Dr Lokendra Singh Kot

सुनिए जी... किताबें कुछ कहना चाहती हैं

सुनिए जी... किताबें कुछ कहना चाहती हैं

किताबें करती हैं बातें बीते ज़मानों की दुनिया की इंसानों की आज की कल की एक एक पल की ख़ुशियों की ग़मों की फूलों की बमों की जीत की हार की