किताब का दावा, 2014 चुनाव में ज्यादा सक्सेस रेट के बावजूद लोकसभा में महिलाओं की संख्या कम

2014 लोकसभा चुनाव में 9.3 फीसदी महिला उम्मीदवार सफलतापूर्वक चुनी गईं थी, जबकि पुरुष उम्मीदवारों की सफलता की दर 6.3 फीसदी थी.

किताब का दावा, 2014 चुनाव में ज्यादा सक्सेस रेट के बावजूद लोकसभा में महिलाओं की संख्या कम
भारतीय संसद भवन. (फाइल फोटो)

नई दिल्ली: 2014 के लोकसभा चुनावों में महिला उम्मीदवारों की सफलता की दर पुरुष उम्मीदवारों की तुलना में ज्यादा थी फिर भी भारत में दस लोकसभा सीटों में केवल एक पर महिला सांसद काबिज हैं. यह जानकारी एक नई किताब में दी गई है. किताब का शीर्षक ‘‘भारतीय संसद में महिला सदस्य’’ है जिसे शिरीन एम राय और कैरोल सप्रे ने लिखा है. किताब में संसद के निचले सदन में महिलाओं के पहुंचने में आने वाली बाधाओं का जिक्र है.

किताब में लिखा गया है, ‘‘(2014 में)... 9.3 फीसदी महिला उम्मीदवार सफलतापूर्वक चुनी गईं (668 महिला उम्मीदवारों में 62) जबकि पुरुष उम्मीदवारों की सफलता की दर 6.3 फीसदी (7577 उम्मीदवारों में 481) थी.’’ लोकसभा में वर्तमान में महिलाओं की उपस्थिति करीब 12 फीसदी है जो 1951 के पहले आम चुनावों की तुलना में केवल सात फीसदी अधिक है. उस समय 489 सांसदों में केवल 24 महिला सदस्य थीं. लोकसभा में 545 सीट हैं जिसमें दो सीट एंग्लो इंडियन के लिए है जिसे राष्ट्रपति मनोनीत करते हैं.

2014 के आम चुनावों में 16 वीं लोकसभा के लिए 62 महिलाएं निर्वाचित हुईं जो 11 फीसदी है. उपचुनावों और नामित होने के कारण 2015 में यह संख्या बढ़कर 66 हो गई जिससे महिलाओं की तादाद करीब 12 फीसदी हो गई. किताब के मुताबिक दो बड़ी राष्ट्रीय पार्टियों में कांग्रेस ने ज्यादा संख्या में महिलाओं को नामित किया जबकि समय के साथ भाजपा ने भी महिलाओं की संख्या बढ़ाई.

बहरहाल, 2009 की तुलना में भाजपा ने 2014 में कम संख्या में महिला उम्मीदवारों को नामित किया (2009 में 44 जबकि 2014 में 37). इसकी तुलना में कांग्रेस ने ज्यादा संख्या में महिला उम्मीदवारों को नामित किया (2009 में 43 जबकि 2014 में 59).

(इनपुट-भाषा)