जिस सोने को आप कबाड़ में फेंकते हैं, उसी से तैयार होंगे ओलंपिक के मेडल

2020 में होने वाले टोक्यो ओलंपिक के लिए आयोजन समिति जापान के लोगों से पुराने स्मार्टफोन, टैबलेट, कंप्यूटर मांग-मांग कर इलेक्ट्रॉनिक कचरे से 16.5 किलो सोना और 1800 किलोग्राम चांदी निकाल चुकी है। इसी से ओलंपिक के मेडल तैयार होंगे। 

जिस सोने को आप कबाड़ में फेंकते हैं, उसी से तैयार होंगे ओलंपिक के मेडल
(फाइल फोटो)

नई दिल्लीः क्या आपको पता है आपकी जेब में सोना है? और जेब में ही क्यों आपके घर में जो इलेक्ट्रॉनिक सामान मसलन, स्मार्टफोन, टीवी, लैपटॉप, कंप्यूटर हैं उन सबमें सोना है. कई बार तो आप खुद कबाड़ समझकर सोने को घर से बाहर फेंक देते हैं. लेकिन अब इसी सोने से ओलंपिक के मेडल तैयार होंगे, जो 2020 में होने वाले टोक्यो ओलंपिक में खिलाड़ियों को दिए जाएंगे. टोक्यो ओलंपिक में करीब 5 हजार मेडल बांटे जाएंगे और इसके लिए ओलंपिक आयोजन समिति जापान के हर घर से इलेक्ट्रॉनिक कचरा मांग रही है ताकि ओलंपिक के लिए मेडल तैयार हो सकें. इसके लिए जापान में घरों के बाहर, सड़कों पर इलेक्ट्रॉनिक कचरा दान करने वाले बॉक्स लगे हैं. ओलंपिक समिति चाहती है कि 2020 के ओलंपिक को इतना यादगार बना दिया जाए कि दुनिया इसे याद रखे। 

आसान है इलेक्ट्रॉनिक चीजों से सोना निकालना
आपको हैरानी होगी कि खदान के बजाय पुराने स्मार्टफोन, कंप्यूटर, लैपटॉप से सोना निकालना ज्यादा आसान है. किसी खदान से तीन से चार ग्राम सोना निकालने के लिए करीब एक टन अयस्क (वो खनिज जिनमें कोई कीमती धातु होती है) को छानना पड़ता है. वहीं, मोबाइल फोन, टैबलेट और लैपटॉप जैसे एक टन इलेक्ट्रॉनिक कचरे से करीब 350 ग्राम सोना निकाला जा सकता है.

अब तक कितना-सोना चांदी निकला
आयोजकों ने अब तक मिले इलेक्ट्रॉनिक कचरे से 16.5 किलो सोना और 1800 किलोग्राम चांदी निकाली है. जबकि कांसे के मेडल के लिए 2700 किलो का लक्ष्य बहुत पहले ही पूरा हो गया है. फिलहाल सोने-चांदी के मेडल तैयार करने के लिए अभी करीब 54 प्रतिशत सोने और 44 प्रतिशत चांदी की जरूरत और बची है.


(फाइल फोटो)

दुनियाभर में ई-कचरे की भरमार

संयुक्त राष्ट्र के आंकड़े बताते हैं कि साल 2016 तक दुनिया ने करीब साढ़े चार करोड़ टन इलेक्ट्रॉनिक कचरा पैदा किया और ये कचरा हर साल 3-4 प्रतिशत की दर से बढ़ रहा है. फिलहाल केवल 20 प्रतिशत बेकार इलेक्ट्रॉनिक सामान ही रिसाइकिल हो पाते हैं और लोग उन्हें रिसाइकिल के लिए नहीं देते. लेकिन जापान ने इस इलेक्ट्रॉनिक कचरे का जो इस्तेमाल शुरू किया है, आने वाले दिनों में दूसरे देश भी इसे अपना सकते हैं.

2016 ओलंपिक में हुआ था प्रयोग
2016 के ओलंपिक में इलेक्ट्रॉनिक कचरे के रिसाइकिल का प्रयोग तो नहीं हुआ लेकिन इससे मिलता जुलता एक प्रयोग जरूर हुआ. 2016 के रियो ओलंपिक के दौरान 30 प्रतिशत चांदी जो मेडल बने वो फेंक दिए गए शीशे, बेकार पड़े टांके और एक्स-रे प्लेट से निकाले गए थे.