तेलंगाना चुनाव 2018: 'शादी मुबारक' और 'कल्याण लक्ष्मी' ने दिलाया KCR को प्रचंड बहुमत

शादी मुबारक योजना मुस्लिम समुदाय के लिए है, जबकि कल्याण लक्ष्मी बाकी समुदायों के लिए है. इन योजनाओं के तहत लड़कियों की शादी पर एक लाख रुपये का उपहार दिया जाता है.

तेलंगाना चुनाव 2018: 'शादी मुबारक' और 'कल्याण लक्ष्मी' ने दिलाया KCR को प्रचंड बहुमत
टीआरएस प्रमुख के चंद्रशेखर राव ने तेलंगाना में भारी जीत दर्ज की है.

पांच राज्यों के विधानसभा चुनावों में तेलंगाना ऐसा राज्य है, जहां जनादेश एकदम स्पष्ट है. यहां के चंद्रशेखर राव (केसीआर) की पार्टी तेलंगाना राष्ट्र समिति (टीआरएस) 119 सीटों की विधानसभा में खबर लिखे जाने तक 90 सीटों पर बढ़ बनाए हुए थी. राज्य में टीआरएस की इस प्रचंड जीत में राज्य के मुख्यमंत्री केसीआर की दो योजनाओं का खास योगदान रहा. ये योजनाएं हैं 'शादी मुबारक' और 'कल्याण लक्ष्मी'. शादी मुबारक योजना मुस्लिम समुदाय के लिए है, जबकि कल्याण लक्ष्मी बाकी समुदायों के लिए है. इन योजनाओं के तहत लड़कियों की शादी पर एक लाख रुपये का उपहार दिया जाता है.

इसके अलावा टीआरएस की एक खासियत रही है कि उसने पूरे राज्य को अपनी पार्टी के गुलाबी रंग और अपने पोस्टर बैनर से पाट दिया. टीआरएस का प्रचार इतना अधिक है कि मुकाबले में कोई दूसरी पार्टी नजर ही नहीं आती. जानेमाने पत्रकार शेखर गुप्ता ने दि प्रिंट में लिखा, 'मैं इतने वर्षों से चुनावों पर नज़र रखता आ रहा हूं, मगर मैंने इससे पहले कभी नहीं देखा कि किसी एक राजनीतिक दल ने पूरे चुनावी परिदृश्य को इस तरह अपने रंग में रंग दिया हो.'

अनोखी चुनाव रणनीति 
टीआरएस ने विपक्ष पर कोई हमला नहीं किया और न कोई नया चुनावी वादा किया. पार्टी ने लोगों को सिर्फ ये बताया कि उनके कल्याण के लिए क्या-क्या किया जा चुका है. शेखर गुप्ता अपने लेख में आगे कहते हैं, 'लेकिन क्या केसीआर की योजनाएं लागू की जा सकती हैं? क्या उनके राज्य का वित्तीय घाटा बेकाबू नहीं हो रहा है? इस सवाल पर उनका जवाब था, 'बकवास... सब बकवास. ये घाटा क्या है? दुनिया मेँ किस देश का घाटा सबसे ज़्यादा है? अमेरिका का. उसके बाद जापान है. और चीन का क्या हाल है? लोगों को कुछ पता तो होता नहीं और बस बातें करते रहते हैं.' 

इसके अतिरिक्त राज्य में गरीबों के लिए दो बेडरूम फ्लैट बनाने की योजना भी है, जिसका नाम है- 'टू बीएचके योजना.' अपने पहले कार्यकाल में वे ऐसे पांच लाख फ्लैट बनवा रहे हैं. जब उनसे पूछा जाता है कि प्रधानमंत्री मोदी की 'प्रधानमंत्री आवास योजना' का वे क्या कर रहे हैं, तो उनका जवाब मिलता है, 'यह बकवास योजना है. मोदी जो एक कमरे के मकान दे रहे हैं उनमें महिलाएं भला अपने कपड़े कहां बदलेंगी?'

कहां से आया योजनाओं के लिए पैसा? 
शेखर गुप्ता सवाल करते हैं, 'लेकिन क्या वे साढ़े सात-सात लाख वाले टू बीएचके फ्लैट बनवाने का खर्च उठा सकते हैं? तो ज़रा उनके कुछ प्रयोगों पर गौर कीजिए. वे इनके लिए सरकारी ज़मीन उपलब्ध करा रहे हैं, सीमेंट पर टैक्स माफ कर रहे हैं, तापविद्युत संयंत्रों से उपलब्ध राख से बनने वाली ईंटों का उपयोग कर रहे हैं, और 'प्रधानमंत्री आवास योजना' के तहत हर मकान के लिए मिलने वाली 1.5 लाख रु. की मदद को 7.5 लाख की लागत में इस्तेमाल कर रहे हैं.'

इसके अलावा कई दूसरी योजनाएं भी हैं. उन्होंने अच्छे, निःशुल्क सेवाएं देने वाले सरकारी अस्पताल बनवाए हैं. गर्भवती महिलाओं के लिए अस्पताल पहुंचाने तथा घर छोड़ने की मुफ्त एंबुलेंस सेवा भी उपलब्ध कारवाई है, जो कॉल सेंटर के जरिए बुलाए जा सकते हैं. अस्पताल से घर लौटने वाली हर प्रसूता और शिशु को तीन महीने तक काम आने वाले कपड़ों और सफाई के सामान के अलावा खिलौने से भरा एक मझोले आकार का बक्सा भेंट किया जाता है. बेशक इस बक्से को 'केसीआर किट' नाम दिया गया है और इसके ऊपर गुलाबी रंग के ऊपर उनका एक बड़ा चित्र बना होता है. 

किसानों को राहत देने के लिए 'रैयतु बंधु योजना' है. इसके तहत तेलंगाना किसानों को हर साल प्रति एकड़ प्रति फसल सीधे 4000 रु. देता है, चाहे उनके पास कितनी भी ज़मीन हो. पिछले साल उसने इस योजना पर 12,000 करोड़ रु. खर्च किए. शेखर गुप्ता कहते हैं कि केसीआर की अर्थनीति में हर किसी के लिए कुछ-न-कुछ है. यही वजह है कि तेलंगाना में केसीआर का जादू सिर चढ़कर बोल रहा है.