डोनाल्‍ड ट्रंप को The Twitter President क्‍यों कहा जाता है?

ट्विटर पर ट्रंप की बादशाहत 2016 में शुरू हुई और यह अभी तक कायम है. 6 दिसंबर 2016 को दुनिया को उनके ट्वीट की ताकत का अंदाजा हुआ. 

डोनाल्‍ड ट्रंप को The Twitter President क्‍यों कहा जाता है?

पिता के साए में बिल्डर बनने से लेकर अमेरिका के राष्ट्रपति बनने तक डोनाल्ड ट्रंप ने  'Survival of the fittest' यानी सर्वश्रेष्ठ के सलामत रहने की नीति अपनाई है. ट्रंप कई चीजों की शेखी बघारते हैं, जिनमें उनका रिपब्लिकन होना भी शामिल है. हालांकि अपनी बात से पलट जाने के लिए मशहूर ट्रंप, जाहिर तौर पर हमेशा रिपब्लिकन नहीं रहे हैं. 

1987 में ट्रंप ने मैनहटन में खुद को रिपब्लिकन के तौर पर दर्ज कराया. उस वक्त ट्रंप कई सर्वे के मुताबिक, अमेरिका में सबसे ज्यादा सम्मान हासिल करने वाले इंसान थे. लेकिन उनकी नजर अपने कारोबारी फायदे पर टिकी रही, लिहाजा वह साल 1999 में रिफॉर्म्स पार्टी में शामिल हुए और फिर 2001 में डेमोक्रेटिक पार्टी का रुख कर लिया. 

पार्टियों को लेकर यह बदलाव, ट्रंप के लिए शैशव काल के सपने को साकार करने की शुरुआत थी. इस सपने में पारिवारिक पहचान से अलग, खुद की सत्ता की प्रबल लालसा थी. ट्रंप आर्थिक संकट से जूझते किसी परिवार में बड़े नहीं हुए. फिर भी किसी चीज के लिए अपने पिता की इजाजत लेने में उनको जरूर संघर्ष करना पड़ा. कई लोगों को लगता है कि राष्ट्रपति पद की उम्मीदवारी को लेकर पिता की रजामंदी के लिए ट्रंप को जद्दोजहद करनी पड़ी. इसी वजह से उनको मीडिया के साथ लुकाछिपी का खेल भी खेलना पड़ा. हालांकि उस दौर में भी ट्रंप अक्सर कहा करते थे, 'मुझे यकीन है कि अगर मैं राष्ट्रपति पद की रेस में शामिल होता हूं तो जीत जाऊंगा.'

युवा काल में ट्रंप के कई इंटरव्यू करने वाली टेलीविजन की मशहूर शख्सियत निक्की हैसकेल ने एक डॉक्यूमेंट्री में कहा था, 'कुछ बच्चे फायरमैन होना चाहते हैं, कुछ डॉक्टर बनना चाहते हैं, पर डोनाल्ड हमेशा राष्ट्रपति बनना चाहते थे, लेकिन इसके लिए उन्होंने सही समय का इंतजार किया.' 

जीतने की 10 प्रतिशत संभावना होने पर भी लड़ा था राष्ट्रपति का चुनाव
1999 में ट्रंप ने रिफॉर्म्स पार्टी की तरफ से राष्ट्रपति चुनाव में खड़े होने का मन बनाया. अगले साल होने वाले चुनाव में नामांकन के लिए एक्सप्लोरेटरी कमेटी का रुख भी किया. हालांकि वह जल्दी ही रेस से बाहर हो गए, क्योंकि कई सर्वे के मुताबिक, उनकी जीत की संभावना 10 प्रतिशत से भी कम थी. जो शख्स सिर्फ जीतने के लिए विख्यात (या कुख्यात) रहा हो, उसके चुनाव से पीछे हट जाने का फैसला कोई हैरतअंगेज बात नहीं थी. ट्रंप को अक्सर यह कहते हुए पाया जाता था कि वह तभी चुनाव लड़ेंगे जब वो जीतेंगे.

बहरहाल, खबरों में रहने की ट्रंप की खुजली बरकरार रही. जब उनके दूसरे हथकंडे नाकाम रहे, तो ट्रंप कुछ साल बाद एक बार फिर चुनाव में खड़े होने की अफवाह के साथ सामने आए. एक बार फिर उन्होंने मीडिया को जैसे चिकोटी काटी. हालांकि ट्रंप की बेचैनी और बढ़ गई क्योंकि ध्यान आकर्षित करने की उनकी कोशिश को मीडिया में तवज्जो नहीं मिली. ज्यादातर लोगों को यह खबर ट्रंप के रियलिटी शो ‘द अप्रेन्टिस’ के लिए एक प्रोमोशनल स्टंट लगा.

बराक से विवाद के बीच ट्रंप के इस भाषण ने सब को हिला दिया था
बाद में ट्रंप कंजर्वेटिव पॉलिटिकल कॉन्फ्रेंस (CPAC) में शामिल हुए. ट्रंप को वहां देखकर लाजिमी तौर पर पूछा गया कि क्या वह राष्ट्रपति चुनाव लड़ रहे हैं? ट्रंप का जवाब था, ‘मैं यहां हूं क्योंकि मैं डोनाल्ड ट्रंप हूं.' उसी समय ट्रंप ने पहली बार बराक ओबामा के बर्थ सर्टिफिकेट पर चल रहे विवाद को लेकर सार्वजनिक तौर पर बयान दिया था. उन्होंने एक हिला देने वाला भाषण दिया. जिसे ना सिर्फ वाहवाही मिली बल्कि उस भाषण ने सियासत की दुनिया में उनका वास्तविक परिचय भी करा दिया.

