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महाराष्ट्र का पावर सेंटर बनी NCP, शिवसेना हो या BJP दोनों इसी के बूते आजमा रहे दांव!

महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव (Maharashtra Assembly Elections 2019) में भले ही बीजेपी (BJP)+शिवसेना (Shiv Sena) गठबंधन की जीत हुई है, लेकिन देवेंद्र फडणवीस की अगुवाई में सरकार बनाने का रास्ता अभी भी असमंजस में है. शिवसेना और बीजेपी के बीच जारी तनातनी में राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (NCP) पावर सेंटर बनी हुई है. आइए समझते हैं-:

महाराष्ट्र का पावर सेंटर बनी NCP, शिवसेना हो या BJP दोनों इसी के बूते आजमा रहे दांव!
महाराष्ट्र में भले ही शिवसेना+बीजेपी गठबंधन की जीत हुई है, लेकिन सरकार गठन का काम अभी भी अटका हुआ है.

नई दिल्ली: महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव (Maharashtra Assembly Elections 2019) में भले ही बीजेपी (BJP)+शिवसेना (Shiv Sena) गठबंधन की जीत हुई है, लेकिन देवेंद्र फडणवीस की अगुवाई में सरकार बनाने का रास्ता अभी भी असमंजस में है. चुनाव रिजल्ट आने के तुरंत बाद शिवसेना (Shiv Sena) प्रमुख उद्धव ठाकरे ने प्रेस कॉन्फ्रेंस करके स्पष्ट कर दिया था कि वह ढाई-ढाई साल मुख्यमंत्री पद के फॉर्मूले से कम में मानने वाले नहीं हैं. शनिवार को शिवसेना (Shiv Sena) विधायकों की हुई बैठक में भी इसी फॉर्मूले पर अड़े रहने की बात कही गई. शिवसेना (Shiv Sena) ने साफ तौर से कहा है कि वह 50-50 के लिखित फॉर्मूले के आश्वासन पर ही बीजेपी (BJP) के साथ सरकार बनाएंगे. शिवसेना (Shiv Sena) दावा कर रही है कि लोकसभा चुनाव से पहले दोनों दलों के बीच हुई बैठक में ही 50-50 का फॉर्मूला तय हो गया था. शिवसेना (Shiv Sena) कार्यकर्ता मुंबई में कई जगह आदित्य ठाकरे को मुख्यमंत्री बनाने के लिए पोस्टर भी लगा चुके हैं.

वहीं दूसरी तरफ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Narendra Modi) खुद दिल्ली स्थित बीजेपी (BJP) मुख्यालय से घोषणा कर चुके हैं कि महाराष्ट्र में देवेंद्र फडणवीस की अगुवाई में ही सरकार बनेगी. वहीं सीएम देवेंद्र फडणवीस भी कह चुके हैं उन्हें बहुमत मिला है और उनके संपर्क में दूसरे दलों के करीब 15 विधायक हैं. 

अगर आप शिवसेना (Shiv Sena) और बीजेपी (BJP) की ओर से शक्ति दिखाने की इस लड़ाई में पावर सेंटर की तलाश करेंगे तो आपकी खोज राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (NCP) पर जाकर ठहरेगी. महाराष्ट्र की राजनीति में भी ये अजब-गजब खेल देखने को मिल रहा है. जनता ने इस तरह से वोट दिए हैं कि सरकार बनाने के कई विकल्प मौजूद हैं. शिवसेना (Shiv Sena) ताव दिखा रही है कि अगर बीजेपी (BJP) उनकी पार्टी के मुख्यमंत्री की शर्त को नहीं मानती है तो उनके पास एनसीपी से हाथ मिलाने का विकल्प मौजूद है. वहीं बीजेपी (BJP) को 2014 की तरह उम्मीद है कि अगर शिवसेना (Shiv Sena) उन्हें दगा देती है तो एनसीपी खेवनहार बनने के लिए तैयार बैठी है.

दबाव की राजनीति के इस खेल में दिलचस्प बात यह है कि जिस एनसीपी के बूते शिवसेना (Shiv Sena) और बीजेपी (BJP) हिम्मत दिखा रही है वह बिल्कुल ही शांत है. एनसीपी प्रमुख शरद पवार ने कहा है कि जनता ने उन्हें और कांग्रेस के गठबंधन को बहुमत नहीं दिया है, इसलिए वह मजबूत विपक्ष की भूमिका निभाना ही पसंद करेंगे. हालांकि राजनीति की बिसात में कहा जाता है कि जो चाल सामने से चली जाती है उसका नफा-नुकसान बाद में दिखता है. एनसपी भले ही विपक्ष में बैठने की बात कह रही है, लेकिन सहयोगी कांग्रेस की तरफ से बयान आ रहा है कि अगर शिवसेना (Shiv Sena) बीजेपी (BJP) से अलग होती है तो वह उन्हें सपोर्ट करने से गुरेज नहीं करेगी. महाराष्ट्र में सरकार बनाने के कई विकल्प हैं, आइए जरा उनपर एक नजर डालते हैं.

