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मसला बेरोज़गारी का (भाग एक) : क्या आपातकालिक समस्या बन गई है बेरोज़गारी?

जब सरकारी आंकड़े उपलब्ध ही न हों तो इसका अलावा क्या चारा है कि गैरसरकारी अनुमान लगाए जाएं. सामाजिक क्षेत्र में काम करने वाले लोग बेरोज़गारी के आकार का अंदाजा लगाते रहते हैं और देश में मोटे तौर पर पर 10 से 15 करोड़ बेरोज़गारों का अनुमान लगाते हैं

Suvigya Jain
Saturday, February 10, 2018 - 15:57

जेलों पर लिखने वाले ऐसे तीन किरदार, जिनकी कहीं बात नहीं हुई

कमाल की बात यह है कि जेलों के नाम पर होने वाले शोध में भी अक्सर जेल का वही सच और वही साहित्य चर्चा में आता है जिसे मीडिया लपकती है. बाकी जेल की दुनिया की ही तरह कहीं गुमनामी में खो जाता है. 

Vartika Nanda
Saturday, February 3, 2018 - 13:08

बजट 2018 Analysis : किसानों ने क्या पाया इस बजट में...

कल बजट का पहला हिस्सा कृषि और उससे सम्बन्धी क्षेत्रों को ही समर्पित था. वित्त मंत्री के किसानों के लिए ऐलान शुरू करते ही एक विवाद उठ गया.

Suvigya Jain
Friday, February 2, 2018 - 15:14

Analysis : इनकम टैक्स में राहत नहीं, म्यूचुअल फंड से होने वाली कमाई पर भी देना होगा टैक्स

स्टैंडर्ड डिडक्शन लागू होने के बावजूद सैलरीड क्लास को महज 5,800 रुपये पर टैक्स कटौती का फायदा होगा, क्योंकि मौजूदा दोनों भत्ते (परिवहन और चिकित्सा) छीन लिए गए हैं. किसे कितना फायदा मिलेगा यह इस बात पर निर्भर करता है कि वह कौन से टैक्स स्लैब में आते हैं.

Manish Gupta
Friday, February 2, 2018 - 08:20

ANALYSIS : राजस्‍थान उपचुनाव में इसलिए कांग्रेस ने बीजेपी को पछाड़ा

कांग्रेस के राजस्थान उपचुनाव में कांग्रेस के जीतने में संजय लीला भंसाली की फिल्म ‘पद्मावत’ का एक बड़ा योगदान हो सकता है. 

Pankaj Ramendu
Thursday, February 1, 2018 - 17:11

स्कूली बच्चों में क्यों पनप रही हिंसक प्रवृत्ति?

हम लोगों के समय स्कूलों की होने वाली छुट्टियों की बात आज परी कथाओं की तरह अविश्वसनीय हो गई हैं. हम लोगों को अफसोस होता था कि इतनी छुट्टियां क्यों हो गईं. आज हमारे बच्चों को अपने ही साथियों की हत्या करनी पड़ रही है, ताकि छुट्टियां हो जाएं.

Vijay Agarwal
Monday, January 29, 2018 - 20:33

आंगनवाड़ी कार्यकर्ता उपनिवेश नहीं हैं!

सरकार द्वारा सिर्फ अपनी विशेष भाषा से ही 28 लाख आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं-सहायिकाओं के सम्मान-श्रम और भूमिका को दोयम दर्जे का साबित किया जा रहा है

Sachin Kumar Jain
Friday, January 19, 2018 - 17:51

हज सब्सिडी की समाप्ति : तुष्टीकरण से सशक्तिकरण की ओर एक कदम

सबसे बड़ी समस्या यह है कि सरकारों द्वारा मुस्लिम समाज से जुड़ा हुआ कोई भी निर्णय केवल सेक्युलर/कम्युनल के चश्मे से ही देखा जाता है और इसके प्रशासनिक दृष्टिकोण को हमेशा नजरअंदाज कर दिया जाता है.

Pavan Chaurasia
Friday, January 19, 2018 - 13:01

ओशो ने बताया, मौन रखा नहीं जाता…यह तो हमेशा होता है

ओशो ने सभी शास्त्रों और महान विचारकों की पुनर्व्याख्या की और नवसंन्यास जैसी संकल्पना को सामने रखा.

Pankaj Ramendu
Friday, January 19, 2018 - 11:35

मणिपुर में भाजपा सरकार के 10 महीने का 'रिपोर्ट कार्ड'

छह महीने की संक्षिप्त अवधि के भीतर मणिपुर सरकार ने अपनी कामकाज में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए विभिन्न पहलों की हैं, जिसे लोगों के सहयोग से कम समय में लोगों के सर्वोत्तम हित में ही प्रगति में लाया गया. 

Thongam Sunil Singh
Friday, January 5, 2018 - 20:22

Book Review : सुरों को साथ लिए घूमती बंजारन की गाथा 'सुर बंजारन'

भारत में नौटंकी की दो मुख्य शैली मानी जाती है हाथरस शैली और कानपुर शैली. नौटंकी का जन्मस्थल ही उत्तरप्रदेश माना गया है. हाथरस औऱ कानपुर उसके मुख्य केंद्र रहे थे. पंडित नथाराम गौड़ को स्वांग विधा का जनक भी माना जाता है. 

Pankaj Ramendu
Thursday, January 4, 2018 - 12:32

तिनका-तिनका : हाशिए के पार की एक दुनिया, जो खुद को सृजन से जोड़ रही है

तेलंगाना की जेल में बंदी 24 साल के गौरिश ने जेल में बंद मां को निरीहता से देखते उसके बच्चों और पिता को दिखाया है. पेशे से फोटोग्राफर रहे गौरिश के लिए चित्रकारी नई जिंदगी लेकर आई है.

Vartika Nanda
Tuesday, January 2, 2018 - 16:33

नए साल के लिए कुछ सच्ची कहानियां...

जेल शब्द से तो हमें भय लगता ही है, जेल के अंदर की​ जिंदगी के किस्से भी हमने सुने ही हैं. जेल में कानून और व्यवस्था को कायम रखने के लिए उसके प्रशासक का एक रौबदार चेहरा आंखों के सामने आता है.

Rakesh Kumar Malviya
Tuesday, January 2, 2018 - 17:39

देश की पांच बड़ी संस्थाओं के लिए कैसा रहा साल 2017

इस साल (2017) की कुछ घटनाओं के आधार पर देखने की कोशिश करते हैं कि इस साल पांच प्रमुख संस्थाओं की क्या छवि बनी.

Suvigya Jain
Thursday, December 28, 2017 - 16:02

राजनीतिक अनिश्चितताओं का साल रहा 2017...

कांग्रेस के लिए यह कोई विशेष हर्ष का साल तो नहीं रहा, लेकिन साल के अंत में उसको कुछ राहत ज़रूर मिली और पार्टी भाजपा के समक्ष एक मज़बूत विपक्ष के रूप में उभरने में कुछ हद तक सफ़ल भी रही. 

Pavan Chaurasia
Thursday, December 28, 2017 - 15:46