पत्रकारों के लिए आयोजित एक पार्टी में ट्रंप को मिली थी नई ताकत
खैर, ट्रंप को डेमोक्रेटिक पार्टी के खिलाफ खड़े होने की ताकत व्हाइट हाउस में पत्रकारों के लिए आयोजित एक डिनर के बाद मिली. उस डिनर में राष्ट्रपति बराक ओबामा ने ट्रंप पर सीधा हमला किया था. उन्होंने तंज कसा था, ‘बर्थ सर्टिफिकेट मुद्दे को खत्म करने में ट्रंप सबसे ज्यादा खुश और गर्व महसूस करेंगे, क्योंकि इसके बाद वह जरूरी मुद्दों पर ध्यान दे सकते हैं. जैसे क्या हमने चांद पर लैंडिंग का झूठ गढ़ा? रोसवेल में वास्तव में क्या हुआ था? बिगी और ट्यूपैक कहां हैं?' ओबामा ने ट्रंप के रियलिटी शो पर भी तंज कसा. इसके साथ ही व्हाइट हाउस की कार्टून वाली तस्वीर भी सामने आई.

ओबामा अगला चुनाव जीतने के लिए आगे बढ़ रहे थे, लेकिन तभी डोनाल्ड ट्रंप ने चुनाव में खड़े होने का फैसला किया. अपने ट्रेड मार्क नारे ‘मेक अमेरिका ग्रेट अगेन’ यानी अमेरिका को फिर से महान बनाने के नारे के साथ फैसले पर मुहर भी लगा दिया. चुनाव प्रचार में करोड़ो रुपये पानी की तरह बहाने के साथ ट्रंप ने लोगों की राय पढ़ने के लिए ट्विटर पर एक ग्रुप बनाया, ताकि जीत की संभावना पर मंथन किया जा सके और साथ ही चुनाव प्रचार के लिए मुद्दों को भी समझा जा सके. यकीन करना मुश्किल है लेकिन सच है कि ‘मैक्सिकन वॉल’ की कुख्यात अवधारणा ट्विटर पर लाइक्स और रिट्वीट के आधार पर ही बनी थी.   

16 जून 2015, ट्रंप टावर में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस आयोजित करके ट्रंप ने अपनी योजनाओं का ऐलान किया. ट्रंप ने कहा, ‘भाइयों और बहनों, मैं आधिकारिक तौर पर राष्ट्रपति के चुनाव में खड़ा हूं और हम अपने देश को एक बार फिर महान बनाने जा रहे हैं.’

ऐसे शुरू हुआ ट्विटर पर ट्रंप की बादशाहत का सफर
ट्विटर पर ट्रंप की बादशाहत 2016 में शुरू हुई और यह अभी तक कायम है. 6 दिसंबर 2016 को दुनिया को उनके ट्वीट की ताकत का अंदाजा हुआ. ट्रंप ने अचानक बोइंग से नया 747 एयर फोर्स वन बनाने का कॉन्ट्रेक्ट वापस लेने की ख्वाहिश जताते हुए ट्वीट किया था. ट्रंप ने टवीट किया- ‘बोइंग भविष्य के राष्ट्रपतियों के लिए एक ब्रांड न्यू 747 एयर फोर्स वन बना रहा है, लेकिन इसके लिए चार बिलियन डॉलर कीमत बहुत ज्यादा है. ऑर्डर कैंसल!’

जिस दिन ट्रंप ने हिलेरी क्लिंटन को हराया और राष्ट्रपति की कुर्सी हासिल की, उसी दिन वॉशिंगटन में मौजूद जानकार समझ गए थे कि ट्रंप इस शक्तिशाली पद को जल्दी नहीं छोड़ेंगे. ट्रंप ने ऐसा ही किया. महाभियोग के लिए हल्ला-हंगामा और कई कानूनी मामलों के बावजूद ट्रंप ने उम्मीद के मुताबिक 2020 के चुनाव में खड़ा होने का ऐलान 18 फरवरी 2017 को ही कर दिया था.

ट्रंप का ‘वन मैन शो’ वाला चुनाव
जबकि 2020 में दुनिया के सामने महामारी का संकट रहा, ट्रंप ने  कोरोना से जुड़ी सभी सावधानियों को दरकिनार करते हुए अपना प्रचार जारी रखा. ट्रंप के नजिरिए से देखें तो यह चुनाव ‘वन मैन शो’ है. अमेरिका में पहली प्रेसिडेंसियल बहस 29 सितंबर 2020 को होनी है. राष्ट्रपति का चुनाव 3 नवंबर को होगा. इस बीच मतदाताओं को लुभाने के लिए ट्रंप-पेंस के कैंपेन में सभी दांव इस्तेमाल किए गए. ट्रंप कहते हैं कि उनकी नजर जीत पर है. हालांकि उदास करने वाली बात यह है कि उनकी लड़ाई कोविड-19 जैसे दुश्मन से नहीं है. बहरहाल जल्दी ही साफ हो जाएगा कि क्या ट्रंप दूसरी बार राष्ट्रपति बनेंगे? बशर्ते इसकी इजाजत ट्रंप दें.

(इस लेख में व्यक्त विचार लेखिका के निजी विचार हैं.)