विनय उपाध्याय

विश्व रंगमंच दिवस : भरोसा अब भी कायम है...

विश्व रंगमंच दिवस : भरोसा अब भी कायम है...

दौर मीडिया की महिमा का है, होड़ का है, रिझाने का है, वर्चस्व का है. और इन सबके केन्द्र में है- अवाम.

स्मृति शेष: पं. ओमप्रकाश चौरसिया; सुरीली ख्वाहिशें और कुछ कतरे रोशनी के

स्मृति शेष: पं. ओमप्रकाश चौरसिया; सुरीली ख्वाहिशें और कुछ कतरे रोशनी के

सच्चे साधकों ने भला कब अपनी साधना के दिन गिने हैं. लेकिन समय और समाज की आंखों ने उनकी तपस्या को कभी अलक्षित नहीं होने दिया.

रंग सप्तक: कला लेखन की कंजूस फ़िक्रें...

रंग सप्तक: कला लेखन की कंजूस फ़िक्रें...

अनेक प्रतिज्ञाओं के साथ सामाजिक-सांस्कृतिक आंदोलन और मिशन के रूप में शुरू हुई भारतीय पत्रकारिता के मूल में वस्तुतः साहित्य और संस्कृति की गहरी संवेदनाएं ही रही हैं लेकिन इधर आज़ादी के बाद पत्रकारिता

खजुराहो नृत्य समारोह (20 से 26 फरवरी): रंगपटल पर लय-गतियों का राग

खजुराहो नृत्य समारोह (20 से 26 फरवरी): रंगपटल पर लय-गतियों का राग

‘‘मैं धूल भरे, अलसाये छोटे से गांव की ओर खिंची चली जाती हूं. लगता है कि यह सदी और चंदेल अप्सराओं की गाथाएं जैसे एक-दूसरे में प्राण फूंक रही हों.

अज़ीम शायर निदा फाज़ली : कहीं सपना ज़िंदा है...

अज़ीम शायर निदा फाज़ली : कहीं सपना ज़िंदा है...

वही है ज़िंदा/गरजते बादल/सुलगते सूरज/छलकती नदियों के साथ है जो खुद अपने कदमों की धूप है जो/खुद अपनी आंखों की रात है जो

रंग सप्तक : जीवन के खरे आनंद से भरपूर धरती के छंद

रंग सप्तक : जीवन के खरे आनंद से भरपूर धरती के छंद

लोकगीत क्या है? हृदय से फूटा, कंठ से निकला और अधरों से छलकता आदिम राग जिसमें जीवन की हर धड़कन को सुना जा सकता है.

रंग सप्तक : सबसे अलग आवाज़...

रंग सप्तक : सबसे अलग आवाज़...

'उम्र सीढ़ियां चढ़ती रही और मन के मौसम बदलते रहे. समय का एक लंबा पुल खंडवा और मेरे दरमियां बिछ गया था.

रंग सप्तक : कोलाज में रमते श्रीकांत

रंग सप्तक : कोलाज में रमते श्रीकांत

लेखक-चित्रकार श्रीकांत आप्टे के कोलाज देखकर कला और समय की जुगलबंदी का अहसास होने लगता है.

रंग सप्तक : उत्सव गाती रेखाएं

रंग सप्तक : उत्सव गाती रेखाएं

अगर आपके पास पारखी निगाह और संवेदना से भरा मन है तो रेखाकृतियों में बनती संवरती लोक छवियों का सुहाना संसार आपको देर तक घेर सकता है.

रंग सप्तक : दक्षिण में जन्मा उत्तर भारतीय

रंग सप्तक : दक्षिण में जन्मा उत्तर भारतीय

इच्छाशक्ति के मंत्र का जाप करते हुए इस कलासाधक ने अंततः साबित कर दिया था कि कला के लिए हदों के कोई मायने नहीं हैं. वह समूचे विश्व में कहीं भी अपनी सुगंध, अपना पराग बिखेर सकती है.