Jairam Shukla

 'नीरज' स्मृति शेष: कुछ सपनों के मर जानें से जीवन नहीं मरा करता है..!

'नीरज' स्मृति शेष: कुछ सपनों के मर जानें से जीवन नहीं मरा करता है..!

नीरज जी दिल में उतर जाने वाले साहित्यिक मनीषी थे. कवि सम्मेलनों के गैंगबाजी वाले दौर में भी, वे वैसे के वैसे ही रहे जैसे दिनकर, बच्चन के जमाने में थे.

इमरजेंसी : जब छात्रों की हुंकार ने सिंहासन हिला दिया

इमरजेंसी : जब छात्रों की हुंकार ने सिंहासन हिला दिया

कांग्रेस के अध्यक्ष देवकांत बरुआ का नारा इंदिरा इज इंडिया गली कूंचों तक गूँजने लगा. इसी बीच मध्यप्रदेश में पीसी सेठी को हटाकर श्यामाचरण शुक्ल को मुख्यमंत्री बनाया गया.

जो कबिरा काशी मरै रामहि कौन निहोर

जो कबिरा काशी मरै रामहि कौन निहोर

मेरे कई मित्र स्नेहवश अक्सर कहा करते हैं कि आप जैसे आदमी को दिल्ली, मुंबई में होना चाहिए यहां कहा घूमफिर के रीवा में घुसे रहते हैं.

आपातकाल की याद- एक और नसबंदी ने पासा पलट दिया

आपातकाल की याद- एक और नसबंदी ने पासा पलट दिया

पंद्रह अगस्त, छब्बीस जनवरी यदि सरकारी आयोजन न होते तो पब्लिक इन्हें कब का भुला चुकी होती. लेकिन आपातकाल पर मेरे दो नजरिए हैं, एक- जो मैंने देखा, दूसरा जो मैंने पढ़ा और सुना.

पुण्य स्मृति : अलग ही माटी के बने थे यमुना शास्त्री

पुण्य स्मृति : अलग ही माटी के बने थे यमुना शास्त्री

राजनीति और नेतागिरी आज जिस पतनशीलता के दौर से गुजर रही है, आम-आदमी के मुद्दे कारपोरेट के डस्टबिन में डाले जा रहे हैं. ऐसे में यमुना प्रसाद शास्त्री की रह-रहकर याद आना स्वाभाविक है.

स्मृति : राजकपूर, कादंबरी और आनंद रघुनंदन

स्मृति : राजकपूर, कादंबरी और आनंद रघुनंदन

वक्त की रफ्तार के साथ इन पिछले पंद्रह दिनों में बहुत कुछ हो गया. प्रणब मुखर्जी नागपुर जाकर संघ के दीक्षांत समारोह में बोल आए, मीडिया की अपेक्षा के विपरीत कोई राजनीतिक वज्रपात नहीं हुआ.

अपनी "सोच" से बाहर निकलिए

अपनी "सोच" से बाहर निकलिए

मुगलसराय जंक्शन अब पं.दीनदयाल उपाध्याय के नाम से जाना जाएगा. यह सुनते ही कई योद्धा विचलित हो गए. कह रहे हैं इतिहास को भगवा रंग ओढाया जा रहा है हम इसे बर्दाश्त नहीं कर सकते.

बढ़ता ही जा रहा है धरती माता का बुखार

बढ़ता ही जा रहा है धरती माता का बुखार

इस साल धरती माता पिछले साल से ज्यादा तपीं. हरीतिमा से ढके भोपाल का पारा 45 सेल्सियस तक झूलता रहा.

Opinion : फिलहाल कांग्रेस की गति और नियति

Opinion : फिलहाल कांग्रेस की गति और नियति

कर्नाटक के असमंजस भरे चुनाव परिणाम के बीच सरकार कौन बनाएगा? इससे ज्यादा यदि चर्चा किसी बात पर हो रही है तो वह कांग्रेस की अधोगति और राहुल गांधी की नियति को लेकर.

Opinion : इस पाखंड पुराण से देश का भला होने वाला नहीं

Opinion : इस पाखंड पुराण से देश का भला होने वाला नहीं

हमारे नेताओं के पाखंड़ी आचरण का दुनिया भर में कोई जोड़ नहीं. चुनाव के सीजन के साथ ही नए-नए प्रपंच शुरू हो गए. ताजा प्रपंच है दलितों के घर जाकर भोजन करने का.