बीजेपी+शिवसेना= महाराष्ट्र सरकार
विधानसभा चुनाव में जनता ने बीजेपी (BJP)+शिवसेना (Shiv Sena) गठबंधन को पूर्ण बहुमत दिया है. दोनों दलों ने मिलकर 162 सीटें जीती हैं. जबकि 288 सीटों वाले विधानसभा में बहुमत का आंकड़ा 144 ही है. सरकार बनाने के इस विकल्प में शिवसेना (Shiv Sena) ढाई साल मुख्यमंत्री के पद पर अड़ी है. वहीं सबसे ज्यादा 105 सीटें जीतने वाली बीजेपी (BJP) अपना मुख्यमंत्री बनाना चाहती है. देखना होगा जब दोनों पार्टियां आपस में बात करती हैं तो आपस में क्या समझौता करती हैं.

शिवसेना+एनसीपी+कांग्रेस (बैक सपोर्ट)= महाराष्ट्र सरकार
शिवसेना (Shiv Sena) अगर बीजेपी (BJP) से अलग होती है तो वह एनसीपी के साथ मिलकर सरकार बना सकती है. एनसीपी के 54 और शिवसेना (Shiv Sena) के 56 विधायक हैं. दोनों दलों को मिलाकर 110 का आंकड़ा पहुंचता है. ऐसे में 44 सीट जीतने वाली कांग्रेस इन्हें बैक से सपोर्ट कर देती है तो इनका आंकड़ा 154 पहुंच जाएगा, जो बहुमत के आंकड़े 144 से ज्यादा है. इस विकल्प में बीजेपी (BJP) को रोकने के लिए कांग्रेस और एनसीपी शिवसेना (Shiv Sena) को मुख्यमंत्री का पद भी दे सकती है.

बीजेपी+एनसीपी= महाराष्ट्र सरकार
महाराष्ट्र में सरकार बनाने का एक विकल्प बीजेपी (BJP) और एनसीपी की दोस्ती में भी छिपी है. बीजेपी (BJP) के 104 विधायक हैं और एनसीपी के 54 दोनों को जोड़ दें तो यह आंकड़ा 158 तक पहुंच जाता है. इस विकल्प की बात इसलिए हो रही है क्योंकि साल 2014 के विधानसभा चुनाव के बाद जब शिवसेना (Shiv Sena) ने बीजेपी (BJP) के साथ सरकार बनाने से इनकार किया था तब एनसीपी उन्हें सपोर्ट देने को तैयार हो गई थी. हालांकि बाद में शिवसेना (Shiv Sena) के नरम पड़ने से यह विकल्प मूर्त नहीं हो पाया था. 

यहां गौर करने वाली बात यह है प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Narendra Modi) भले ही चुनाव प्रचार के दौरान एनसीपी को नेशनल क्रप्ट पार्टी कहकर संबोधित करते हैं, लेकिन बारामती में जब रैली करने जाते हैं तो वह शरद पवार की तारीफ करने से भी नहीं चूकते हैं. मोदी सरकार में ही एनसीपी प्रमुख शरद पवार को पदम पुरस्कार से भी सम्मानित किया गया था. राजनीति के जानकार मानते हैं कि महाराष्ट्र में शरद पवार और उत्तर प्रदेश में मुलायम सिंह यादव की राजनीति का पैटर्न करीब-करीब एक जैसा ही है. दोनों नेता अपने-अपने गढ़ में काफी मजबूत हैं. पवार को मराठाओं का भरपूर समर्थन मिलता है तो मुलायम को यादवों का. इसके अलावा दोनों नेता कब राजनीतिक पलटी मार दें कोई नहीं समझ सकता है. 

अब देखना दिलचस्प होगा कि इन तीन में किस विकल्प के जरिए महाराष्ट्र में सरकार बनती है. हालांकि राजनीति के जानकार मानते हैं कि शिवसेना (Shiv Sena) और बीजेपी (BJP) जब मिल बैठकर बात करेंगे तो दोनों आपस में सरकार बनाने का विकल्प तलाश लेंगे.