दिनेश पाठक

आप अपने बच्चों को कितना जानते हैं?

आप अपने बच्चों को कितना जानते हैं?

कोरोना के इस कठिन काल में बहुत कुछ बदला है. घर-परिवार का माहौल भी और समाज का भी. अब परेशान सब हैं. इस बीच मेरी मुलाकात कुछ ऐसे पैरेंट्स से हुई जो अपने बच्चों के लिए कुछ भी करने पर आमादा हैं.

बच्चों की परवरिश मां-बाप दोनों की जिम्मेदारी, एक से नहीं चलेगा काम

बच्चों की परवरिश मां-बाप दोनों की जिम्मेदारी, एक से नहीं चलेगा काम

नई दिल्ली : पिछले हफ्ते का वाकया है, एक दंपत्ति मेरे पास आये और बोले कि बेटे की जरा सी न सुनो तो बार-बार पुलिस के पास जाने की धमकी देता है.

खेलने की उम्र में बच्चों से छीन रहे हैं बचपन, सुविधा नहीं 'भावनात्मक लगाव' दीजिए

खेलने की उम्र में बच्चों से छीन रहे हैं बचपन, सुविधा नहीं 'भावनात्मक लगाव' दीजिए

नई दिल्ली: बाजारवाद के चक्कर में गली-मोहल्लों में खुले प्री स्कूलों में दो-दो, ढाई-ढाई साल के मासूमों (Children) को भेजकर पैरेंट्स (Parents) न जाने कौन सी शिक्षा दे और दिला रहे हैं

बच्चे को उसके मन की सुनने दें, इसी में है सबका फायदा

बच्चे को उसके मन की सुनने दें, इसी में है सबका फायदा

बीते दिनों ऑनलाइन माध्यम से मेरी मुलाकात वृंदावन के एक ऐसे दंपत्ति से हुई जो इंटर पास अपने इकलौते मेधावी बच्चे की आगे की पढ़ाई को लेकर परेशान था.

पैरेंट्स बच्चों की जरूरत और इच्छाओं के बीच फर्क क्यों नहीं करना चाहते?

पैरेंट्स बच्चों की जरूरत और इच्छाओं के बीच फर्क क्यों नहीं करना चाहते?

पीड़ा भी खुशी देती है, ऐसा आपने शायद सुना न हो. पीड़ा तो पीड़ा ही है. उससे भला खुशी कैसे मिल सकती है? पर यह सच है और आज का केंद्र यही मुद्दा है.

कोरोना काल में बच्चों के लालन-पालन के लिए ये बात है सबसे जरूरी

कोरोना काल में बच्चों के लालन-पालन के लिए ये बात है सबसे जरूरी

यंग पैरेंट हैं नमिता-अमित. इसी वर्ष मार्च में इस दंपत्ति के आंगन में पहली संतान का आगमन हुआ है. पिछले सप्ताह डिजिटल माध्यम से नमिता-अमित से मेरी मुलाकात हुई.

आखिर कौन लिख रहा बच्चों के कोरे मन पर 'गंदी' बातें?

आखिर कौन लिख रहा बच्चों के कोरे मन पर 'गंदी' बातें?

आचार्य विनोवा भावे जी की मशहूर पंक्ति है-बच्चे मन के सच्चे, बाकी सब कच्चे. अन्य विद्वतजन भी इस लाइन को अपने-अपने शब्दों में कहते-सुनते दिख जाते हैं- बच्चे कोरे कागज की तरह होते हैं.

लखनऊ की घटना ने झकझोर दिया, आखिर क्यों दरिद्र होते जा रहे 'पैरेंट्स'?

लखनऊ की घटना ने झकझोर दिया, आखिर क्यों दरिद्र होते जा रहे 'पैरेंट्स'?

लखनऊ के अतिमहत्वपूर्ण इलाके में रेलवे अधिकारी की पत्नी और बेटे की हत्या ने सभी को चौंका दिया.