Zee Rozgar Samachar

पापा! आप करवाचौथ का व्रत क्यों नहीं रखते?

गांव में अम्मा और अम्मा की उम्र की अधिकतर महिलाएं कई सालों से करवा चौथ नहीं रहती हैं. अब अम्मा की जगह भाभी ने ले ली है, अम्मा जब व्रत रखना छोड़ी तो उसके पीछे अम्मा की तबियत बहुत बड़ा मुद्दा था, पर पापा स्वस्थ थे, मैं हमेशा से पापा से ये कहता था- 'पापा जब अम्मा आपके हर काम में सहयोग करती है, तब आप अम्मा की जगह व्रत क्यों नहीं रख लेते.'

पापा! आप करवाचौथ का व्रत क्यों नहीं रखते?
करवाचौथ पर पूजा करती महिलाएं. (तस्वीर साभार: PTI)

कृष्णचंद्र पाण्डेय

मुझे पता है, मेरे हिस्से में उसका हिस्सा है
तुम्हे कैसे बताएं उसका मेरा क्या रिश्ता है...
क्लास में खाली वक़्त में लिखी गई ये पंक्ति उस वक़्त की है, जब हम किसी के प्रेम में थे, ये प्रेम ही तो है, जो हमें जिन्दा होने का अहसास बराबर कराता रहता है. वरना जीवन की पटरी इतनी सीधी भी नहीं की जिंदगी की रेल सरपट दौड़ती रहे.
प्रेमी -प्रेमिकाओं का बंधन, पति-पत्नी के बीच खूबसूरत रिश्तों की अनकहीं कहानी, टूटते बिगड़ते रिश्ते, एक लंबी ख़ामोशी और उसी के बीच करवाचौथ का व्रत...

'हम उसे सब सौंप देंगे, मुझे क्या वापस मिलेगा, ये हम नहीं सोचते, प्यार किया है, मजाक नहीं, सात साल का बंधन है, उसे निभाना तो मेरा धर्म है, पति कैसा भी हो, पति पति होता है, पत्नी तो मेरी बाकी सब फेल, तुम इतनी खूबसूरत हो की हम तुम्हें कुछ कह नहीं सकते, सिर्फ महसूस कर सकते हैं, ये महसूस करना ही तो मेरा- तुम्हारा प्यार है'  

ये दो लोगों के बीच के अनगिनत संवाद का कुछ हिस्सा है, जो आप और हम सब इससे दो चार होते रहते हैं. संवाद एक माध्यम है, एक ताकत है, एक विकल्प है, जब हम सबके पास विकल्प होता है तो आजादी, अभिव्यक्ति और आत्मनिर्भर अपने आप आ जाती है. पर इन सब के पास आ जाने से सब सवालों के हल मिल जाते हैं, ये कहना मेरे लिए आसान नहीं होगा. कुछ सवालों के जवाब वक्त के साथ मिलते हैं. कुछ के तो मिलते भी नहीं. जैसे वर्षों से एक बात जेहन में तैर रही है, अधिकतर व्रत महिलाओं के लिए ही क्यों? आख़िर पति, प्रेमी, पुरुष, बच्चों के लिए कोई विशेष व्रत क्यों नहीं? क्या महिला ही पुरुष के लिए व्रत रखे, पुरुष महिलाओं के लिए व्रत क्यों नहीं रखते?

लोगों के अपने तर्क हो सकते हैं. कुछ लोग वैज्ञानिक, आध्यात्मिक सामाजिक दायरों और उसके रीति -रिवाजों को जवाब के रूप में प्रस्तुत कर सकते हैं. वास्तव में क्या महिलाएं ही पुरुष के लिए व्रत रखे, इसका जवाब सबसे अच्छा ये समाज ही दे सकता है. आखिर वह पुरुष क्या बोलेगा, जिसके लिए महिला बिना पानी पीये व्रत रखती हैं. किसी के लिए व्रत रखना असल किसी के समृद्धि और विकास उसके जीवन में शांति का अभिप्राय माना जाता है. जो अभिप्राय है वह हकीकत में कितना सही, सटीक हो इस बात का अंदाजा लगाना बड़ा मुश्किल होता है. और अंत में आप उसी को सच मानने लगते हैं, जो आपके हिस्से का किस्सा हो, जो आपके साथ घटित हुआ हो.

एक किस्सा मेरे हिस्से का है- जो कुछ इस तरह है- 
गांव में अम्मा और अम्मा की उम्र की अधिकतर महिलाएं कई सालों से करवा चौथ नहीं रहती हैं. अब अम्मा की जगह भाभी ने ले ली है, अम्मा जब व्रत रखना छोड़ी तो उसके पीछे अम्मा की तबियत बहुत बड़ा मुद्दा था, पर पापा स्वस्थ थे, मैं हमेशा से पापा से ये कहता था- 'पापा जब अम्मा आपके हर काम में सहयोग करती है, तब आप अम्मा की जगह व्रत क्यों नहीं रख लेते.' पापा जुबान के अंदर कुछ बुदबुदाते और तेज से कहते- महिला का काम पुरुष कैसे कर सकता है? मैं तपाक से बोलता जैसे आप तबियत ख़राब होने पर अम्मा को दवाई देते हैं, ठीक वैसे आप व्रत भी रख लिया कीजिए.

पापा मुस्कुराते हुए कहते तुम बहुत बदमाश हो, और मैं बदमाशी करते हुए छत पर पहुंच जाता और देखता- गांव के अधिकतर छतों पर कुछ महिलाएं अपने पुरुष की आरती उतारतीं, माथे पर टीका लगते हुए मुंह मीठा कराते हुए पैर छूती.

उम्र छोटी थी तो ये सारे दृश्य अच्छे लगते थे, जैसे जैसे बड़ा हुआ. दृश्य में कुछ अदृश्य और कुछ तकलीफ देने लगा, शायद अब मैं छत के दृश्य के सिवा गांव का वह भी दृश्य देख रहा था-  जब गांव के पुरुष जो करवा चौथ पर देवता की तरह पूजे जा रहे थे, वही राक्षस की तरह अपनी पत्नियों, बहनों को बेतहाशा पीटते हुए गंदी गालियां देते.

अम्मा आज भी करवा चौथ का व्रत नहीं रखेंगी. मेरे बहुत बार कहने के बाद भी पापा करवा चौथ का व्रत तो नहीं रखते पर पापा अम्मा की हर ख़ुशी के लिए अपनी बहुत सारी खुशी कुर्बान करने में नहीं हिचकते. ये बात कुछ खुशी दे जाती है. शायद ये पापा का अम्मा के लिए सबसे अच्छा करवाचौथ का व्रत है. क्योंकि पापा ने करवा चौथ की ख़ुशी अम्मा की ख़ुशी में खोज ली थी..

Zee News App: पाएँ हिंदी में ताज़ा समाचार, देश-दुनिया की खबरें, फिल्म, बिज़नेस अपडेट्स, खेल की दुनिया की हलचल, देखें लाइव न्यूज़ और धर्म-कर्म से जुड़ी खबरें, आदि.अभी डाउनलोड करें ज़ी न्यूज़ ऐप.