सुभाष ढल

कोरोना के बीच सुनसान पड़े ताज से एक साक्षात्कार

कोरोना के बीच सुनसान पड़े ताज से एक साक्षात्कार

जीवन में विडंबना का भी एक संयोग है. यदि यह कहें कि सकारात्मकता के साथ नकारात्मकता का समावेश ही जीवन है तो अनुचित नहीं होगा. अगर पनघट की चहल-पहल है तो मरघट का सन्नाटा भी जीवन में देखने को मिलता है.