‘ऐसा पहली बार हुओ है सतरा अठरा सालों मे अनदेखा अनजाना कोई आने लगा खयालों मे आँखो की खिडकी पर एक साया सा लहराता है गहरी गहरी काली आँखे मुझसे मुझको पुछती है हाथों की रोखाओं मे एक चेहरा सा बन जाता है उसकी साँसे रेशम जैसे गालों को छू जाती है उसके हाथों की खुशबू है अब तक मेरे बालो में ऐसा पहली बार हुओ है सतरा अठरा सालों मे अनदेखा अनजाना कोई आने लगा खयालों मे’
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