहीं देना चाहते या सहायता को रोकना चाहते हैं .’’ फिलिस्तीन को मिलने वाली अमेरिकी सहायता का मकसद अमेरिकी कांग्रेस के हित वाली कम से कम तीन अमेरिकी नीतियों का प्रचार - प्रसार करना है.

इसबीच, रामल्ला से प्राप्त एएफपी की खबर के मुताबिक फिलिस्तीन ने कहा कि ट्रंप की धमकी से यह ब्लैकमेल नहीं होगा. फिलिस्तीनी नेताओं ने 3 जनवरी को कहा कि वित्तीय सहायता में कटौती किए जाने की ट्रंप की धमकी के बाद वे ब्लैकमेल नहीं होंगे. अब्बास के प्रवक्ता ने कहा कि वे लोग वार्ता के खिलाफ नहीं हैं, लेकिन वार्ता अंतरराष्ट्रीय कानून और प्रस्तावों के आधार पर होनी चाहिए, जिसने पूर्वी यरुशलम राजधानी वाले एक स्वतंत्र फिलिस्तीन देश को मान्यता दी है. नाबिल अबू रुदेना ने कहा, ‘‘यरुशलम फिलिस्तीन की स्थायी राजधानी है. ’’ वरिष्ठ फलस्तीनी अधिकारी हनान अशरावी ने एक बयान में कहा, ‘‘हम ब्लैकमेल नहीं होंगे.’’

(इनपुट एजेंसी से भी)

By continuing to use the site, you agree to the use of cookies. You can find out more by clicking this link

Close