कुंडली देखकर नहीं तय होंगी तेलंगाना में चुनाव की तारीखें : चुनाव आयोग

चुनाव आयोग के पास छह माह के अंदर चुनाव कराने की सिफारिश करने का अधिकार

कुंडली देखकर नहीं तय होंगी तेलंगाना में चुनाव की तारीखें : चुनाव आयोग
राज्यपाल विधानसभा भंग करने के बारे में चुनाव आयोग को औपचारिक रूप से सूचित करेंगे. (फाइल फोटो)
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नई दिल्‍ली: तेलंगाना के विधानसभा चुनाव अन्‍य 4 राज्‍यों में होने वाले चुनाव के साथ कराने के कयास पर मुख्‍य चुनाव आयुक्‍त ने विराम लगा दिया है. मुख्‍य चुनाव आयुक्‍त ओपी रावत ने शुक्रवार को कहा कि तेलंगाना चुनाव का वक्‍त ज्‍योतिषीय गणना के आधार पर तय नहीं किया जा सकता. तेलंगाना में गुरुवार को विधानसभा भंग कर दी गई है.

समाचार एजेंसी एएनआई से रावत ने कहा कि हम इस बात का आकलन करेंगे कि 4 राज्‍यों का चुनाव तेलंगाना चुनाव के साथ कराना संभव है या नहीं. चुनाव की तारीखों का ऐलान किसी की ज्‍योतिषीय गणना के आधार पर संभव नहीं है. टीआरएस सरकार ने गुरुवार को राज्य विधानसभा को उसके निर्धारित समय से कुछ महीने पहले ही भंग करने की सिफारिश की है. टीआरएस को उम्मीद है कि पार्टी प्रमुख के चंद्रशेखर राव के करिश्मे और बिखरे विपक्ष की वजह से वह लगातार दूसरी बार सत्ता में आ जाएगी. माना जा रहा है कि पार्टी लोकसभा एवं विधानसभा चुनाव एक साथ होने की स्थिति में ‘‘केसीआर बनाम मोदी’’ मुकाबले को भी टालना चाहती थी. 

बैठक में उठ सकता है तेलंगाना चुनाव का मुद्दा
चुनाव आयोग के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि निर्वाचन आयोग हर मंगलवार और शुक्रवार को कई मुद्दों पर चर्चा करने के लिए बैठक करता है. बैठक में इस दक्षिणी राज्य में चुनाव आयोजित करने का मुद्दा उठ सकता है. अधिकारी ने बताया, 'अंतिम निर्णय से पहले त्योहार, परीक्षाएं और मौसम की स्थिति जैसे मुद्दों पर चर्चा होगी.' तेलंगाना विधानसभा का कार्यकाल जून 2019 तक था.

केसीआर ने की थी विधानसभा भंग करने की सिफारिश
मुख्यमंत्री के चंद्रशेखर राव नीत सरकार द्वारा विधानसभा भंग करने की सिफारिश के बाद अब निगाहें राज्यपाल ईएसएल नरसिम्हन पर हैं. उम्मीद है कि वह राज्य के राजनीतिक घटनाक्रम पर केंद्र को एक रिपोर्ट सौंपेंगे. अधिकारियों के अनुसार उम्मीद है कि राज्यपाल राज्य की विधानसभा भंग किए जाने के बारे में चुनाव आयोग को औपचारिक रूप से सूचित करेंगे और छह महीनों के अंदर चुनाव कराने की सिफारिश करेंगे. गृह मंत्रालय के एक अधिकारी ने कहा कि यह चुनाव आयोग पर है कि वह 4 अन्य राज्यों राजस्थान, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ और मिजोरम के साथ ही यहां भी विधानसभा चुनाव कराए. अधिकारी ने स्पष्ट किया कि चुनाव आयोग के पास छह महीने यानी मार्च की शुरुआत तक का समय चुनाव कराने के लिए है.