नारी के प्रति ऐसी सोच क्यों?

कहने का तात्पर्य जिस कुल में नारियों की पूजा होती है वहां देवता का वास होता है। जिस कुल में स्त्रियों की पूजा नहीं होती, वहां सब काम निष्फल होते हैं। यह उक्ति आज नहीं, सदियों पहले वैदिक काल में कही गई थी।

यत्र नार्यस्तु पूज्यन्ते रमन्ते तत्र देवता:।
यत्रैतास्तु न पूज्यन्ते सर्वास्तत्राफला: क्रिया:।।

 
कहने का तात्पर्य जिस कुल में नारियों की पूजा होती है वहां देवता का वास होता है। जिस कुल में स्त्रियों की पूजा नहीं होती, वहां सब काम निष्फल होते हैं। यह उक्ति आज नहीं, सदियों पहले वैदिक काल में कही गई थी। तब से आज तक मानव समाज का सांस्कृतिक और बौद्धिक स्तर में काफी विकास हुआ है। हमारे समाज में नारी का महत्व इससे भी लगाया जा सकता है कि आज भी सरस्वती माता, दुर्गा माता, काली मैया, छठी मैया, लक्ष्मी माता, संतोषी माता, वैष्णो देवी की आराधना धूमधाम से की जाती है। लेकिन महिलाओं के प्रति संकीर्ण मानसिकता रखने वाले लोगों की सोच उनकी जुवां पर यदाकदा आती रहती है।
 
दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र को चलाने वाले अगर ऐसी सोच रखते हों तो दुखद है। जी हां, हाल ही में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के कट्टर समर्थक, बिहार के नवादा से भाजपा सांसद और केंद्रीय राज्य मंत्री गिरिराज सिंह ने एक प्रेस कांफ्रेस के बाद पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी और सोनिया गांधी की शादी के बारे में आपत्तिजनक बयान दिया। उन्होंने कहा कि राजीव गांधी ने किसी नाइजीरियन महिला से शादी की होती और गोरी चमड़ी नहीं होती तो क्या कांग्रेस उसका नेतृत्व स्वीकार करती?
 
महिलाओं पर नेताओं के बेतुके बोल का यह कोई नया मामला नहीं है। इससे पहले जदयू नेता शरद यादव ने राज्‍यसभा में बीमा बिल पर चर्चा के दौरान साउथ की महिलाओं पर अनर्गल बयान दिया था, उन्‍होंने कहा था, 'साउथ की महिला जितनी ज्‍यादा खूबसूरत होती है, जितना ज्‍यादा उसकी बॉडी। वह पूरा देखने में काफी सुंदर लगती है। वह नृत्‍य जानती है। शरद यादव महिलाओं पर अभद्र टिपण्णी पहले भी करते रहे हैं। महिला आरक्षण बिल जब पहली बार संसद में रखा गया था तब उन्होंने कहा था कि, इस बिल के जरिए क्‍या आप 'परकटी महिलाओं' को सदन में लाना चाहते हैं।
 
कांग्रेस नेता दिग्‍विजय सिंह ने अपनी ही पार्टी की नेता और सांसद मीनाक्षी नटराजन को सौ टंच माल कहा था, जब उनके बयान की निंदा होने लगी तो उन्होंने सफाई देते हुए कहा था कि सौ टंच माल का मतलब सौ फीसदी शुद्ध होता है। लेकिन मीडिया इसे लैंगिक टिप्पणी साबित करने पर तुला है। राष्‍ट्रपति प्रणब मुखर्जी के बेटे और कांग्रेस नेता अभिजीत मुखर्जी ने निर्भया गैंगरेप पर कहा था कि, विरोध प्रदर्शन करने वाली महिलाएं पिंक रिवोल्‍यूशन में मशगूल हैं। ये सजी संवरी लिपी-पुती महिलाएं दो मिनट की शोहरत पाने के लिए प्रदर्शन करने पहुंच जाती हैं। कांग्रेस प्रवक्‍ता और सांसद संजय निरूपम ने कहा था, 'स्‍मृति ईरानी कल तक टीवी पर ठुमके लगाती थीं। आज चुनाव विश्‍लेषक बन गई हैं। कांग्रेस के ही श्रीप्रकाश जायसवाल ने कहा था, नई शादी का मजा ही कुछ और होता है। ये तो सब जानते हैं कि पुरानी बीवी में वो मजा नहीं रहता।
 
समाजवादी पार्टी के प्रमुख मुलायम सिंह यादव ने एक कदम और बढ़कर ऐसा कहा था जो किसी को भी नगवार गुजरेगा। उन्होंन कहा था, बलात्कार में फांसी की सजा सही नहीं है, लड़कों से गलती हो जाती है। हम ऐसा कानून बनाएंगे जो बलात्कारियों को भी सजा दे और झूठी शिकायत करने वालों को भी सजा मिले। इससे पहले 2010 में मुलायम सिंह यादव ने यह भी कहा था कि महिला आरक्षण बिल पास होने से संसद ऐसी महिलाओं से भर जाएगी, जिन्हें देखकर लोग सीटियां बजाएंगे। मुख्यमंत्री रहते हुए लालू प्रसाद यादव ने कहा था, बिहार की सड़कों को हेमामालिनी के गाल की तरह बना दूंगा। मध्यप्रदेश भाजपा के नेता कैलाश विजयवर्गीय ने कहा था, 'महिलाओं को ऐसा श्रृंगार करना चाहिए, जिससे श्रद्धा पैदा हो न कि उत्‍तेजना। कभी-कभी महिलाएं ऐसा श्रृंगार करती हैं, जिससे उत्‍तेजित हो जाते हैं लोग, बेहतर है कि महिलाएं लक्ष्‍मण रेखा में रहें।'
 
हम 21वीं सदी में जी रहे हैं, जो अब तक का सबसे हाईटेक सदी है। इस सदी में जाति, धर्म, नस्ल, रंगरूप और लिंग के नाम पर किसी भी तरह के भेदभाव रखने वालों को समाज में कोई स्थान नहीं होना चाहिए। फिर भी इस तरह का बयान कोई साधारण व्यक्ति दे तो वह क्षमा का पात्र है। पर सत्ता के शिखर पर विराजमान व्यक्तियों के मुख से ऐसी भाषा निकले तो समाज का क्या हश्र होगा। समय आरोप प्रत्यारोप का नहीं है। ऑफ द रिकॉर्ड और ऑन द रिकॉर्ड का नहीं है। बल्कि समाज की आधी आबादी को सामाजिक, धार्मिक, आर्थिक, सांस्कृतिक, मानसिक और शारीरिक शोषण का शिकार होने से बचाने का है। अगर हमारे रहनुमा इस ओर ध्यान देंगे तो लोकतंत्र और मजबूत होगा नहीं तो...।