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नए सीएसडी नियम से आर्मी ऑफिसर्स को झटका, 8 साल में ले सकेंगे एक ही कार

सेना मुख्यालय के क्वार्टर मास्टर जनरल ब्रांच ने 24 मई को कार खरीदने के लिए जो नए निर्देश जारी किए हैं उसपर नया विवाद खड़ा हो गया है. सेना मुख्यालय का कहना है कि सरकारी खजाने का दुरुपयोग रोकने के लिए ये कदम उठाना जाना जरूरी था.

नए सीएसडी नियम से आर्मी ऑफिसर्स को झटका, 8 साल में ले सकेंगे एक ही कार

नई दिल्ली : सेना मुख्यालय के क्वार्टर मास्टर जनरल ब्रांच ने 24 मई को कार खरीदने के लिए जो नए निर्देश जारी किए हैं उसपर नया विवाद खड़ा हो गया है. सेना मुख्यालय का कहना है कि सरकारी खजाने का दुरुपयोग रोकने के लिए ये कदम उठाना जाना जरूरी था. इस निर्देश के मुताबिक सीएसडी यानि कैंटीन सर्विस डिपार्टमेंट से कोई अफसल 8 साल में केवल एक बार कार खरीद पाएगा. साथ ही ये कार 2500 सीसी से कम इंजन पावर वाली और 12 लाख रुपये से कम कीमत की होगी.

सरकारी खजाने का दुरुपयोग रोकने को उठाया कदम
जवानों के लिए ये सीमा 1400 सीसी और 5 लाख रुपये की होगी. सेना मुख्यालय के मुताबिक ये कदम सरकारी खजाने के दुरुपयोग को रोकने के लिए उठाया जा रहा है. सेना मुख्यालय के सूत्रों का कहना है कि पिछले कुछ समय से देखा जा रहा था कि सीएसडी की सुविधा का दुरुपयोग हो रहा था. सीएसडी से कार खरीदने पर 50 हजार से लेकर 1.5 लाख तक का फायदा होता है. ऐसा इसलिए क्योंकि सरकार सीएसडी में खरीदारी करने पर टैक्स में 50 फीसदी तक की छूट देती है. यानि हर खरीद पर सरकार को 50 प्रतिशत टैक्स का घाटा होता है.

देश में कारों की बिक्री में 17 प्रतिशत की कमी आई
पिछले साल यानि वित्तीय वर्ष 2018-19 में पूरे देश में कारों की बिक्री में 17 प्रतिशत की कमी आई लेकिन सीएसडी में कार की बिक्री में 20 फीसदी का उछाल आया. सीएसडी में पिछले साल हुई बिक्री में एक-तिहाई केवल कार की बिक्री थी. ऐसे भी मामले सामने आए जब सीएसडी से सस्ते में ख़रीदी गई कार को बेच कर सीएसडी से ही दूसरी कार ख़रीद ली गई.

पूरे देश में 34 एरिया डिपो
सीएसडी की शुरुआत 1948 में सैनिकों को सस्ते दामों पर सामान मुहैया कराने के लिए की गई थी. आज पूरे देश में 34 एरिया डिपो हैं जहां से पूरे देश में हर सैनिक छावनी में सामान भेजा जाता है. इसके लिए सरकार हर साल 17000 करोड़ का बजट देती है. सीएसडी कैंटीन की सुविधा सैनिक सेवा के आकर्षणों में से एक है. लेकिन इस सुविधा का दुरुपयोग भी होता है और सेना मुख्यालय इस रोकने की कोशिश कर रहा है.

सेना मुख्यालय के कई फैसलों का सेना के कुछ लोग विरोध कर रहे हैं. इन फैसलों में गैरज़रूरी सैनिक मेसों को बंद करना, आवश्यकता न होने पर बड़े अधिकारियों की यात्राओं में कटौती करना, बड़े अधिकारियों के घरों में बड़ी तादाद में अर्दलियों या सहायकों को रखने पर रोक लगाना शामिल हैं. सेना मुख्यालय के एक अधिकारी के मुताबिक ये फैसले सैनिकों के बलिदान और कठिन नौकरी के एवज़ में मिलने वाली सुविधाओं की बरबारी और दुरुपयोग को हर हाल में रोका जाएगा.